देश के 282 शहीदों को 157 साल बाद आजादी
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शहादत के 157 वर्ष बाद रविवार सुबह अजनाला के कुएं से निकाली गई करीब 282 शहीदों की अस्थियों को गंगा में विसर्जित कर दिया गया।
1857 में देश पर मर मिटने वालों इन गुमनाम शहीदों की अस्थियों को हरिद्वार में कनखल के सती घाट पर पंजाब से पहुंचे लोगों और स्थानीय लोगों ने पूरे संस्कार के साथ गंगा के सुपुर्द कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
अजनाला में दशकों से बंद ‘कालेयां दा खूह’ के नाम से चर्चित ऐतिहासिक कुएं की खुदाई इतिहास शोधकर्ता सुरेंद्र कोछड़ के नेतृत्व में की गई थी। इस काम में स्थानीय लोगों और इलाके के गुरुद्वारे ने भरपूर सहयोग दिया।
इतिहासकार कोछड़ ने उनके पास उपलब्ध विभिन्न जानकारियों के हवाले से दावा किया था कि इस बंद कुएं में 1857 में लाहौर स्थिति छावनी में अंग्रेजी हुकूमत का विद्रोह करके भागे भारतीय सैनिकों को दफनाया गया है।
इतिहासकार दंपति ने कराया श्राद्ध तर्पण
खुदाई में यह बात सच साबित हुई और करीब 282 शहीदों की अस्थियां 157 साल बाद कुएं से निकाल ली गईं। अस्थियों के साथ ही जवानों का कुछ सामान भी कुएं से निकला जिससे उस ऐतिहासिक घटना की पुष्टि हो गई कि अंग्रेजों ने विद्रोह करने वाले भारतीय सैनिकों में से आधे सैनिकों की हत्या करके और बाकी का जीवित ही उक्त कुएं में दफन कर दिया था।
सैनिकों की अस्थियां कुएं से निकाले जाने के बाद अजनाला में उनकी याद में शहीद स्थल बनाने की मांग उठी वहीं शहीदों की आत्मा की शांति के लिए उनकी अस्थियां हरिद्वार ले जाकर गंगा में प्रवाहित करने का फैसला भी किया गया। शनिवार को इन गुमनाम सैनिकों की अस्थियां लेकर अमृतसर, अजनाला और बंगा से लोग हरिद्वारा पहुंच गए।
रविवार सुबह 7 बजे शांति कुंज आश्रम में सर्वप्रथम सैनिकों की आत्मा की शांति के लिए आश्रम के वरिष्ठ पुरोहितों द्वारा श्राद्ध तर्पण कराया गया। इसकी शुरूआत इतिहासकार दंपत्ति सुरेंद्र कोछड़ और अनीता सरीन द्वारा दीप प्रज्ज्वलित करके की गई।
संतों ने इतिहासकार को किया सम्मानित
दो घंटे चले श्राद्ध तर्पण के बाद शहीदों की अस्थियों को हरिद्वार के करीब 100 विद्वान संतों के नेतृत्व में कनखल सती घाट ले जाया गया। इस मौके पर कनखल में श्री गंगा सभा द्वारा भव्य समारोह का आयोजन भी किया गया। अस्थियों को गंगा-अर्पण करने से पहले भगवान सूर्य का आह्वान करते हुए पंडित राजिन्द्र शास्त्री ने कोछड़ से विष्णु-अर्पन कराया।
शहीदों की अस्थियां अजनाला के कुएं से निकलवाने में मुख्य भूमिका निभाने वाले इतिहासकार कोछड़ को श्री गंगा सभा रजि. और हरिद्वार के सतों ने सम्मानित किया।
इस मौके पर कोछड़ ने कहा कि अजनाला में श्री गुरू ग्रंथ साहिब के प्रकाश स्थान के नीचे मौजूद उक्त सैनिकों की अस्थियों से भरे कुएं की खोज करके और सैनिकों की अस्थियों को निकलवा कर उन्हें मुक्ति दिलाना ही उनकी मुहीम का एकमात्र उद्देश्य था, जिसमें उन्हें आज सफलता मिल गई है।
शहीदों के सम्मान के लिए पीएम से मिलेंगे
समारोह में श्रीकृष्णायन देशी गोरक्षा एवं गोलोक धाम सेवा समिति के स्वामी आत्मा नंद जी ने कहा कि इतिहासकार कोछड़ ने भागीरथी जैसा कार्य किया है। महा मंडलेश्वर स्वामी ईश्वर दास जी ने भी इतिहासकार कोछड़ के इस कार्य को सराहा। स्वामी कमलानंद जी ने कहा कि भारत सरकार को सन 1857 के शहीदों को उनका बनता सम्मान भेंट करना होगा।
श्री गंगा सभा रजि. के कार्यकारी अध्यक्ष पुरुषोतम शर्मा और रविन्द्र गोयल ने कहा कि शहीद सैनिकों की जो अस्थियां जांच के लिए चंडीगढ़ ले जाईं गईं हैं, उन्हें अति शीघ्र जांच करके हरिद्वार जल-विसर्जन के लिए भेजा जाए।
स्वामी शंकरानंद पर्वत, स्वामी शरदपुरी, स्वामी दर्शनानंद, स्वामी महेन्द्र ने कहा कि वे शहीदों को सम्मान दिलाने और उनकी अस्थियां वापस मंगवाने के लिए हरिद्वार के संत अगले माह कोछड़ के साथ प्रधानमंत्री से भेंट करेंगे।