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'आप' के योगेंद्र यादव ने 'छोटे मोदी' पर लगाए आरोप

Sat, 21 Feb 2015 11:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 21 Feb 2015 11:45 AM IST
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AAP Vs BJP, Yogendra Yadav Vs Manohar Lal Khattar

आम आदमी पार्टी के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता और हरियाणा राज्य प्रभारी योगेंद्र यादव ने प्रदेश में ‘जय किसान’ अभियान शुरू करने से पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को पत्र भेज किसान विरोधी नीतियों पर रोक लगाने की मांग की है।

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यादव ने पत्र में आरोप लगाया है कि खट्टर सरकार न सिर्फ पिछली सरकार द्वारा बनाए कानून बदलकर किसानों का अहित कर रही है बल्कि नए कानूनों को भी इस तरह तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है, जिससे किसानों को कम से कम पैसा देना पड़े।
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चार पन्नों के अपने पत्र में यादव ने लिखा है कि भाजपा ने चुनाव से पहले हरियाणा में दूसरी हरित क्रांति लाने का वादा किया था, लेकिन सरकार बनने के बाद किसानों से लगातार धोखाधड़ी की जा रही है।
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यादव ने यूरिया की किल्लत का हवाला देने के साथ ही लिखा है कि 24 घंटे बिजली देने का वादा किया गया, लेकिन पहले से मिल रही 14 घंटे बिजली को भी 11 घंटे कर दिया गया है। फसलों पर लागत से 50 फीसदी लाभ देने की बजाय एमएसपी पर भी सरकार फसलें नहीं खरीद रही, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

भूमि अधिग्रहण के नये नियम बनाने की मांग

AAP Vs BJP, Yogendra Yadav Vs Manohar Lal Khattar

यादव ने नए भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के तहत बनाए गए नियमों को तुरंत रोकने की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि नए नियम इस प्रकार बनाए गए हैं कि किसानों को भूमि अधिग्रहण पर मुआवजा राशि आधी ही देनी पड़े।

यादव ने इसके लिए पत्र में सरकार द्वारा 4 दिसंबर, 2014 को जारी पत्र का भी हवाला दिया, जिसके अनुसार मुआवजा तय करने की पद्धति में फेरबदल किए जाने से पूर्व निर्धारित मुआवजा राशि आधी रह गई है।

प्रदेश में भूमि के मूल्य निर्धारण संबंधी नए नियम पर भी उंगली उठाते हुए योगेंद्र यादव ने पत्र में लिखा है कि पिछली सरकार ने न्यूनतम फ्लोर रेट तय किया था ताकि जहां भूमि के दाम कम हैं, वहां भी किसानों को वाजिब मुआवजा मिले, लेकिन नई सरकार ने यह प्रावधान हटा दिया और तीन साल पुरानी रजिस्ट्री को आधार बना लिया।

बावल में गैरकानूनी ढंग से हुआ मुआवजा तय : यादव
योगेंद्र यादव ने पत्र में लिखा है कि केंद्रीय कानून के मुताबिक, भूमि का दाम तय किए फैक्टर से गुणा करने पर जो राशि बनती है, उस पर 100 फीसदी सोलेशियम का प्रावधान किया गया है, लेकिन बावल के 16 गांवों में अधिग्रहण करते समय सरकार ने सोलेशियम घटाकर 30 फीसदी कर दिया, जो गैर कानूनी है।

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