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आप विधायकों ने सरकार को घेरा, बोलीं- छात्राओं को साइकिलें न देकर सरकार ने दिया धोखा

Sun, 08 Sep 2019 01:20 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Vikas Kumar Updated Sun, 08 Sep 2019 01:20 AM IST
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Aam Aadmi Party women legislators attacked on Punjab government
कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : अमर उजाला

चुनावों के दौरान स्कूली छात्राओं को मुफ्त स्कूटी देने की बड़ी-बड़ी बातें कहने वाली कांग्रेस के सत्ता में आना पर छात्राओं को मुफ्त साइकिल भी नहीं दिए जाने के मामले पर आम आदमी पार्टी (आप) ने कैप्टन सरकार पर वायदाखिलाफी करने का आरोप लगाया है। आप की महिला विधायकों ने कहा है कि कैप्टन सरकार ने स्कूली छात्राओं को भी नहीं बख्शा। 

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आप मुख्यालय से शनिवार को जारी संयुक्त बयान में विरोधी पक्ष की उप नेता सरबजीत कौर माणूंके, विधायक प्रो. बलजिन्दर कौर और रुपिन्दर कौर, महिला विंग की प्रधान राज लाली गिल और सह-प्रधान जीवन जोत कौर ने कहा कि कैप्टन सरकार सरकारी स्कूलों में छात्राओं को मुफ्त साइकिल न देकर वायदाखिलाफी ही नहीं कर रही है, बल्कि इन स्कूली छात्राओं के नाम पर अपनी झूठी वाह-वाह करवाने के तरीके भी तलाश रही है। 
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माणूंके ने कहा कि सवा माह पहले कैप्टन सरकार ने अपनी, प्राप्तियों में स्कूली छात्राओं माई भागो विद्या योजना के अंतर्गत मुफ्त साइकिल बांटने को अपनी प्राप्ति बताया था जबकि वास्तविकता यह है कि इस पूरे साल में कैप्टन सरकार ने एक भी मुफ्त साइकिल स्कूली विद्यार्थियों को नहीं बांटी, क्योंकि सामाजिक सुरक्षा, महिला और बाल विकास विभाग के पास कांग्रेसी वायदे और दावे को पूरा करने के लिए पैसा ही नहीं है। 
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उन्होंने कहा कि स्कूली छात्राओं को मुफ्त साइकिल बांटने के लिए विभाग ने पिछले महीने साढ़े 30 करोड़ रुपये सरकार से मांगे हैं, लेकिन अभी तक एक पैसा भी नहीं मिला।

प्रो. बलजिन्दर कौर ने कहा कि कैप्टन अपने सेनापतियों की फौज को मोटे पैकेज, कोठियां, कारें और चहेते कांग्रेसियों को रेवड़ियों की तरह कैबिनेट रैंक और चेयरमैनियां बांट रहे हैं। अफसरशाही को खुश करने के लिए घरों में जाकर भी नौकर देने की तैयारी है, लेकिन स्कूली छात्राओं को साइकिल और वर्दियां तक देने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं हैं। 

रुपिन्दर कौर ने कहा कि आठवीं के बाद स्कूली छात्राएं खास करके ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं को आगे पढ़ाई जारी रखने के लिए साइकिल अति जरूरी हो जाता है। रूबी ने कहा कि स्कूली छात्राओं को साइकिल न मिलने पर सबसे अधिक बुरा प्रभाव गांवों की गरीब और दलित छात्राओं की पढ़ाई पर पड़ता है, यही वजह है कि लड़कियों में औसतन 6 प्रतिशत ड्राप-आउट दर के मुकाबले दलित छात्राओं की ड्राप आउट दर कहीं अधिक है। 


राज लाली गिल और जीवन जोत कौर ने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वालीं 9वीं से 12वीं तक की सभी छात्राओं के लिए करीब सवा तीन लाख साइकिलों की जरूरत है, जबकि सरकार 9वीं की छात्राओं के लिए एक लाख साइकिल भी दे नहीं सकी।

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