हरियाणा में निराशाजनक हार ने बढ़ाई 'आप' की चिंता, प्रत्याशियों से रिपोर्ट तलब, पूछे कारण
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हरियाणा विधानसभा चुनाव में बेहद निराशाजनक प्रदर्शन के बाद आम आदमी पार्टी मंथन मोड में है। इसके लिए जल्द ही प्रदेश स्तरीय बैठक बुलाकर हार के कारणों पर चिंतन मंथन किया जाएगा। आप की हरियाणा इकाई ने प्रदेश के सभी आप प्रत्याशियों से रिपोर्ट तलब की है।
इस रिपोर्ट में इन प्रत्याशियों से उनकी हार के कारण पूछे गए हैं। सभी की रिपोर्ट आने के बाद प्रदेश स्तरीय बैठक में हार के इन कारणों की समीक्षा की जाएगी। जबकि उसके बाद प्रदेश में संगठन को और मजबूत करने की कवायद शुरू होगी।
दरअसल, आम आदमी पार्टी हरियाणा में परफॉरमेंस को लेकर इसलिए भी चिंतित है, क्योंकि हरियाणा दिल्ली से सटा प्रदेश है और दिल्ली में आप की सरकार है। बावजूद इसके हरियाणा में केजरीवाल के ‘दिल्ली मॉडल’ को न तो मई 2019 के लोकसभा चुनाव में भुनाया जा सका और न ही अक्तूबर 2019 के विधानसभा चुनाव में। दोनों ही चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बहुत ही ज्यादा निराश करने वाला रहा। जबकि दूसरी ओर, दिल्ली से दूर पंजाब में आम आदमी पार्टी की स्थिति हरियाणा से कहीं बेहतर है।
पंजाब में आप का एक सांसद भी है और 20 विधायक भी हैं। 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को 23.7 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट दिया था। जबकि पंजाब विधानसभा में आप मुख्य विपक्षी दल भी है। मगर दिल्ली से सटे हरियाणा में आप की हालत देखें तो अक्टूबर 2019 के इस विधानसभा चुनाव में आप का वोट प्रतिशत सिर्फ 0.48 प्रतिशत है।
इतना ही नहीं इस चुनाव में आप हरियाणा की सभी कुल 90 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी तक नहीं उतार पाया। आम आदमी पार्टी ने 46 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, जिसमें से एक भी प्रत्याशी भी जीत नहीं पाया। आम आदमी पार्टी ने चुनाव में केजरीवाल के ‘दिल्ली मॉडल’ को ही जोर-शोर से उठाया था, जबकि मनोहर सरकार-वन की कथित नाकामियों का भी खूब ढिंढोरा पीटा गया था। लेकिन आप के सभी प्रयास बेअसर दिखाई दिए।
इतना ही नहीं दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल तक विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए हरियाणा नहीं आए। आप प्रवक्ता सुधीर यादव ने बताया कि सीएम अरविंद केजरीवाल दिल्ली में ही व्यस्त थे, इसलिए उनका चुनाव में हरियाणा दौरा नहीं हो पाया। उधर, इससे पहले आप ने हरियाणा में जननायक जनता पार्टी के साथ मिलकर मई 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में भी आप-जजपा गठबंधन को कोई सफलता नहीं मिली।
हम मानते हैं कि चुनाव में प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। कमजोर संगठन और कम संसाधन इसकी एक वजह है। भले ही प्रदेश के लोगों ने आम आदमी पार्टी को वोट नहीं दिया, मगर मान-सम्मान बहुत ज्यादा दिया है। हम प्रदेश में और मेहनत करेंगे, जनता के बीच रहेंगे और उनकी समस्याओं व मुद्दों को लगातार उठाते रहेंगे। जल्द ही प्रदेश स्तरीय मंथन बैठक का आयोजन होगा। - नवीन जयहिंद, प्रदेशाध्यक्ष, आप