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25 सितंबर को किसान करेंगे 'पंजाब बंद', आप ने पूर्ण समर्थन देने का एलान किया

Tue, 22 Sep 2020 12:23 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 22 Sep 2020 12:23 AM IST
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AAP announced to give full support to the farmers Punjab Band
धरने पर बैठे आप नेता। - फोटो : अमर उजाला

आम आदमी पार्टी (आप) ने कृषि विधेयकों को लेकर आंदोलनरत किसानों को पूर्ण समर्थन देने का एलान किया है। नेता प्रतिपक्ष और आप के वरिष्ठ नेता हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि किसानों को लेकर प्रधानमंत्री की 'हिटलर शाही नीति' देश के लिए नुकसानदायक साबित होगी। किसानों के हितों की रक्षा के लिए आगामी 25 सितंबर को आप किसानों के बंद को पूरा समर्थन देगी।

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सोमवार को अपने सरकारी आवास में मीडिया को संबोधन करते हुए हरपाल सिंह चीमा, जरनैल सिंह और प्रो. बलजिंदर कौर ने बादलों समेत कांग्रेस और भाजपा को किसान विरोधी पार्टियां करार दिया। इस मौके उनके साथ विपक्ष की उप नेता सरबजीत कौर माणूंके, प्रिंसिपल बुद्ध राम, मीत हेयर, कुलवंत सिंह पंडोरी, मास्टर बलदेव सिंह जैतो, प्रदेश महासचिव हरचंद सिंह बरसट, सीनियर नेता राज लाली गिल और अन्य नेता मौजूद रहे। 
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हरपाल सिंह चीमा ने कृषि संबंधित इन विधेयकों को पास करने के लिए सत्ताधारी भाजपा की ओर से धक्केशाही को लोकतंत्र की हत्या कहा। चीमा ने होशियारपुर से भाजपा के सांसद व केंद्रीय मंत्री सोम प्रकाश से किसानों के हक में तुरंत इस्तीफा मांगा। उन्होंने इस्तीफा नहीं देने की सूरत में केंद्री मंत्री के गृह का घेराव करने की चेतावनी दी। इस मौके पर जरनैल सिंह ने कहा कि ‘आप’ 24 सितंबर को पंजाब में ‘मानव शृंखला’ बना कर रोष प्रदर्शन करेगी।
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राजभवन के सामने दिया धरना
नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा और पंजाब प्रधान जरनैल सिंह के नेतृत्व में विधायकों और नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब के राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को मांगपत्र सौंप कर कृषि विरोधी इन विधेयकों पर मुहर न लगाने की अपील की। हालांकि राजभवन की ओर से जब राज्यपाल से मुलाकात करने से आनाकानी की गई तो ‘आप’ का प्रतिनिधिमंडल राजभवन के मुख्य द्वार के सामने धरने पर बैठ गए। स्थिति नाजुक होने के पर पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर को खुद मांगपत्र लेने आना पड़ा। राज्यपाल ने न केवल ‘आप’ के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात की, बल्कि भरोसा दिया कि वह मांगपत्र को तुरंत राष्ट्रपति के पास पहुंचाएंगे।

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