कोरोना से जीती जंग: अब ब्लैक फंगस की शिकार हुई महिला, हरियाणा के अस्पतालों में नहीं मिल रहा बेड
महिला की हालत ठीक होने के बाद जब कोरोना जांच की गई तो रिपोर्ट निगेटिव आई लेकिन तीन दिन पहले डॉक्टरों को ब्लैक फंगस के लक्षण दिखने लगे। डॉक्टरों ने परिवार को यहां उपचार न होने की की बात बता ले जाने को कह दिया।
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कोरोना संक्रमण से ठीक हुई लेकिन ब्लैक फंगस की चपेट में आई हरियाणा के फतेहाबाद के शिव नगर निवासी सुनीता का तीन दिन बाद भी उपचार शुरू नहीं हो पाया है। बुधवार रात को इंजेक्शन मंगवाने के बाद भी गुरुवार देर शाम तक उपचार शुरू नहीं किया गया है। अस्पताल प्रशासन बार-बार मरीज को यहां से ले जाने के लिए कह रहा है लेकिन परिवार को रोहतक पीजीआई, अग्रोहा मेडिकल कॉलेज और हिसार के बड़े अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहा है।
तीमारदारों का कहना है कि प्रशासन बड़े अस्पतालों में बेड की व्यवस्था नहीं करवा रहा है। ऐसे में वह मरीज को लेकर कहां जाएं। डॉक्टरों ने इंजेक्शन मंगवाए थे, मुश्किल से इंतजाम करके लेकर आए। मामले के मुताबिक फतेहाबाद के शिव नगर निवासी महिला सुनीता को कोरोना संक्रमित होने पर फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में करीब 12 दिन पहले दाखिल करवाया गया था।
महिला की हालत ठीक होने के बाद जब कोरोना जांच की गई तो रिपोर्ट निगेटिव आई लेकिन तीन दिन पहले डॉक्टरों को ब्लैक फंगस के लक्षण दिखने लगे। डॉक्टरों ने परिवार को यहां उपचार न होने की की बात बता ले जाने को कह दिया। बुधवार रात को मामला उठने के बाद डॉक्टर ने इंजेक्शन लिखकर दिए, परिवार के लोगों ने इंजेक्शन का इंतजाम कर लिया लेकिन उपचार शुरू नहीं किया गया।
हमें तीन दिन पहले बताया गया कि ब्लैक फंगस नाम की बीमारी हो गई है और कहा कि यहां से मरीज को ले जाएं। हमने अपने स्तर पर रोहतक, हिसार और बड़े अस्पतालों में पता किया लेकिन सभी बेड खाली न होने की जानकारी मिली। सरकारी अस्पताल प्रशासन कुछ नहीं कर रहा है। बुधवार रात को इंजेक्शन मंगवाए लेकिन अभी तक उपचार शुरू नहीं किया गया है। मरीज को सिर में दर्द हो रहा है और बोलने में भी दिक्कत हो रही है। - सुरेश कुमार, मरीज का भांजा।
मरीज कोविड से निकल चुका है और अब संक्रमित नहीं है। उसमें ब्लैक फंगस के लक्षण दिख रहे हैं, इसलिए उसे रेफर किया जा रहा है। नॉन कोविड मरीज के लिए बेड की बड़े अस्पताल में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। मरीज की काउंसिलिंग भी की गई है। ऑपरेशन होना है, जो कि यहां संभव नहीं है। जहां तक उपचार की बात है, रात को ही डॉक्टर को भेजा गया था। - डॉ. राजेश चौधरी, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी।