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शोध में खुलासा: अगले साल पंजाब में 20 फीसदी बढ़ जाएगा एयरोसोल प्रदूषण, पराली जलाना तत्काल रोकना होगा

Wed, 09 Nov 2022 12:12 PM IST
ajay kumar हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 09 Nov 2022 12:12 PM IST
सार

अध्ययन ने पंजाब के लिए बढ़ते एयरोसोल प्रदूषण को रोकने की कई सिफारिशें भी की गई हैं लेकिन इसके साथ ही मोनामी दत्ता का कहना है कि पराली जलाने के बजाय वैकल्पिक तरीके खोजना जरूरी है क्योंकि फसल अवशेष जलाना इस राज्य में वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है।

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Aerosol pollution will increase by 20 percent in punjab next year
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : istock

विस्तार

पंजाब के लिए नया साल वायु प्रदूषण के मामले में अच्छी खबर नहीं ला रहा। सूबे की हवा केवल पराली के धुएं से ही प्रभावित नहीं होगी बल्कि एयरोसोल (धूल-मिट्टी के अलावा कार्बन के जहरीले छोटे-छोटे कण) हवा में इस सीमा तक भर जाएंगे कि लोगों को सांस की गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। यह खुलासा कोलकाता स्थित बोस इंस्टीट्यूट के एक शोध में हुआ है।

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इसके मुताबिक पंजाब ‘अत्यधिक संवेदनशील’ रेड जोन में पहुंच चुका है और 2023 में एयरोसोल प्रदूषण भी 20 फीसदी तक बढ़ जाएगा। शोधकर्ता डॉ. अभिजीत चटर्जी और पीएचडी स्कॉलर मोनामी दत्ता ने अपने शोध में बताया एयरोसोल वातावरण में छोटे-छोटे कणों को फैला रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। एयरोसोल प्रदूषण के कारण ही पंजाब रेड जोन वर्ग में आ चुका है, क्योंकि इससे हवा में दृश्यता (एओडी) में लगातार गिरावट आ रही है। पंजाब 0.5 से अधिक एओडी के साथ अत्याधिक संवेदनशील क्षेत्र बन चुका है।
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एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अभिजीत चटर्जी का कहना है कि अतीत में, भारत के गंगा के मैदान (इंडो गैंगटिक प्लेन) के सभी राज्य वायु प्रदूषण के संदर्भ में पहले से ही अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र में थे। आईजीपी के सभी राज्यों में, एओडी में सबसे अधिक वृद्धि पंजाब में हो सकती है। चूंकि अंतिम चरण में यह देखा गया था कि पराली (फसल अवशेष) जलाना वायु प्रदूषण का प्रमुख स्रोत है, इस पर तुरंत प्रतिबंध लगाने की जरूरत है।

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पंजाब में इन स्त्रोतों से बढ़ा एयरोसोल प्रदूषण
अध्ययन में पाया गया है कि 2005 से 2009 तक पंजाब में एयरोसोल प्रदूषण के प्रमु्ख स्रोत वाहनों से उत्सर्जन, ठोस ईंधन जलने और थर्मल पावर प्लांट (टीपीपी) से निकलने वाले उत्सर्जन थे लेकिन 2010-2014 के बीच, पराली जलाने की घटनाएं एयरोसोल प्रदूषण का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बन गईं। 2015-2019 के दौरान पराली जलाने के कारण एयरोसोल प्रदूषण 34-35 फीसदी तक बढ़ गया। इसके बाद टीपीपी (20-25 प्रतिशत) और वाहनों से उत्सर्जन (17-18 प्रतिशत) तक योगदान दे रहे हैं।
 
पराली जलाना प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण
अध्ययन ने पंजाब के लिए बढ़ते एयरोसोल प्रदूषण को रोकने की कई सिफारिशें भी की गई हैं लेकिन इसके साथ ही मोनामी दत्ता का कहना है कि पराली जलाने के बजाय वैकल्पिक तरीके खोजना जरूरी है क्योंकि फसल अवशेष जलाना इस राज्य में वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है। डॉ. चटर्जी ने जोर देकर कहा है कि उनके अध्ययन ने राज्य सरकार और नीति निर्माताओं को फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए तत्काल कार्य योजना बनाना जरूरी है, जिसमें विफल रहने पर पंजाब के लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और गंभीर हो सकती है।

एओडी का मानक 
एओडी की वैल्यू (मान) 0 और 1 है। 0 अधिकतम दृश्यता के साथ एक क्रिस्टल-क्लियर आकाश का संकेत देता है, जबकि 1 की वैल्यू बहुत धुंधली स्थितियों को इंगित करती है। एओडी मान 0.3 से कम ग्रीन जोन (सुरक्षित) के अंतर्गत आता है, 0.3-0.4 ब्लू जोन (कम असुरक्षित) है, 0.4-0.5 ऑरेंज (कमजोर) है जबकि 0.5 से अधिक रेड जोन (अत्यधिक असुरक्षित) है।

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