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Chandigarh News: स्कूल की दीवार पर अलगाववादी नारे लिखने का आरोप, हाईकोर्ट ने दी जमानत

Thu, 11 Apr 2024 02:11 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 11 Apr 2024 02:11 AM IST
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Accused of writing separatist slogans on the wall, High Court grants bail
-फैसले में हाईकोर्ट ने याची के खिलाफ साक्ष्य की कमी को बनाया आधार
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-गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (यूएपीए) के तहत दर्ज था मामला

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। करनाल के स्कूल की दीवार पर आपत्तिजनक व अलगाववादी नारे लिखने के आरोपी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने साक्ष्य की कमी को आधार बनाते हुए जमानत दे दी है। याची के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया है। स्थानीय निवासी रेशम को 2022 में करनाल के डीएवी स्कूल की दीवार पर आपत्तिजनक व अलगाववादी नारे लिखने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उसने नियमित जमानत के लिए करनाल की अदालत में याचिका दाखिल की थी जो खारिज कर दी गई। याची ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल करते हुए बताया कि उसे मंजीत सिंह के बयान के आधार पर मामले में आरोपी बनाया गया है। याची पर आरोप है कि उसने 15000 रुपये के लिए यह नारे दयाल सिंह कालेज और डीएवी स्कूल की दीवारों पर पंजाबी और अंग्रेजी भाषा में काले रंग लिखे थे। याची ने इन सभी आरोपों से याचिका में इन्कार किया है। हरियाणा सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि याची ने इन नारों को लिखने के बाद इसका वीडियो बनाकर कुछ लोगों को शेयर भी किया था, इसलिए गंभीर आरोपों को देखते हुए वह नियमित जमानत का हकदार नहीं है। हाई कोर्ट ने सभी दलीलें सुनने के बाद पाया कि रेशम का नाम एफआईआर में नहीं था और उसे अन्य आरोपी के बयान के आधार पर आरोपी बनाया गया था। इस न्यायालय के समक्ष कोई भी ऐसा साक्ष्य नहीं लाया गया है, जिससे यह पता चले कि कोई मौद्रिक लेनदेन हुआ था और अपीलकर्ता ने घटना को रिकार्ड करने और अन्य आरोपितों को भेजने के लिए किसी विशेष मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया था। इस मामले में अभी तक कोई बरामदगी नहीं हुई है और उसके खिलाफ साक्ष्य इतने कम हैं कि यूएपीए के कड़े प्रावधान के बावजूद उसे और अधिक कारावास में रखने का औचित्य नहीं बनता। याची एक वर्ष और 09 महीने से हिरासत में है। चालान दाखिल किया जा चुका है, लेकिन आरोप अभी तय नहीं हुए हैं। अभियोजन पक्ष ने 14 गवाहों का हवाला दिया है और इसलिए मुकदमे के समापन में कुछ समय लगेगा। इस लिए हाई कोर्ट याचिकाकर्ता को जमानत देने का आदेश देता है।
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