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Chandigarh News: एसीबी लेगी दहिया का वॉयस सैंपल, एससी आयोग ने जताई आपत्ति

Tue, 30 Jan 2024 04:25 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jan 2024 04:25 AM IST
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ACB will take voice sample of Dahiya
एसीबी लेगी दहिया का वॉयस सैंपल, एससी आयोग ने जताई आपत्ति
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कहा-आयोग ने केस में यथास्थिति बनाए रखने की सिफारिश की थी, इस पर क्या कार्रवाई हुई, एक हफ्ते में भेजे रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने आईएएस विजय कुमार दहिया को नोटिस भेजकर उन्हें आवाज का नमूना (वॉयस सैंपल) देने को कहा है। एसीबी के इस नोटिस पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि इस केस में सरकार को यथास्थिति बनाए रखने की सिफारिश की थी। इन सिफारिशों पर सरकार व एसीबी ने अब तक क्या कार्रवाई की है, इसका जवाब आयोग को एक हफ्ते में भेजे।
एससी आयोग ने हरियाणा सरकार व एसीबी को 29 जनवरी को एक पत्र भेजा है। पत्र के मुताबिक, एसीबी ने आईएएस दहिया को 30 जनवरी को आवाज का नमूना देने के लिए नोटिस जारी किया है, जबकि एसीबी ने वॉयस सैंपल लेने की पहले तारीख 25 अप्रैल तय की थी। जब एसीबी ने वॉयस सैंपल का नोटिस भेजा था तो आयोग ने सुनवाई के दौरान केस की यथास्थिति बनाए रखने की सिफारिश की थी। इसके बावजूद एसीबी ने दहिया को नोटिस भेजकर 30 जनवरी को वॉयस सैंपल देने का नोटिस जारी कर दिया है। इस संबंध में 16 जनवरी को हुई सुनवाई का पत्र भी भेजा है। आयोग ने कहा कि अब तक इस मामले में एसीबी ने कोई चालान भी पेश नहीं किया है। आयोग ने सोमवार को भेजे अपने पत्र में कहा कि आईएएस विजय कुमार दहिया के मामले को आयोग की सिफारिशों के अनुरूप देखा जाए और आयोग की सिफारिशों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर पेश करें।
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उल्लेखनीय है कि पिछले साल अक्तूबर में भ्रष्टाचार के एक मामले में एसीबी ने दहिया को गिरफ्तार किया था। इस मामले में दिल्ली निवासी महिला पूनम चोपड़ा की गिरफ्तारी के बाद दहिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। दहिया पर हरियाणा रोजगार कौशल निगम में बिलों के भुगतान के बदले रिश्वत लेने का आरोप है। 28 नवंबर को उन्हें जमानत पर रिहा किया गया था। अपनी ज़मानत याचिका में आईएएस अधिकारी ने कहा था कि उनका नाम अवैध रूप से आरोपी के रूप में शामिल किया गया था, जबकि रिश्वत मांगने या स्वीकार करने के कोई सबूत नहीं थे। उनका कहना था कि एफआईआर दर्ज करने से पहले तथ्यों का पता लगाने के लिए कोई प्रारंभिक जांच नहीं की गई थी। नवंबर में जमानत पर रिहा होने के बाद सरकार ने उन्हें बहाल कर दिया था। बाद में उनकी तैनाती हरियाणा सरकार के पुरालेख विभाग में आयुक्त एवं सचिव के तौर पर कर दी गई है।
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