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पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप घोटाला: दो अधिकारी नपे, एक की पेंशन रोकने तो दूसरे की सेवा समाप्त करने का आदेश

Mon, 05 Jun 2023 01:25 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 05 Jun 2023 01:25 AM IST
सार

अगस्त 2020 में उजागर हुए उक्त घोटाले में तत्कालीन सामाजिक न्याय व अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री साधू सिंह धर्मसोत पर आरोप लगे हैं। इस मामले की जांच राज्य विजिलेंस ब्यूरो द्वारा की जा रही है।

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Action against two officers in post matric scholarship scam
घोटाला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब के चर्चित पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप घोटाले में राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक सेक्शन आफिसर की सेवाएं तुरंत प्रभाव से समाप्त करने और एक अन्य रिटायर्ड डिप्टी कंट्रोलर की पेंशन रोकने का आदेश जारी किया है।

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जानकारी के अनुसार 63,91 करोड़ रुपये के उक्त घोटाले में इन दोनों अधिकारियों को अक्तूबर 2021 में चार्जशीट किया गया था। इस मामले की जांच के आधार पर अब उन पर कार्रवाई की गई है। इनमें से डिप्टी कंट्रोलर इसी साल रिटायर हुए हैं। जबकि सेवारत सेक्शन अधिकारी की सेवाएं समाप्त करने का आदेश दिया गया है। उनकी फाइल पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन (पीपीएससी) को भेज दी गई है।
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गौरतलब है अगस्त 2020 में उजागर हुए उक्त घोटाले में तत्कालीन सामाजिक न्याय व अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री साधू सिंह धर्मसोत पर आरोप लगे हैं। इस मामले की जांच राज्य विजिलेंस ब्यूरो द्वारा की जा रही है। हालांकि, धर्मसोत पर आय से अधिक संपत्ति का मामला पहले भी दर्ज है। यह घोटाला उजागर करते हुए सामाजिक न्याय विभाग के सचिव ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि विभाग के पास स्कॉलरशिप के लिए बांटी गई 39 करोड़ रुपये की राशि का कोई रिकॉर्ड नहीं है। 
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इस रिपोर्ट के आधार पर जब जांच आगे बढ़ी तो यह सामने आया कि गायब हुई राशि का एक बड़ा हिस्सा ऐसे संस्थानों को पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के नाम पर दे दिया गया, जो अस्तित्व में ही नहीं थे। इसके अलावा जिन निजी संस्थानों से विभाग ने आठ करोड़ रुपये वसूलने थे, उनका री-ऑडिट करवाकर 16.91 करोड़ रुपये और जारी कर दिए गए। इस तरह विभाग को 24.91 करोड़ रुपये की अतिरिक्त चपत लगी।

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