पूर्ण राज्य में पहली बार आप की सत्ता: भगवंत मान को पंजाब में होगा केजरीवाल से ज्यादा ताकत का एहसास, हटा दिल्ली की पार्टी का ठप्पा
आप ने 2017 में अपनी गलती से सीखा और पंजाब के प्रसिद्ध राजनीतिक व्यंग्यकार भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरा बनाया। केजरीवाल का इसके पीछे का मुख्य उद्देश्य पंजाब के मतदाताओं को दिल्ली मॉडल पर आश्वस्त करना रहा।
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पंजाब के नए मुख्यमंत्री भगवंत मान को सीएम बनने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से ज्यादा ताकत का एहसास होगा। दिल्ली में एलजी और गृहमंत्री के दखल से तंग आ चुकी पार्टी अब सूबे में पूर्ण सत्ता का सुख उठाएगी। राज्य की पुलिस से लेकर मुख्य सचिव तक सारा कुछ पार्टी के कब्जे में होगा।
माना जा सकता है कि पंजाब में इस शानदार जीत के साथ आम आदमी पार्टी का असली उदय हुआ है। इस चुनाव से आप ने खुद से जुड़े दिल्ली की पार्टी के टैग को भी हटाकर दो राज्यों में सरकार बनाने की बड़ी उपलब्धि हासिल की है। साथ ही देश की अन्य क्षेत्रीय दलों से भी आगे निकलकर 2024 में अन्य राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
सबसे पहले आप ने 2013 में भारतीय राजनीति में दिल्ली में तीन बार मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित को हराकर बड़े राजनीतिक दलों के लिए चुनौती पेश की थी। इस चुनाव में आप ने 70 में से 28 सीटें जीती थीं। 2022 में पंजाब में इस शानदार जीत के साथ आप ने अन्य क्षेत्रीय दलों से आगे निकल गई है। पंजाब और दिल्ली दो राज्यों में सरकार बना कर आप ने वह हासिल किया है जो किसी अन्य क्षेत्रीय पार्टी ने हासिल नहीं किया है।
आप ने बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, बीजू जनता दल, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, जनता दल (सेक्युलर), जनता दल (यूनाइटेड), लोजपा को पंजाब जीतते ही पछाड़ दिया है। वर्तमान में यदि हम देखें तो कांग्रेस, भाजपा और वाम दलों के अलावा दो राज्यों में बहुमत वाली सरकारों वाली एकमात्र आम आदमी पार्टी बन गई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त पंजाब जीतने के साथ ही आप का असली उदय हुआ है।
न वजहों ने दिलाई विजय
प्रचार में अपनाई समान शैली
पांच राज्यों के इस चुनाव में अरविंद केजरीवाल ने तीन राज्यों पर विशेष फोकस किया। इनमें पंजाब, गोवा और उत्तराखंड शामिल हैं। केजरीवाल ने इन राज्यों के प्रचार में एक समान प्रचार की शैली को बनाए रखा। आप प्रमुख ने अभियान के हर पहलू, प्रचार सामग्री पर छपने वाले मैटर पर कड़ी नजर रखी। यहां तक कि घर घर पहुंच बनाने के लिए कई सर्वे भी कराए। सोशल मीडिया का भरपूर उपयोग किया। चुनाव में घर-घर जाकर उम्मीदवारों के चयन से लेकर मुख्यमंत्री के चेहरों के लिए लोगों की राय तक ली। प्रचार के दौरान सीधी और सरल शैली पर केजरीवाल ने विशेष फोकस किया।
2017 से लिया सबक
आप ने 2017 में अपनी गलती से सीखा और पंजाब के प्रसिद्ध राजनीतिक व्यंग्यकार भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरा बनाया। केजरीवाल का इसके पीछे का मुख्य उद्देश्य पंजाब के मतदाताओं को दिल्ली मॉडल पर आश्वस्त करना रहा। दिल्ली में स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, मुफ्त बसों आदि पर आप द्वारा किए जा रहे कार्यों पर आप का नारा दिया गया था।
इक मौका केजरीवाल नूं नारे ने बदली तस्वीर
प्रचार के दौरान आप के प्रमुख नारे इक मौका केजरीवाल नू ने भी तस्वीर बदलने में बड़ी भूमिका निभाई। पंजाब में इक मोका केजरीवाल नू के नारे के बाद जब संगरूर से सांसद भगवंत मान को चेहरा घोषित कर दिया इसके बाद आप ने नारे में थोड़ा बदलाव करते हुए भगवंत मान के समर्थन में इक मोका मान नूं का नारा प्रचलित कर दिया।
इस रणनीति ने दिखाई जीत की राह
पंजाब फतेह करने में आप की रणनीति बेहद कारगर रही। आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जीत सुनिश्चित करने के लिए मान को मालवा और खुद अन्य पार्टी के नेताओं के साथ दोआबा और मांझा पर ध्यान केंद्रित किया। मालवा में मान की लोकप्रियता का पार्टी को इसका काफी फायदा भी हुआ।
पंजाब से हिंदुस्तान का रास्ता निकलेगा। यहां पार्टी के पास पूर्ण सत्ता रहेगी। दिल्ली की तरह एलजी और गृह मंत्री का अधिक दखल नहीं होगा। दिल्ली का केजरीवाल मॉडल पंजाब में भी लागू किया जाएगा। स्वास्थ्य सुविधाओं की तस्वीर बदलेगी। सुशील गुप्ता, आम आदमी पार्टी सांसद