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कांग्रेस विधायक को हाईकोर्ट से झटका: पंचायत जमीन विवाद में याचिका खारिज, छह लाख जुर्माना; AAP ने घेरा

Fri, 22 May 2026 08:23 PM IST
Rahul Kumar Tiwari अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Fri, 22 May 2026 08:23 PM IST
सार

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा की ग्राम पंचायत जमीन पर कब्जे से जुड़ी याचिका खारिज कर दी और छह लाख रुपये का जुर्माना लगाया। इस फैसले पर आप नेता बलतेज पन्नू ने इसे कानून की जीत और खैरा के खिलाफ बड़ी कानूनी कार्रवाई बताया।

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AAP welcomed on Congress MLA Sukhpal Sing dismissal petition in Panchayat land dispute in High Court
आप प्रदेश महासचिव व मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा को इस मामले में राजनीतिक और कानूनी स्तर पर कठिन स्थिति का सामना करना पड़ा है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने ग्राम पंचायत की जमीन पर कब्जे के मामले में उनकी याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने उन पर छह लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। आम आदमी पार्टी पंजाब स्टेट मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने इस फैसले का स्वागत किया है।
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बलतेज पन्नू ने कहा कि इस फैसले ने कांग्रेस विधायक के घमंड को उजागर किया है। उन्होंने खुद को राजनीतिक बदले का शिकार दिखाने की कोशिशों को भी बेनकाब किया। यह मामला ग्राम पंचायत रामगढ़ की एक सार्वजनिक गली पर गैर-कानूनी कब्जे से जुड़ा है। बलतेज पन्नू के अनुसार, खैरा अब 'पंचायती जमीन पर बैठे लैंड माफिया' के तौर पर सामने आए हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पन्नू ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खैरा ने गांववालों के लिए रुकावट पैदा की थी। हाई कोर्ट के रिकॉर्ड में स्थानीय लोगों की शिकायतें दर्ज हैं। इन शिकायतों में सुखपाल सिंह खैरा और कुलबीर सिंह खैरा पर सार्वजनिक गली में गेट लगाने का आरोप था। इससे गांववालों का आना-जाना रुक गया था।
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कोर्ट के आधिकारिक रिकॉर्ड
कोर्ट के सामने कई आधिकारिक रिकॉर्ड पेश किए गए थे। इनमें ग्राम पंचायत रामगढ़ की माप पुस्तिका और कनिष्ठ अभियंता की रिपोर्ट शामिल थी। स्वामित्व अभिलेख और उपग्रह तस्वीरें भी सबूत के तौर पर रखे गए थे। इन सभी से साबित हुआ कि विवादित जमीन सार्वजनिक गली का हिस्सा थी। यह गली ग्राम पंचायत द्वारा आम लोगों के इस्तेमाल के लिए बनाई गई थी। कोर्ट ने गेट लगाने को सार्वजनिक रास्ते पर गैर-कानूनी रुकावट और कब्जा माना।

राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग
जब सरकारी अधिकारी कब्जा हटाने गए, तो खैरा ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने अपने राजनीतिक प्रभाव का गलत इस्तेमाल किया। कानूनी कार्रवाई में रुकावटें पैदा करने की कोशिश की गई। बलतेज पन्नू ने कहा कि 2026-05-22 को हाईकोर्ट ने खैरा के घमंड का करारा जवाब दिया है। खैरा ने खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया।
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 न्यायिक कार्रवाई का गलत इस्तेमाल पर कड़ी टिप्पणी
कोर्ट ने न्यायिक कार्रवाई के गलत इस्तेमाल पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि याचिका को 'बहुत चालाकी से' तैयार किया गया था। इसका उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन दिखाना था। जबकि विवाद असल में सार्वजनिक संपत्ति पर कथित कब्जे से संबंधित था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मानहानि क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल राजनीतिक विवादों को सुलझाने के लिए नहीं हो सकता। कोर्ट ने आदेश दिया कि जुर्माने की रकम उन जवाबदेहों में बराबर बांटी जाए जिनके खिलाफ खैरा ने कार्रवाई शुरू की थी।
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