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कोठी कब्जा प्रकरण : राहुल मेहता को जान से मारना चाहते थे आरोपी

Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 12 May 2021 02:07 AM IST
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चंडीगढ़। सेक्टर-37 स्थित करोड़ों की कोठी हथियाने के मामले में जिला अदालत में दायर हुई चार्जशीट में नए-नए खुलासे हुए हैं। अब पता चला है कि सभी आरोपी कोठी मालिक राहुल मेहता को जान से मारना चाहते थे, ताकि भेद न खुल सके।
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बता दें कि दो हफ्ते पहले चंडीगढ़ पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट दायर की थी। इसमें खुलासा हुआ है कि अप्रैल 2017 में आरोपी संजीव महाजन, खलिंदर सिंह, सुरजीत सिंह और सुखबीर बिट्टू ने राहुल मेहता को पहले मारा-पीटा। फिर उसके बाद नशे का इंजेक्शन लगवाकर कई कागजों पर उसके हस्ताक्षर करवाए। बाद में उसे गुजरात छोड़ आए।

उसके बाद जब आरोपी कोठी को अपने नाम करवाने पहुंचे तो पता चला कि प्रापर्टी राहुल मेहता के नाम पर नहीं है। कोठी उसकी मां के नाम पर थी। मरने से पहले उन्होंने वसीयत अपनी बहन के नाम पर कर दी थी। उनकी भी मौत हो गई और कोठी किसी के नाम पर ट्रंासफर नहीं हुई। उसके बाद आरोपियों ने पैसे वाले लोगों की तलाश शुरू कर जालसाजी की तैयारी की। प्रॉपर्टी डीलर अशोक अरोड़ा ने उनकी मुलाकात अरविंद सिंगला से करवाई। अरविंद सिंगला ने 50 प्रतिशत हिस्सेदारी की मांग की थी, हालांकि सभी आरोपी 33 प्रतिशत देने के लिए राजी हुए। 67 प्रतिशत हिस्सा सतपाल डागर और खलिंदर सिंह कादियान को जाना था। अरविंद सिंगला ने तो राहुल मेहता के नाम पर 5 लाख रुपये का चेक भी दे दिया था बाकी के पैसे भी आने थे लेकिन उससे पहले ही राहुल मेहता कहीं गायब हो गया था।
पुलिस ने अपनी चार्जशीट में तरुण कुमार नाम के एक शख्स की गवाही डाली है। उसने बताया कि 26 अप्रैल 2017 को संजीव महाजन और सुरजीत बाउंसर राहुल मेहता को ढूंढने दिल्ली आए थे। उन्होंने राहुल मेहता को सभी रैन बसेरा में ढूंढा। आखिर में कश्मीरी गेट के पास स्थित रैन बसेरा में राहुल मेहता मिल गया। उसके बाद उन्होंने राहुल मेहता को नशीले इंजेक्शन लगाकर कागजात पर उसके हस्ताक्षर लिए। मई 2017 में संजीव महाजन तरुण कुमार को गाड़ी में बिठाकर सेक्टर-9 की आईसीआईसीआई बैंक की शाखा चंडीगढ़ पहुंचा। इसके बाद उसे 4 लाख रुपये का चेक देकर बैंक के अंदर भेजा गया। उसने पहचानपत्र की कॉपी जमा करवाकर चार लाख रुपये नकद निकलवाए और संजीव महाजन को लाकर दे दिए। इसके बाद उसे सेक्टर-37 में उतार दिया गया। तरुण ने कहा कि आरोपी राहुल मेहता को मरवा देना चाहते थे या नशे का केस डाल कर जेल भिजवाना चाहते थे, ताकि वह अपना मुंह ना खोल सके। कुछ दिन बाद ही सुरजीत बाउंसर उसे गुजरात छोड़कर आया था।
डर की वजह से केमिस्ट शॉप संचालक सेक्टर छोड़कर चला गया
चार्जशीट में कहा कि जिस केमिस्ट की दुकान से राहुल मेहता दवाइयां लेता था, उसके मालिक अमित गुप्ता को राजदीप ने मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। इसके कारण वह अपनी दुकान और सेक्टर-37 छोड़ने के लिए मजबूर हो गया था। पुलिस ने कहा कि राजदीप ने खुद को कानून से ऊपर रखकर कानून की शक्ति का दुरुपयोग करते हुए आम जनता के बीच में डर और अविश्वास का माहौल पैदा किया। इसका खामियाजा बेगुनाह अमित गुप्ता को अपने परिवार की सलामती के लिए सेक्टर 37 छोड़कर चुकाना पड़ा। पुलिस ने राजदीप पर आरोप लगाते हुए कहा कि संजीव महाजन, खलिंदर सिंह कादियान को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से सुरजीत बाउंसर से कई मोबाइल फोन भी लिए। राजदीप के गलत तरीके से अर्जित की गई संपत्ति की जांच अभी भी जारी है। पुलिस ने कहा कि राजदीप को सेक्टर 37 कोठी झगड़े की पूरी जानकारी थी। यदि वह निष्ठा और ईमानदारी से अपने कर्तव्य को निभाते हुए अपनी शक्तियों का सदुपयोग करता तो राहुल मेहता के साथ कभी ऐसा जघन्य अपराध नहीं होता।

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