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सियासी समीकरण: इस वजह से चंडीगढ़ में आप व कांग्रेस ने नहीं मिलाया हाथ, भाजपा को हुआ फायदा, अपना मेयर बनाया

Sun, 09 Jan 2022 02:09 AM IST
ajay kumar प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 09 Jan 2022 02:09 AM IST
सार

कभी-कभार कुछ बड़ा पाने की चाहत में थोड़ा बहुत छोड़ना पड़ता है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की नजरें इस समय पंजाब के सिंहासन पर टिकी हैं। चन्नी अपनी सत्ता को वापस लाना चाहते हैं। जबकि, आम आदमी पार्टी को चंडीगढ़ में 14 सीटें आने के बाद पंजाब में मजबूत जमीन दिख रही है। यही कारण है कि दोनों ही दल चाहते हुए भी भाजपा को सत्ता से बाहर नहीं कर पाए। अन्यथा, भाजपा को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए गठबंधन कोई बड़ी बात नहीं थी।

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AAP and Congress could not get together in Chandigarh mayor election due to Punjab elections
कांग्रेस व आम आदमी पार्टी। - फोटो : फाइल

विस्तार

पंजाब में सत्ता सिंहासन की आस आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को चंडीगढ़ मेयर चुनाव में एक न कर सकी। पंजाब का चुनाव सिर पर देख दोनों दलों ने हाथ नहीं मिलाया। उन्हें डर था कि यदि यहां एक हो गए तो पंजाब की जनता से क्या कह कर वोट मांगेंगे। साथ ही भाजपा को भी पंजाब में मुद्दा मिल जाता कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी एक हैं।

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मोदी की सुरक्षा मुद्दे पर कांग्रेस की पंजाब सरकार घिरी है। अगर दोनों दल एक होने का प्रयास करते तो भाजपा को बैठे बिठाए एक और मुद्दा मिल जाता। हालांकि सभी दलों ने अपने-अपने पार्षद अलग-अलग नजरबंद किए थे। इसके चलते तोड़फोड़ का खेल तो नहीं चल पाया लेकिन आम आदमी पार्टी बहुमत का आंकड़ा होने के बावजूद निगम की सत्ता से बाहर हो गई।
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पंजाब विधानसभा चुनाव में जनता के बीच जाने से पहले चंडीगढ़ का मेयर भाजपा से बनना जरूरी था। इसलिए पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने यूटी नगर निगम चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया और केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री तक चुनाव में उतार दिए। इतना सब करने के बावजूद भाजपा के खाते में 12 सीटें ही आईं। 
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पार्टी ने कांग्रेस पार्षद हरप्रीत कौर बबला को शामिल तो कर लिया लेकिन जीत का आंकड़ा तब भी फिट नहीं बैठ रहा था। बबला और सांसद की वोट होने के बावजूद आप और भाजपा में मामला 14-14 पर फंस गया। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि मेयर भाजपा का होगा। शनिवार को मेयर चुनाव में रद्द हुआ आप का एक वोट निर्णायक साबित हुआ और मेयर की कुर्सी भाजपा के खाते में चली गई।

पंजाब में कोई कसर नहीं छोड़ेगी भाजपा
आम आदमी पार्टी का मेयर यदि चंडीगढ़ में बनता तो पंजाब में भाजपा के लिए मुसीबत खड़ी हो जाती। पार्टी के लिए फजीहत से बचना मुश्किल होता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा के मुद्दे को लेकर हावी चल रही भाजपा को इस घटनाक्रम के बाद पंजाब में जनता के बीच जाने का एक और आधार मिल गया है। भले ही पंजाब में भाजपा का विरोध हो लेकिन कैप्टन अमरिंदर के सहारे पंजाब में घुसने में भाजपा कोई कसर बाकी नहीं रखेगी।

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का कोई सिद्धांत नहीं है। भले ही यह एक-दूसरे का विरोध करें लेकिन मौका पड़ने पर गले लगने से नहीं चूकते। पंजाब का चुनाव सामने था, अन्यथा यह दोनों दल एक मिनट भी एक होने में न लगाते। - मनोज तिवारी, सांसद

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