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तीन साल बाद खेल मैदान पर उतर रहे स्कूली छात्रों के लिए मैदान पर वापसी की राह आसान नहीं रहीं
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चंडीगढ़। कोविड 19 के बाद लगभग तीन साल बाद स्कूल के विद्यार्थी एक बार फिर मैदान पर उतरने जा रहे हैं। आज से इंटर स्कूल खेल प्रतियोगिताओं की शुरुआत फुटबॉल के प्री सुब्रतो कप से होने जा रही है।
मुकाबले गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल 22 ए और गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल 37बी में शुक्रवार से शुरू होने जा रहे हैं। लंबे इंतजार के बाद खेल प्रतियोगिताएं तो विभाग शुरू करवा दी हैं लेकिन विद्यार्थियों को एक बार फिर मैदान पर उतारना इतना आसान नहीं था। इनके कोचों को भी मनोबल बढ़ाने और खिलाड़ी के तौर पर मैदान पर लाने के लिए कड़ा अभ्यास करना पड़ा। इसके साथ ही अभिभावकों को भी समझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी तब जाकर यह विद्यार्थी अपनी प्रतिभा का परिचय देने के लिए तैयार हुए हैं।
बच्चों की घट गई थी शारीरिक क्षमता
जीएमएसएसएस 22ए के फुटबॉल कोच भूपिंदर सिंह ने कहा कि कोविड के बाद इन स्कूली विद्यार्थियों की मैदान पर वापसी कराना मेरे लिए कठिन रहा। यूटी शिक्षा के खेल विभाग ने इसी माह के शुरू में इंटर स्कूल खेल प्रतियोगिताओं को कराने का निर्णय लिया था और हमें टीमों को तैयार करने को कहा। विद्यार्थी लगभग तीन साल तक खेलों से दूूर रहे। ऐसे में जब मैंने उनको टीम बनाने के लिए बुलाया और टेस्ट लिया तो पाया कि उनका मनोबल काफी गिरा हुआ था। मैदान पर भागने के दौरान उनकी शारीरिक क्षमता भी कम देखने को मिली। ऐसे में उन्हें दोपहर और शाम को दो बार बुलाकर अभ्यास शुरू करवाया।
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खेल में जो सीखा था बिना अभ्यास भूल चुकी थी
प्री सुब्रतो कप में लड़कियों की टीम में हिस्सा लेने वाली काजल की उम्र 11 वर्ष है और वह छठी कक्षा में पढ़ाई करती है। मैदान पर वह स्ट्राइकर के तौर खेलेंगी। उन्होंने बताया कि कोविड 19 से पहले वह खेला करती थीं लेकिन लॉकडाउन के बाद स्कूल बंद हो गए। खेलते हुए जो कुछ सीखा था वह बिना अभ्यास के भूलते गई। अब एक बार फिर से जब टीम बनाई तो इसमें शामिल होने के बाद काफी दिक्कतें आईं।
तुम बेहतर करोगी... कोच के इन शब्दों ने दी ताकत
फुटबॉल के मैदान पर गोलकीपर की भूमिका में उतरने वाली छठी कक्षा की 10 वर्षीय हिमांशी ने बताया कि मेरे लिए दोबारा से मैदान पर वापसी करना काफी मुश्किल भरा रहा। कोरोना महमारी के समय मे मेरा आत्मविश्वास काफी नीचे चला गया था। इससे उभरने में मेरे कोच ने काफी मदद की। वह अभ्यास के दौरान हमेशा यह कहकर हौसला बढ़ाते थे कि तुम बेहतर करोगी। बस कोशिश करना मत छोड़ना। उन्होंने मुझे आगे बढ़ने में मदद की।
कुछ कदम भागते ही जकड़ लेती थी थकावट
फुटबॉल के मैदान पर डिफेंडर की भूमिका निभाने वाली 14 वर्ष की 10वीं कक्षा की छात्रा खुशी ने बताया कि वह लगभग तीन वर्ष तक मैदान से दूर रही। इंटर स्कूल के लिए के टीम बनाने की बारी आई तो मुझे भी बुलाया गया। जब मैदान पर अभ्यास करने लगी तो कुछ कदम तक भागते ही थकावट होने लगी। बॉल के पीछे भागने में दिक्कत आ रही थी। इसके बाद साथियों और कोच ने हिम्मत बढ़ाई। रोज थोड़ा-थोड़ा अभ्यास किया और अब मैदान में खेलने के लिए पूरी तरह से तैयार हूं।
