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हरियाणा: डिप्टी सीएम को नजरअंदाज करने की शिकायत, एसीएस ने 20 पेज के जवाब में कहा-कभी नहीं किया

Wed, 20 Sep 2023 11:12 AM IST
निवेदिता वर्मा सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 20 Sep 2023 11:12 AM IST
सार

4 जुलाई को हुई कैबिनेट की बैठक में एसीएस आनंद मोहन शरण की ओर से मानेसर के गांवों की जमीन के बदले मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा था। बैठक में ही उपमुख्यमंत्री ने एसीएस शरण पर उनको नजरअंदाज करने का आरोप लगाया था और इस मामले को लंबित रखवा दिया था।

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ACS of Industries Department given reply on complaint of Haryana Deputy cm Dushyant Chautala being ignored
सीएम मनोहर लाल और डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला - फोटो : फाइल

विस्तार

हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की नजरअंदाज करने की शिकायत के जवाब में उद्योग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) आनंद मोहन शरण ने 20 पेज का जवाब दिया है। अपने जवाब में एसीएस ने तथ्यों के साथ कहा है कि उन्होंने कभी भी विभागीय मंत्री को नजरअंदाज नहीं किया है। जहां तक कैबिनेट में प्रस्ताव लाने की बात है तो यह मुख्यमंत्री के आदेश के बाद लाया गया था। 
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मुख्य सचिव ने एसीएस के जवाब को साथ लगाकर फाइल मुख्यमंत्री के पास भेज दी है। अब आगामी फैसला मुख्यमंत्री मनोहर लाल को लेना है। हालांकि, सूत्रों का दावा है कि एसीएस द्वारा अपने जवाब में दिए गए तथ्यों के आधार पर अब इस मामले में कार्रवाई के बजाय इस शिकायत को दफ्तर दाखिल करने की तैयारी है।
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उपमुख्यमंत्री ने लगाया था आरोप
उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने अतिरिक्त मुख्य सचिव पर नजरअंदाज करने के आरोप लगाते हुए मुख्य सचिव को पत्र लिखा था और कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद मुख्य सचिव संजीव कौशल की ओर से अतिरिक्त मुख्य सचिव से इन आरोपों के बाद जवाब तलब किया गया था। एसीएस आनंद मोहन शरण ने पूरी तैयारी के साथ अपना जवाब मुख्य सचिव को दिया है। 
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20 पेज के जवाब में एसीएस ने दावा किया है कि उन्होंने कभी भी विभागीय मंत्री को नजरअंदाज नहीं किया है। इसके अलावा, जहां तक कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव लाने का मामला है, इसके आदेश खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दिए थे। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद ही प्रस्ताव लाया गया था। बाकायदा मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर वाले दस्तावेज भी जवाब में लगाए गए हैं। 

एसीएस का जवाब मिलने के बाद मुख्य सचिव की ओर से फाइल मुख्यमंत्री के पास भेज दी गई है। मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से लिखा गया है कि एसीएस के जवाब को देखते हुए उचित निर्णय लिया जाए। सूत्रों का दावा है कि एसीएस द्वारा दिए गए जवाब से काफी हद तक सरकार संतुष्ट है और इस मामले को निपटाने के लिए इस शिकायत को दफ्तर दाखिल करने की तैयारी है। हालांकि, अभी इस पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल की मुहर लगना बाकी है।

बिना जानकारी कैबिनेट में प्रस्ताव लाने पर शुरू हुआ टकराव
4 जुलाई को हुई कैबिनेट की बैठक में एसीएस आनंद मोहन शरण की ओर से मानेसर के गांवों की जमीन के बदले मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा था। बैठक में ही उपमुख्यमंत्री ने एसीएस शरण पर उनको नजरअंदाज करने का आरोप लगाया था और इस मामले को लंबित रखवा दिया था। बाद में सीएमओ ने इसी मामले को लेकर 7 जुलाई को फिर से कैबिनेट की बैठक बुलाकर इस प्रस्ताव को पारित कराया था। उसके बाद ही उप मुख्यमंत्री एसीएस से नाराज चल रहे हैं।


कार्रवाई पर अड़े हैं डिप्टी सीएम
एसीएस के खिलाफ कार्रवाई के लिए डिप्टी सीएम मुख्य सचिव को तीन पत्र लिख चुके हैं। उप मुख्यमंत्री अपने किसी भी विभाग में शरण की सेवाएं नहीं चाहते। अभी शरण के पास उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के साथ उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव का जिम्मा है, क्योंकि उद्योग एवं वाणिज्य विभाग दुष्यंत चौटाला के पास है और डिप्टी सीएम एसीएस को अपने विभाग से बदलने की सिफारिश कर चुके हैं।
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