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‘क्लीनिकली डेड’ शरीर को जेड श्रेणी सुरक्षा

Tue, 26 Aug 2014 10:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर Updated Tue, 26 Aug 2014 10:56 PM IST
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aashutosh maharaj, clinicly dead body 'z' catagory security

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के प्रमुख आशूतोष महाराज के शरीर को बीते सात महीने से संस्थान आश्रम में जेड श्रेणी की सुरक्षा के बीच ही रखा हुआ है।

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पिछले सात महीने से जारी इस सुरक्षा कवच के बारे में अभी तक न तो स्थानीय पुलिस ने और न ही केंद्र सरकार ने समीक्षा करने की कोशिश की है। हालांकि इस अवधि के दौरान पंजाब सरकार भी हाईकोर्ट में यह जवाब दाखिल कर चुकी है कि आशुतोष महाराज ‘क्लीनीकली डेड’ हैं। लेकिन महाराज के अनुयायी इस बात पर कायम हैं कि आशुतोष महाराज की मृत्यु नहीं हुई है। वह समाधि में हैं और वापस शरीर में लौटेंगे।
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सरकार ने हाईकोर्ट में बताया ‘क्लीनिकली डेड’

aashutosh maharaj, clinicly dead body 'z' catagory security

अनुयायियों का दावा है कि आशुतोष महाराज इस सात 28 जनवरी की रात 12 बजे ध्यान में लीन हो गए थे। अनुयायियों का यह भी दावा रहा है कि महाराज पहले भी कई-कई दिनों के लिए अपना शरीर त्याग कर समाधि में लीन हो जाते थे।

इस बार अनुयायियों के इस दावे में आशुतोष महाराज के एक वाहन चालक ने और फिर महाराज के बेटे ने हाईकोर्ट में चुनौती देकर आस्था और हकीकत के बीच नया विवाद खड़ा कर दिया। हाईकोर्ट के निर्देश पर पंजाब सरकार ने डाक्टरों के पैनल से राय ली।

सर्वप्रथम अपोलो अस्पताल के चिकित्सकों की टीम ने महाराज की जांच की और उन्हें क्लीनिकल डेड घोषित कर दिया। फिर भी डेरा प्रबंधक और उनके अनुयायियों इस बात पर कायम हैं कि महाराज उच्च समाधि में लीन हैं।

67 अफसर और जवान कर रहे महाराज की हिफाजत

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दरअसल 28 जनवरी मंगलवार रात को साढ़े 12 बजे महाराज ध्यान में बैठे थे। उन्हें सांस लेने में कुछ दिक्कत हुई तो डेरा प्रबंधकों ने ही तत्काल चिकित्सकों की टीम को बुलाया। चेकअप के लिए अपोलो अस्पताल के चिकित्सकों की टीम पहुंची, जिन्होंने रात को करीब ढाई बजे तक जांच की। उनकी नब्ज व दिल की धड़कन गायब थी।

डाक्टरों ने महाराज को क्लीनीकली डेड घोषित कर दिया।
इसी आधार पर प्रदेश सरकार ने एक हलफनामा हाईकोर्ट में दायर तो कर दिया लेकिन आज तक आशुतोष महाराज को मिली हुई सुरक्षा में कोई बदलाव नहीं किया गया।

आज भी उनके लिए जेड श्रेणी की सुरक्षा है, जिसके लिए सीआरपीएफ का एक सहायक सब इंस्पेक्टर, दो हेडकांस्टेबल, नौ कांस्टेबल तैनात किए हुए हैं। इनके साथ ही पंजाब पुलिस की तरफ से छह सहायक सब इंस्पेक्टर के अलावा 48 कांस्टेबल व हेडकांस्टेबल डेरे में तैनात हैं।

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