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निजी अस्पतालों में मुफ्त होगा तेजाब पीड़ितों का इलाज
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर।
Updated Sat, 30 May 2015 02:24 PM IST
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एसिड हमले से पीड़ित किसी भी महिला को उपचार के लिए कोई भी निजी या सरकारी अस्पताल भर्ती करने से मना नहीं कर सकता है।
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पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए जिलास्तर पर आपराधिक चोट लगने मुआवजा बोर्ड का भी गठन किया जाएगा। एसिड हमले से पीड़ित को कम से कम तीन लाख रुपये का मुआवजा भी प्रदान किया जाएगा और जिले में तेजाब की बिक्री पूर्णतया प्रतिबंधित रहेगी।
जिलाधीश एवं उपायुक्त डॉ. अंशज सिंह ने यह आदेश जारी किए है, हरियाणा के मुख्य सचिव व सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनुपालना करते हुए उपायुक्त ने झज्जर जिले में यह आदेश प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं।
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उपायुक्त डॉ. अंशज सिंह के आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गए। जारी आदेशों में सभी निजी अस्पताल एसिड हमले से पीड़ित को सुविधाओं की कमी की वजह से भर्ती करने से इंकार नहीं कर सकेंगे, सभी सुविधायुक्त अस्पतालों में पीड़ितों का उपचार नि:शुल्क होगा।
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उपचार के साथ-साथ पीड़ितों से दवा, बेड व भोजन आदि के लिए भी किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। अगर कोई भी निजी अस्पताल उक्त आदेशों का उल्लंघन करेगा तो उसके खिलाफ सीआरपीसी, 1973 की धारा 357सी के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य सचिव के आदेशों के साथ लक्ष्मी देवी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया व अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार अब जिले में खुले में बिकने वाले तेजाब की बिक्री पूर्णतया प्रतिबंधित कर दी गई है। जो भी तेजाब की बिक्री करेगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण एसिड हमले से पीड़ित को वित्तीय सहायता के साथ-साथ तुरंत कानूनी सहायता उपलब्ध कराएगा और जिलास्तर पर मुआवजा बोर्ड का गठन भी किया जाएगा। इस बोर्ड में जिला जज, उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक व सिविल सर्जन आदि के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।