{"_id":"583477404f1c1b272413b3ef","slug":"after-74-days-of-creating-aawaj-e-punjab-front-could-t-decide-on-the-political-future","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सियासत की पिच पर 'क्लीन बोल्ड' हुए सिद्धू, अब बचा है सिर्फ ये विकल्प","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सियासत की पिच पर 'क्लीन बोल्ड' हुए सिद्धू, अब बचा है सिर्फ ये विकल्प
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 23 Nov 2016 03:40 PM IST
विज्ञापन
नवजोत सिद्धू
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पूर्व सांसद और क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू सियासत की पिच पर क्लीन बोल्ड होते नजर आ रहे हैं। कुछ समय पहले सिद्धू का बनाया सियासी फ्रंट आवाज-ए-पंजाब टूटकर बिखर चुका है। खुद सिद्धू के पास भी खास विकल्प नहीं बचे हैं। न ही विधानसभा चुनाव से पहले डैमेज कंट्रोल के लिए उनके पास समय बचा है।
सिद्धू ने 18 जुलाई 2016 को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। उसके बाद से आज तक उनके सियासी भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। पहले अटकलें लगाई जा रही थीं कि भाजपा उन्हें मना लेगी। फिर अचानक एक दिन आम आदमी पार्टी के कन्वीनर अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर सिद्धू के कदम का स्वागत कर दिया। उसके बाद से सिद्धू के आप में जाने की चर्चाएं चलने लगीं, पर हुआ कुछ नहीं।
सितंबर के पहले सप्ताह में परगट सिंह ने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्टर पोस्ट किया, जिस पर आवाज-ए-पंजाब लिखा था और सिद्धू, परगट और बलविंदर बैंस व सिमरजीत बैंस की फोटो थीं। परगट सिंह के इस पोस्ट ने नई अटकलों को जन्म दिया। आखिर आठ सितंबर को सिद्धू ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर एक सियासी फ्रंट आवाज-ए-पंजाब लॉन्च किया। हालांकि हैरानी की बात थी कि प्रेस कांफ्रेंस में जहां राज्य सरकार उनके निशाने पर रही, वहीं आप और केजरीवाल भी रहे। सिद्धू ने यहां तक कहा कि केजरीवाल उन्हें डेकोरेशन पीस बनाकर रखना चाहते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
सिद्धू ने 18 जुलाई 2016 को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। उसके बाद से आज तक उनके सियासी भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। पहले अटकलें लगाई जा रही थीं कि भाजपा उन्हें मना लेगी। फिर अचानक एक दिन आम आदमी पार्टी के कन्वीनर अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर सिद्धू के कदम का स्वागत कर दिया। उसके बाद से सिद्धू के आप में जाने की चर्चाएं चलने लगीं, पर हुआ कुछ नहीं।
विज्ञापन
सितंबर के पहले सप्ताह में परगट सिंह ने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्टर पोस्ट किया, जिस पर आवाज-ए-पंजाब लिखा था और सिद्धू, परगट और बलविंदर बैंस व सिमरजीत बैंस की फोटो थीं। परगट सिंह के इस पोस्ट ने नई अटकलों को जन्म दिया। आखिर आठ सितंबर को सिद्धू ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर एक सियासी फ्रंट आवाज-ए-पंजाब लॉन्च किया। हालांकि हैरानी की बात थी कि प्रेस कांफ्रेंस में जहां राज्य सरकार उनके निशाने पर रही, वहीं आप और केजरीवाल भी रहे। सिद्धू ने यहां तक कहा कि केजरीवाल उन्हें डेकोरेशन पीस बनाकर रखना चाहते थे।
