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जीएमसीएच-32 में MBBS में दाखिला, सिर्फ इन आवेदकों को मिलेगा लाभ, जानिए क्यों

Fri, 03 Aug 2018 10:51 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 03 Aug 2018 10:51 AM IST
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admission in mbbs course in gmch 32 chandigarh
court Order
जीएमसीएच-32 में एमबीबीएस के एडमिशन को लेकर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका खारिज हो गई है। फैसले में सिर्फ चंडीगढ़ से ताल्लुक रखने वाले आवेदकों को ही एससी कोटे का लाभ देने की बात कही गई थी। इसके साथ ही यह तय हो गया है कि अब मेडिकल कालेज में एमबीबीएस के एडमिशन में चंडीगढ़ के एससी कैटेगरी के स्टूडेंट्स को ही एससी कोटे का लाभ मिलेगा।
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बाहर से आने वाले स्टूडेंट्स को इसका लाभ नहीं मिलेगा। अब सात अगस्त से काउंसलिंग शुरू होगी। चंडीगढ़ निवासी सभ्या कमल ने जीएमसीएच सेक्टर-32 में चल रही एमबीबीएस की प्रवेश प्रक्रिया को चुनौती दी थी। याचिका में याची ने कहा था कि एससी कोटा का लाभ स्थानीय आवेदकों को देने के बजाय बाहर से आए लोगों को दिया जा रहा है। इससे शहर के स्थानीय आवेदकों का हक छिन रहा है, जो कि गलत है। एससी कोटा का लाभ केवल स्थानीय आवेदकों को ही मिलना चाहिए।
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राज्य के बाहर का यदि कोई एससी उम्मीदवार प्रवेश के लिए आवेदन करता है तो उसे एससी कोटे की जगह ओपन कैटेगिरी में रखा जाना चाहिए। याची ने कहा था कि वर्तमान में जीएमसीएस-32 प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर बाहरी अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों को प्रवेश दे दिया है, जिससे याची का नाम सूची से बाहर हो गया है। याची ने कहा कि जीएमसीएच-32 में एमबीबीएस में एससी कोटे की केवल 15 सीटें हैं और इसे स्टेट एससी कोटा माना जाना चाहिए।
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हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए याची की दलीलों को सही माना और जीएमसीएच-32 द्वारा तैयार की गई एससी श्रेणी की चयन सूची को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि स्टेट के एससी उम्मीदवारों को शामिल करते हुए नए सिरे से एडमिशन प्रक्रिया को संपन्न किया जाए। इस फैसले के खिलाफ हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और हिमाचल के चार स्टूडेंट ने सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एस अब्दुल नाजीर की खंडपीठ में हुई।


अपीलकर्ताओं की दलीलें सुनने के तुरंत बाद अपील खारिज कर दी गई है। चंडीगढ़ निवासी सभ्या कमल की ओर से पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री अश्विनी कुमार एडवोकेट के तौर पर मौजूद रहे।
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