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नगर निगम चुनाव में पहली बार उतरेगी आप, त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
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चंडीगढ़। दिसंबर में होने वाले नगर निगम के चुनाव में इस बार भाजपा और कांग्रेस के साथ आम आदमी पार्टी (आप) भी मैदान में उतरेगी। सोमवार को पार्टी ने एलान किया कि उसके उम्मीदवार सभी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। पार्टी ने यह फैसला अपने एक आंतरिक सर्वे के बाद लिया है।
पार्टी के नेताओं का मानना है कि अगर पार्टी मजबूती से चुनाव लड़ती है तो इस बार निगम चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है। आम आदमी पार्टी के सीनियर नेता व दिल्ली के विधायक जरनैल सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ से भाजपा व कांग्रेस चुनाव जीतते रहे हैं, लेकिन विकास के नाम पर कुछ नहीं किया। अब लोग परिवर्तन चाहते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पार्टी विकास कार्य के नाम कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। भ्रष्टाचार मुक्त सरकार है। जैसा दिल्ली में पार्टी ने काम किया है। वैसा ही काम चंडीगढ़ में भी होगा। पार्टी नेता प्रेम गर्ग, चंद्रमुखी शर्मा व प्रदीप छाबड़ा ने कहा कि किसी समय चंडीगढ़ उत्तर भारत में अपनी एक खास जगह रखता था, लेकिन इस शहर की सही अगुवाई नहीं होने से शहर पिछड़ता जा रहा है। नगर निगम ने अपने आय के साधन बढ़ाने के लिए लोगों पर टैक्स का बोझ डाल दिया, लेकिन सुविधाओं के नाम पर अब भी जीरो है। जनता अब इन पार्टियों से त्रस्त है। इस बार के चुनाव में जनता के सामने एक विकल्प होगा।
सर्वे के बाद लिया फैसला
पार्टी से जुड़े सूत्रों ने दावा किया है कि पार्टी ने तीन माह तक एक सर्वे कराया था, जिसमें दस हजार लोगों से बात की गई थी। पार्टी का दावा है कि सर्वे में उसके उम्मीदवारोें को 36 फीसदी वोट मिल रहे हैं। लगभग 22 सीटों पर पार्टी के उम्मीदवार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद पार्टी ने नगर निगम चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। दरअसल, पार्टी की एक नीति रही है कि जब भी वह चुनाव लड़ती है तो उससे पहले सर्वे करवा कर क्षेत्र का मूड जानती है।
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पिछले बार इसलिए नहीं लड़ा था चुनाव
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया था। पार्टी से गुल पनाग ने चुनाव लड़ा था और करीब 24 फीसदी वोट हासिल किए थे, लेकिन पार्टी ने साल 2016 में नगर निगम का चुनाव नहीं लड़ा था। दरअसल, पार्टी उस दौरान चंडीगढ़ की बजाय पंजाब पर फोकस कर रही थी। काफी मेहनत की थी और पार्टी के लिए एक अच्छा माहौल भी तैयार हो गया था। पंजाब चुनाव से चार महीने पहले नगर निगम चुनाव होने थे। उस दौरान पार्टी के आलाकमान ने सोचा कि यदि वह चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में मात खाती है तो इसका असर पंजाब के चुनाव में पड़ सकता है, इसलिए पार्टी ने चुनाव लड़ने से अपने पैर पीछे खींच लिए। हालांकि पार्टी के कुछ वालंटियर ने नगर निगम चुनाव बिना पार्टी चिह्न के लड़ा था।
कोट
पार्टी ने बहुत ही सोच-समझकर फैसला लिया है। चंडीगढ़ में कुछ काम होते नहीं। लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हर जगह भ्रष्टाचार फैला हुआ है। अब ये सब नहीं चलेगा।
-विक्रम सिंह पुंडीर, संगठन मंत्री, आप
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पार्टी के नेताओं का मानना है कि अगर पार्टी मजबूती से चुनाव लड़ती है तो इस बार निगम चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है। आम आदमी पार्टी के सीनियर नेता व दिल्ली के विधायक जरनैल सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ से भाजपा व कांग्रेस चुनाव जीतते रहे हैं, लेकिन विकास के नाम पर कुछ नहीं किया। अब लोग परिवर्तन चाहते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पार्टी विकास कार्य के नाम कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। भ्रष्टाचार मुक्त सरकार है। जैसा दिल्ली में पार्टी ने काम किया है। वैसा ही काम चंडीगढ़ में भी होगा। पार्टी नेता प्रेम गर्ग, चंद्रमुखी शर्मा व प्रदीप छाबड़ा ने कहा कि किसी समय चंडीगढ़ उत्तर भारत में अपनी एक खास जगह रखता था, लेकिन इस शहर की सही अगुवाई नहीं होने से शहर पिछड़ता जा रहा है। नगर निगम ने अपने आय के साधन बढ़ाने के लिए लोगों पर टैक्स का बोझ डाल दिया, लेकिन सुविधाओं के नाम पर अब भी जीरो है। जनता अब इन पार्टियों से त्रस्त है। इस बार के चुनाव में जनता के सामने एक विकल्प होगा।
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सर्वे के बाद लिया फैसला
पार्टी से जुड़े सूत्रों ने दावा किया है कि पार्टी ने तीन माह तक एक सर्वे कराया था, जिसमें दस हजार लोगों से बात की गई थी। पार्टी का दावा है कि सर्वे में उसके उम्मीदवारोें को 36 फीसदी वोट मिल रहे हैं। लगभग 22 सीटों पर पार्टी के उम्मीदवार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद पार्टी ने नगर निगम चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। दरअसल, पार्टी की एक नीति रही है कि जब भी वह चुनाव लड़ती है तो उससे पहले सर्वे करवा कर क्षेत्र का मूड जानती है।
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पिछले बार इसलिए नहीं लड़ा था चुनाव
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया था। पार्टी से गुल पनाग ने चुनाव लड़ा था और करीब 24 फीसदी वोट हासिल किए थे, लेकिन पार्टी ने साल 2016 में नगर निगम का चुनाव नहीं लड़ा था। दरअसल, पार्टी उस दौरान चंडीगढ़ की बजाय पंजाब पर फोकस कर रही थी। काफी मेहनत की थी और पार्टी के लिए एक अच्छा माहौल भी तैयार हो गया था। पंजाब चुनाव से चार महीने पहले नगर निगम चुनाव होने थे। उस दौरान पार्टी के आलाकमान ने सोचा कि यदि वह चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में मात खाती है तो इसका असर पंजाब के चुनाव में पड़ सकता है, इसलिए पार्टी ने चुनाव लड़ने से अपने पैर पीछे खींच लिए। हालांकि पार्टी के कुछ वालंटियर ने नगर निगम चुनाव बिना पार्टी चिह्न के लड़ा था।
कोट
पार्टी ने बहुत ही सोच-समझकर फैसला लिया है। चंडीगढ़ में कुछ काम होते नहीं। लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हर जगह भ्रष्टाचार फैला हुआ है। अब ये सब नहीं चलेगा।
-विक्रम सिंह पुंडीर, संगठन मंत्री, आप