विज्ञापन
कभी कांग्रेस और आप से नजदीकियां, कभी दोनों पर किया जुबानी हमला
नवजोत सिद्धू
- फोटो : File Photo
उधर, सियासी हलकों में चर्चा रहीं कि सिद्धू चाहते थे कि आप उन्हें प्रस्तावित सीएम घोषित करे, जिस पर केजरीवाल राजी नहीं थे। प्रेस कांफ्रेंस में सिद्धू ने संकेत दिए कि समान विचारधारा वाले लोगों को साथ लाएंगे। बादल और कैप्टन के नेक्सस को खत्म करेंगे। फिर कुछ दिन बाद उन्होंने बयान जारी कर कहा कि फ्रंट के लिए संगठन खड़ा करने का समय नहीं है। इसलिए वह कांग्रेस या आप के साथ गठबंधन करेंगे। उसके बाद से उनकी बैठकें चलती रहीं। पर न कांग्रेस के साथ जा सके और न आप के हो सके। अब हालत यह है कि बैंस ब्रदर्स ने उन्हें अलविदा कह कर आप के साथ अच्छा समझौता कर लिया।
‘इस्तीफा देते ही ज्वाइन करते आप’
सियासी विश्लेषकों का मानना है कि जिस दिन सिद्धू ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था, उसी समय आप ज्वाइन करते तो दोनों ही पंजाब में बहुत ज्यादा फायदा होता। क्योंकि तब लोगों के बीच सिद्धू एक बेहतर विकल्प के रूप में उभरे थे। समय गुजरता गया और सिद्धू कोई फैसला नहीं ले सके, इससे उनकी छवि को भी चोट पहुंची है। दोनों दलों के साथ डील की चर्चा ने भी उन्हें नुकसान पहुंचाया है।
परगट भी मंझधार में
सिद्धू पर भरोसा कर परगट सिंह भी बुरे फंस गए हैं। उनके पास पहले कांग्रेस और आप दोनों में जाने का विकल्प था। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तो प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि परगट आते हैं तो उनका स्वागत है, उन्हें कांग्रेस में आना चाहिए। हालांकि परगट सिंह ने गठबंधन के बारे में सब कुछ नवजोत सिद्धू पर छोड़ दिया था। जबकि, बैंस ब्रदर्स आप नेताओं के संपर्क में थे। सिद्धू के कोई फैसला न लेने से उनका भविष्य भी मंझधार में फंस गया है। अब परगट आप में जाना चाहते हैं, पर पार्टी इसके लिए तैयार नहीं है। परगट बुधवार को सिद्धू के साथ मीटिंग करने के बाद अपने भविष्य पर फैसला लेंगे।
‘इस्तीफा देते ही ज्वाइन करते आप’
सियासी विश्लेषकों का मानना है कि जिस दिन सिद्धू ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था, उसी समय आप ज्वाइन करते तो दोनों ही पंजाब में बहुत ज्यादा फायदा होता। क्योंकि तब लोगों के बीच सिद्धू एक बेहतर विकल्प के रूप में उभरे थे। समय गुजरता गया और सिद्धू कोई फैसला नहीं ले सके, इससे उनकी छवि को भी चोट पहुंची है। दोनों दलों के साथ डील की चर्चा ने भी उन्हें नुकसान पहुंचाया है।
परगट भी मंझधार में
सिद्धू पर भरोसा कर परगट सिंह भी बुरे फंस गए हैं। उनके पास पहले कांग्रेस और आप दोनों में जाने का विकल्प था। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तो प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि परगट आते हैं तो उनका स्वागत है, उन्हें कांग्रेस में आना चाहिए। हालांकि परगट सिंह ने गठबंधन के बारे में सब कुछ नवजोत सिद्धू पर छोड़ दिया था। जबकि, बैंस ब्रदर्स आप नेताओं के संपर्क में थे। सिद्धू के कोई फैसला न लेने से उनका भविष्य भी मंझधार में फंस गया है। अब परगट आप में जाना चाहते हैं, पर पार्टी इसके लिए तैयार नहीं है। परगट बुधवार को सिद्धू के साथ मीटिंग करने के बाद अपने भविष्य पर फैसला लेंगे।