फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   after one year chandigarh pgi did not get any new Director

एक साल बाद भी PGI चंडीगढ़ को नहीं मिला डायरेक्टर, ये है वजह

Fri, 10 Mar 2017 09:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 10 Mar 2017 09:25 AM IST
विज्ञापन
after one year chandigarh pgi did not get any new Director
पीजीआई चंडीगढ़ - फोटो : DEMO Pic
मार्च 2015 में पीजीआई डायरेक्टर की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हुई थी। एक साल बीतने को है, लेकिन अब तक संस्थान को नया निदेशक नहीं मिल पाया है। नियुक्ति की फाइल कैबिनेट की अप्वाइंटमेंट कमेटी (एसीसी) के पास पड़ी हुई है। 
विज्ञापन


डायरेक्टर की नियुक्ति के लिए गठित कमेटी ने तीन डाक्टरों के नाम फाइनल कर एसीसी के पास भेज दिया था। उसके बाद से फाइल वहीं पड़ी है। अब पीएमओ को डायरेक्टर की नियुक्ति पर फैसला लेना है। संभावना जताई जा रही है कि 11 मार्च के बाद डायरेक्टर के नाम पर फैसला होगा। यह पहली बार है कि जब डायरेक्टर की नियुक्ति में करीब एक साल का वक्त लगा हो।
विज्ञापन


  पिछले साल मार्च में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने डायरेक्टर की अप्वाइंटमेंट के लिए आवेदन मांगे थे। 20 अप्रैल 2016 तक  आवेदन जमा करने का अंतिम दिन था। 30 से ज्यादा लोगों ने आवेदन किए। इसमें देश के अलग-अलग इंस्टीट्यूट के डाक्टरों ने आवेदन किया था। नवंबर में 30 लोगों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। इसमें मेरिट के आधार पर इंडोक्राइनोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी डा. अनिल भंसाली को पहले स्थान पर, पीडियाट्रिक की डा. मीनू सिंह को दूसरे स्थान पर और एडवांस आई सेंटर के एचओडी प्रोफेसर जगत राम को तीसरे स्थान पर सेलेक्ट किया गया। उसके बाद फाइल को एसीसी भेजा गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

आगे क्या संभावना है...

after one year chandigarh pgi did not get any new Director
नाम फाइनल होते ही उठा विवाद
चुने गए तीनों फाइनलिस्टों में प्रोफेसर जगतराम सबसे सीनियर हैं, जबकि डा. अनिल भंसाली 27 वे नंबर पर और डा. मीनू सिंह 52 वे नंबर पर हैं। इस पर पीजीआई की एससी-एसटी वेलफेयर एसोसिएशन ने अनुसूचित जाति के आयोग में शिकायत दी कि नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई है। प्रोफेसर जगतराम सबसे सीनियर हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें तीसरे नंबर पर रखा गया। आयोग ने जांच में पाया कि नियुक्ति प्रक्रिया मेें सब कुछ पहले से ही तय था। नियुक्ति प्रक्रिया को दोबारा से रिव्यू करने की सिफारिश की। इस दौरान डा. भंसाली पर 2005 में हुए एक मामले में पीजीआई की ओर से जारी की गई एडवाइजरी का मुद्दा उठा। दूसरे स्थान पर रहीं मीनू सिंह पर प्लेजरिज्म का आरोप लगा।

आगे क्या संभावना है
सूत्रों का दावा है कि कैबिनेट की अप्वाइंटमेंट कमेटी इन तीनों में से किसी को एक चुन सकती है या फिर विवाद को ध्यान में रखकर दोबारा से इंस्टीट्यूट बाडी (आईबी) के माध्यम से नाम मंगवाए। तीसरा कोई विकल्प नहीं है।

छह महीने से ज्यादा नहीं रह सकते कार्यवाहक डायरेक्टर 
नियमों के मुताबिक पीजीआई में छह महीने से ज्यादा कार्यवाहक डायरेक्टर नहीं रह सकते। डा. सुभाष वर्मा ने अक्तूबर में कार्यवाहक डायरेक्टर का पद संभाला था। अप्रैल में उनका कार्यकाल पूरा हो रहा है। इस नियम के तहत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को अप्रैल से पहले पीजीआई डायरेक्टर का अप्वाइंटमेंट करना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed