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बेहद गंभीर और दुर्लभ बीमारी है 'एडीए-2', बच्चे ही नहीं बड़े भी ग्रस्त, शोध में हुए अहम खुलासे

Sat, 12 Sep 2020 12:12 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 12 Sep 2020 12:12 PM IST
सार

  • पीजीआई ने बेहद गंभीर और दुर्लभ बीमारी से जुड़ा महत्वपूर्ण शोध करने में सफलता हासिल की
  • दुनियाभर में एडीए 2 के 210 मरीज, जबकि अकेले भारत में इस बीमारी के मरीजों की संख्या 33
  • इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टरों ने किया साबित, अमेरिकन कॉलेज ऑफ रह्युमेटालॉजी के जर्नल में प्रकाशन 

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ADA 2 is a Rare and Dangerous Disease for Childrens, Research in PGI Chandigarh
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media

विस्तार

चंडीगढ़ पीजीआई के विशेषज्ञों ने एडिनोसिन डेमिन मिनस 2 (एडीए 2) नामक एक बेहद गंभीर और दुर्लभ बीमारी से जुड़ा महत्वपूर्ण शोध किया है, जिसमें कई अहम खुलासे हुए। अब तक दुनियाभर के विशेषज्ञ जिस बीमारी को सिर्फ बच्चों से संबंधित मान रहे थे, उससे 30 से 40 साल के लोग भी प्रभावित हो रहे हैं। शोध में इस बीमारी के इलाज से जुड़े कई अहम खुलासे किए गए हैं। इसके महत्व को समझते हुए अमेरिकन कॉलेज ऑफ रह्युमेटालॉजी के जर्नल अर्थराइटिस एंड रह्युमेटालॉजी में 6 सितंबर को इसका ऑनलाइन प्रकाशन किया जा चुका है।
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पीजीआई के इंटरनल मेडिसिन के रह्युमेटालॉजिस्ट प्रो. अमन शर्मा के नेतृत्व में हुए शोध की सफलता पर डायरेक्टर प्रो. जगतराम ने टीम को बधाई दी। प्रो. अमन शर्मा ने बताया कि वैस्कुलाइटिस से जुड़ी इस बीमारी में खून की नली में सूजन आ जाने से खून का प्रवाह बाधित हो जाता है। इससे दिमागी स्ट्रोक आता है। इस बीमारी को लेकर दुनिया भर में अलग-अलग जगहों पर 2014 से शोध किए जा रहे हैं, जिसमें अब तक यह बात सामने आ रही थी कि जन्म से 5 साल तक के बच्चे ही इससे प्रभावित होते हैं।
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पीजीआई की रिसर्च के आधार पर अब बड़े लोगों में भी बीमारी के लक्षण दिखने पर इंजेक्शन देकर स्ट्रोक को समाप्त करने में सफलता मिल सकेगी। प्रो. अमन शर्मा ने बताया कि इस दुर्लभ बीमारी के इलाज के लिए एनटीटीएनएफ इंजेक्शन को बेहद कारगर पाया गया है। ये इंजेक्शन दो प्रकार के हैं। पहला इनोवेटर ड्रग जो काफी महंगा होता है। दूसरा डायो सिमिलर जो असर पहले की ही तरह करता है, लेकिन सस्ता होता है। यह शोध 2017 में शुरू किया गया था। दुनियाभर में इस बीमारी के अब तक 210 मरीज सामने आ चुके है, जबकि अकेले भारत में मरीजों की संख्या 33 है।
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जैन और अग्रवाल में खतरा ज्यादा

प्रो. अमन शर्मा ने बताया कि जीन से जुड़ी बीमारी होने के कारण इसका जैन और अग्रवाल समाज के लोगों में होने का खतरा ज्यादा है। क्योंकि वह अपनी कम्युनिटी में ही विवाह करते हैं। उनमें जीन का आदान-प्रदान एक-दूसरे में ही होता रहता है, जिससे किसी एक में भी इससे जुड़ी समस्या होने पर उसका संक्रमण समाज के अन्य लोगों में होता जाता है। ऐसे में यह बहुत जरूरी है कि जैन और अग्रवाल कम्युनिटी से  कोई बच्चा स्ट्रोक के साथ इमरजेंसी में आता है तो उसे एनटीटीएनएफ इंजेक्शन देना फायदेमंद साबित हो सकता है। क्योंकि उसके अंदर इस बीमारी के होने का खतरा ज्यादा होता है।  

अन्य अंगों पर भी आया सकारात्मक परिणाम
प्रो. अमन शर्मा ने बताया कि स्ट्रोक के मरीज की डाइग्नोसिस कर अगर तय समय में एनटीटीएनएफ इंजेक्शन दे दिया गया तो स्ट्रोक का खतरा समाप्त होने के साथ ही अन्य ऑर्गन पर भी उसका अच्छा परिणाम सामने आता है। इस बीमारी में खून की नलियों में सूजन आने के साथ शरीर के अन्य अंग तेजी से प्रभावित होने लगते हैं। रिसर्च के माध्यम से इस इंजेक्शन का अन्य ऑर्गन पर सकारात्मक परिणाम आना बड़ी उपलब्धि है।

अन्य विशेषज्ञों को भी इसकी जानकारी जरूरी
खून की नसों से जुड़ी इस बीमारी में स्किन के साथ ही शरीर के अन्य अंगों पर भी प्रभाव देखने को मिलता है। प्रो. अमन शर्मा का कहना है कि ऐसी स्थिति में न्यूरोलॉजिस्ट, ऑप्थमोलॉजिस्ट, स्किन स्पेशलिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट और फिजीशियन को भी इस बीमारी से जुड़ी जानकारियां होनी बेहद जरूरी हैं, ताकि मरीज में इससे संबंधित लक्षण दिखने पर उसे तत्काल सही इलाज उपलब्ध कराया जा सके।

क्या है एडीए 2
एडेनोसिन डेमिनमिनस 2 (एडीए 2) एक प्रकार का आनुवांशिक विकार है। जिस मरीज में एडेनोसिन डेमिनमिनस 2 (एडीए 2) नामक एंजाइम या प्रोटीन की कमी होती है, शरीर के ऊतकों, विशेष रूप से रक्त वाहिकाओं को बनाने वाले ऊतकों में सूजन हो जाती है।
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