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मुकाबले गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल 22 ए और गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल 37बी में शुक्रवार से शुरू होने जा रहे हैं। लंबे इंतजार के बाद खेल प्रतियोगिताएं तो विभाग शुरू करवा दी हैं लेकिन विद्यार्थियों को एक बार फिर मैदान पर उतारना इतना आसान नहीं था। इनके कोचों को भी मनोबल बढ़ाने और खिलाड़ी के तौर पर मैदान पर लाने के लिए कड़ा अभ्यास करना पड़ा। इसके साथ ही अभिभावकों को भी समझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी तब जाकर यह विद्यार्थी अपनी प्रतिभा का परिचय देने के लिए तैयार हुए हैं।
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बच्चों की घट गई थी शारीरिक क्षमता
जीएमएसएसएस 22ए के फुटबॉल कोच भूपिंदर सिंह ने कहा कि कोविड के बाद इन स्कूली विद्यार्थियों की मैदान पर वापसी कराना मेरे लिए कठिन रहा। यूटी शिक्षा के खेल विभाग ने इसी माह के शुरू में इंटर स्कूल खेल प्रतियोगिताओं को कराने का निर्णय लिया था और हमें टीमों को तैयार करने को कहा। विद्यार्थी लगभग तीन साल तक खेलों से दूूर रहे। ऐसे में जब मैंने उनको टीम बनाने के लिए बुलाया और टेस्ट लिया तो पाया कि उनका मनोबल काफी गिरा हुआ था। मैदान पर भागने के दौरान उनकी शारीरिक क्षमता भी कम देखने को मिली। ऐसे में उन्हें दोपहर और शाम को दो बार बुलाकर अभ्यास शुरू करवाया।
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खेल में जो सीखा था बिना अभ्यास भूल चुकी थी
प्री सुब्रतो कप में लड़कियों की टीम में हिस्सा लेने वाली काजल की उम्र 11 वर्ष है और वह छठी कक्षा में पढ़ाई करती है। मैदान पर वह स्ट्राइकर के तौर खेलेंगी। उन्होंने बताया कि कोविड 19 से पहले वह खेला करती थीं लेकिन लॉकडाउन के बाद स्कूल बंद हो गए। खेलते हुए जो कुछ सीखा था वह बिना अभ्यास के भूलते गई। अब एक बार फिर से जब टीम बनाई तो इसमें शामिल होने के बाद काफी दिक्कतें आईं।
तुम बेहतर करोगी... कोच के इन शब्दों ने दी ताकत
फुटबॉल के मैदान पर गोलकीपर की भूमिका में उतरने वाली छठी कक्षा की 10 वर्षीय हिमांशी ने बताया कि मेरे लिए दोबारा से मैदान पर वापसी करना काफी मुश्किल भरा रहा। कोरोना महमारी के समय मे मेरा आत्मविश्वास काफी नीचे चला गया था। इससे उभरने में मेरे कोच ने काफी मदद की। वह अभ्यास के दौरान हमेशा यह कहकर हौसला बढ़ाते थे कि तुम बेहतर करोगी। बस कोशिश करना मत छोड़ना। उन्होंने मुझे आगे बढ़ने में मदद की।
कुछ कदम भागते ही जकड़ लेती थी थकावट
फुटबॉल के मैदान पर डिफेंडर की भूमिका निभाने वाली 14 वर्ष की 10वीं कक्षा की छात्रा खुशी ने बताया कि वह लगभग तीन वर्ष तक मैदान से दूर रही। इंटर स्कूल के लिए के टीम बनाने की बारी आई तो मुझे भी बुलाया गया। जब मैदान पर अभ्यास करने लगी तो कुछ कदम तक भागते ही थकावट होने लगी। बॉल के पीछे भागने में दिक्कत आ रही थी। इसके बाद साथियों और कोच ने हिम्मत बढ़ाई। रोज थोड़ा-थोड़ा अभ्यास किया और अब मैदान में खेलने के लिए पूरी तरह से तैयार हूं।