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दुर्भाग्यपूर्ण है कि संविधान लागू होने के 68 साल बाद भी देश जातिवाद का गुलाम: हाईकोर्ट

Sat, 20 Apr 2019 06:44 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Vikas Kumar Updated Sat, 20 Apr 2019 06:44 AM IST
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After 68 years of implementation of the Constitution country still slaves of casteism
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : SELF

अंतरजातीय विवाह के बाद अपने ही परिवारों से सुरक्षा की मांग को लेकर दाखिल प्रेमी-जोड़े की याचिका पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। इसमें कोर्ट ने कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि संविधान जहां प्रत्येक नागरिक को जाति, धर्म और सामाजिक समानता प्रदान करता है, लेकिन उसके लागू होने के 68 साल बाद भी देश जातिगत भेदभाव से ग्रस्त है।

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जस्टिस राजशेखर अत्री ने प्रेमी जोड़े की सुरक्षा के लिए पंजाब सरकार सहित संबंधित जिले से एसएसपी को आदेश तो दे दिए हैं, लेकिन जातिगत असमानता पर भी कड़ी टिप्पणियां की हैं। जस्टिस अत्री ने कहा कि हमने समाज में प्राचीन काल से ही सभी को पूर्ण स्वतंत्रता और समानता प्राप्त थी, लेकिन एक सदी की गुलामी ने समाज को बेहद जटिल बना दिया, जिसके नतीजे में जाति प्रथा ने भी जटिल रूप ले लिया और समाज में जातियों को लेकर असमानता बढ़ती चली गई। 
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जस्टिस अत्री ने लता बनाम यूपी स्टेट केस का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि जातिप्रथा देश के लिए अभिशाप है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि जब देश को एक सूत्र में बांधने की बात की जाती है तो जातिप्रथा उसे विभाजित कर देती है। ऐसे में अंतरजातीय विवाह ही जातिप्रथा को खत्म करने का सबसे बड़ा और कारगर साधन है, जो देश के हित में भी है। 

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