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चंडीगढ़ में मौजूद खाली पड़े सरकारी मकानों का ब्योरा दे प्रशासन : हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। हाईकोर्ट के कर्मचारियों को अलॉट किए गए सरकारी मकानों की बदहाली और अलॉटमेंट के दौरान भेदभाव को लेकर एक अखबार में प्रकाशित समाचार पर लिए गए संज्ञान मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन से खाली पड़े सरकारी मकानों का ब्योरा मांगा है।समाचार के अनुसार हाईकोर्ट के कर्मचारियों को जो मकान अलॉट किए गए हैं उनमें टूटी दीवारें, उखड़ा पेंट और प्लास्टर हर जगह देखा जा सकता है। सेक्टर-22, 24, 27, 29, 33 और अन्य सेक्टरों में मौजूद इन सरकारी आवासों की छतें ढहने की कगार पर हैं। इससे यहां रहने वालों पर सीमेंट की धूल बरस रही है। दरवाजे और खिड़कियों के फ्रेम, जो कभी मजबूत हुआ करते थे, अब दीमकों द्वारा तबाह किए जा चुके हैं। आवासों के आसपास जंगली घास इतनी घनी है कि यह सांपों और अन्य खतरनाक जीवों का घर बन गई है। इससे कर्मचारियों को अपनी सुरक्षा को लेकर हमेशा डर बना रहता है। स्थिति की गंभीरता दीवारों से रिसने वाले बदबूदार पानी से उजागर होती है। शौचालय, जो बुनियादी जरूरत है, उसकी भी हालत बेहद खराब हो चुकी है। बाथरूम के दरवाजे अब टूटे हुए कब्जों पर लटके हैं। रसोई की हालत भी बेहतर नहीं है।
खबर के अनुसार ये केवल घर नहीं हैं, बल्कि ढहते हुए अवशेष हैं जो कभी मेहनती कर्मचारियों को आश्रय और आराम प्रदान करने के लिए थे। हाईकोर्ट ने कहा कि सिस्टम की सेवा करने वाले लोगों को खुद ही सम्मानजनक जीवन जीने के बुनियादी अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। ऐसे माहौल में जहां स्वच्छता और संरचनात्मक सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता, मौजूदा हालात घोर अन्याय है।
हाईकोर्ट ने अब प्रशासन से पूछा है कि कितने मकान खाली हैं, कितनों में रखरखाव का काम चल रहा है, कितनों आवंटन के अधीन हैं। कितने मकान अधिकारियों ने रखे हैं, जिन्हें पदोन्नत या स्थानांतरित करने के बाद नया अलॉट किया जा चुका है, अतिरिक्त मकानों को कितना समय रखा गया है।
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खबर के अनुसार ये केवल घर नहीं हैं, बल्कि ढहते हुए अवशेष हैं जो कभी मेहनती कर्मचारियों को आश्रय और आराम प्रदान करने के लिए थे। हाईकोर्ट ने कहा कि सिस्टम की सेवा करने वाले लोगों को खुद ही सम्मानजनक जीवन जीने के बुनियादी अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। ऐसे माहौल में जहां स्वच्छता और संरचनात्मक सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता, मौजूदा हालात घोर अन्याय है।
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हाईकोर्ट ने अब प्रशासन से पूछा है कि कितने मकान खाली हैं, कितनों में रखरखाव का काम चल रहा है, कितनों आवंटन के अधीन हैं। कितने मकान अधिकारियों ने रखे हैं, जिन्हें पदोन्नत या स्थानांतरित करने के बाद नया अलॉट किया जा चुका है, अतिरिक्त मकानों को कितना समय रखा गया है।
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