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Chandigarh News: छह साल बाद बेअंत सिंह मेमोरियल में कन्वेंशन सेंटर पर शुरू होगा काम, आधा-आधा खर्च उठाएंगे चंडीगढ़ और पंजाब
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चंडीगढ़। आखिरकार छह साल बाद यूटी प्रशासन सेक्टर-42 में बेअंत सिंह मेमोरियल सेंटर में एक ऑडिटोरियम ब्लॉक व कन्वेंशन सेंटर का काम शुरू करने जा रहा है। मुख्य सचिव राजीव वर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में सोमवार को अर्बन प्लानिंग विभाग ने कन्वेंशन सेंटर की ड्राइंग सबमिट कर दी। इसकी अनुमानित लागत करीब 50 करोड़ है। बैठक में बताया गया है कि दो महीने के भीतर काम शुरू होने की उम्मीद है। इसको बनाने में आने वाले खर्च को चंडीगढ़ और पंजाब दोनों आधा-आधा उठाएंगे।
वर्ष 2019 में प्रशासन ने नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर की तर्ज पर इसे विकसित करने की मंजूरी दी थी, लेकिन विभिन्न कारणों की वजह से काम में देरी होती रही। सोमवार को हुई बैठक में पंजाब के भी कई अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में बताया गया कि बेअंत सिंह मेमोरियल में कुल नौ घटकों का निर्माण प्रस्तावित था, लेकिन अब तक चार का निर्माण पूरा हुआ है। इनमें लाइब्रेरी, स्मारक, ओपन एयर थिएटर और कैफेटेरिया शामिल हैं। लाइब्रेरी में मल्टीपर्पज हॉल, कॉन्फ्रेंस रूम और प्रदर्शनी हॉल भी मौजूद हैं। वहीं, ऑडिटोरियम ब्लॉक, कन्वेंशन सेंटर, सर्वधर्म रिपॉजिटरी, एग्जीबिशन-कम-मल्टीपर्पज बिल्डिंग और गेस्ट हाउस का निर्माण अभी बाकी है। बैठक में मुख्य सचिव राजीव वर्मा के अलावा प्रशासन के वित्त सचिव दीप्रवा लाकड़ा, चीफ आर्किटेक्ट, चीफ इंजीनियर, कल्चर निदेशक सौरभ अरोड़ा व पंजाब सरकार के भी कई अधिकारी उपस्थित रहे।
2019 में तैयार की थी योजना, वित्तीय बाधाओं के चलते हो गई देरी
ऑडिटोरियम ब्लॉक व कन्वेंशन सेंटर को लेकर दिसंबर 2022 तत्कालीन पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने अधिकारियों के साथ मेमोरियल का दौरा किया था। उस समय इसके निर्माण की अनुमानित लागत करीब 40 करोड़ रुपये बताई गई थी, लेकिन करीब ढाई साल की देरी की वजह से इसकी लागत 10 करोड़ रुपये बढ़कर 50 करोड़ रुपये हो गई है। इसके लिए पहले ही चंडीगढ़ ने 12 करोड़ और पंजाब सरकार ने 10 करोड़ दिए हैं। सेक्टर-42 स्थित इस मेमोरियल को विकसित करने की योजना 2019 में तैयार की गई थी, लेकिन वित्तीय बाधाओं के चलते कार्य शुरू नहीं हो सका था।
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14 एकड़ में बना है मेमोरियल
पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की याद में इस मेमोरियल का निर्माण 1999 में शुरू किया गया था। 14 एकड़ भूमि में फैला यह प्रोजेक्ट पंजाब सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन का ज्वाइंट वेंचर है और इसका प्रबंधन बेअंत सिंह मेमोरियल सोसाइटी कर रही है। एक गवर्निंग काउंसिल बनाई गई है, जिसके मुखिया पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक खुद हैं। उनके अलावा इसमें पंजाब के मुख्यमंत्री, उनके वरिष्ठ अधिकारी, प्रशासक के सलाहकार व अन्य अधिकारी हैं।
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वर्ष 2019 में प्रशासन ने नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर की तर्ज पर इसे विकसित करने की मंजूरी दी थी, लेकिन विभिन्न कारणों की वजह से काम में देरी होती रही। सोमवार को हुई बैठक में पंजाब के भी कई अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में बताया गया कि बेअंत सिंह मेमोरियल में कुल नौ घटकों का निर्माण प्रस्तावित था, लेकिन अब तक चार का निर्माण पूरा हुआ है। इनमें लाइब्रेरी, स्मारक, ओपन एयर थिएटर और कैफेटेरिया शामिल हैं। लाइब्रेरी में मल्टीपर्पज हॉल, कॉन्फ्रेंस रूम और प्रदर्शनी हॉल भी मौजूद हैं। वहीं, ऑडिटोरियम ब्लॉक, कन्वेंशन सेंटर, सर्वधर्म रिपॉजिटरी, एग्जीबिशन-कम-मल्टीपर्पज बिल्डिंग और गेस्ट हाउस का निर्माण अभी बाकी है। बैठक में मुख्य सचिव राजीव वर्मा के अलावा प्रशासन के वित्त सचिव दीप्रवा लाकड़ा, चीफ आर्किटेक्ट, चीफ इंजीनियर, कल्चर निदेशक सौरभ अरोड़ा व पंजाब सरकार के भी कई अधिकारी उपस्थित रहे।
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2019 में तैयार की थी योजना, वित्तीय बाधाओं के चलते हो गई देरी
ऑडिटोरियम ब्लॉक व कन्वेंशन सेंटर को लेकर दिसंबर 2022 तत्कालीन पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने अधिकारियों के साथ मेमोरियल का दौरा किया था। उस समय इसके निर्माण की अनुमानित लागत करीब 40 करोड़ रुपये बताई गई थी, लेकिन करीब ढाई साल की देरी की वजह से इसकी लागत 10 करोड़ रुपये बढ़कर 50 करोड़ रुपये हो गई है। इसके लिए पहले ही चंडीगढ़ ने 12 करोड़ और पंजाब सरकार ने 10 करोड़ दिए हैं। सेक्टर-42 स्थित इस मेमोरियल को विकसित करने की योजना 2019 में तैयार की गई थी, लेकिन वित्तीय बाधाओं के चलते कार्य शुरू नहीं हो सका था।
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14 एकड़ में बना है मेमोरियल
पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की याद में इस मेमोरियल का निर्माण 1999 में शुरू किया गया था। 14 एकड़ भूमि में फैला यह प्रोजेक्ट पंजाब सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन का ज्वाइंट वेंचर है और इसका प्रबंधन बेअंत सिंह मेमोरियल सोसाइटी कर रही है। एक गवर्निंग काउंसिल बनाई गई है, जिसके मुखिया पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक खुद हैं। उनके अलावा इसमें पंजाब के मुख्यमंत्री, उनके वरिष्ठ अधिकारी, प्रशासक के सलाहकार व अन्य अधिकारी हैं।