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Chandigarh News: पीयू के अर्थशास्त्र विभाग में बनेगी डॉ. मनमोहन सिंह को समर्पित वॉल
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चंडीगढ़। पूर्व प्रधानमंत्री और पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र डॉ. मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि देने और उनकी विरासत और योगदान का सम्मान करने के लिए शुक्रवार को पीयू ने सीनेट हॉल में शोक सभा की गई। इसमें पीयू के सभी प्रोफेसर, फैकल्टी व अन्य पहुंचे। सभी ने मनमोहन सिंह को याद किया। साथ ही उनकी याद में अर्थशास्त्र विभाग में समर्पित वॉल बनाने का फैसला लिया है।
पीयू की वीसी रेणु विग ने कहा कि सभी अपने सम्मानित पूर्व छात्र और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन से बेहद दुखी हैं। एक शिक्षाविद, अर्थशास्त्री और नेता के रूप में उनकी विरासत पंजाब यूनिवर्सिटी और देश के इतिहास में हमेशा के लिए अंकित रहेगी। उन्होंने कहा कि पीयू के साथ उनके संबंधों की कई मुख्य विशेषताएं हैं। उन्होंने 1948 में मैट्रिक किया, फिर 1952 में प्रथम श्रेणी के साथ अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने 1954 में अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की।
एमए अर्थशास्त्र में प्रथम स्थान पर आने पर उत्तम चंद कपूर पदक हासिल किया, फिर उन्होंने 1957 से 1959 तक अर्थशास्त्र में सीनियर लेक्चरर के रूप में काम किया। 1959 से 1963 के बीच अर्थशास्त्र में रीडर का पद संभाला, फिर वे 63 से 65 के बीच अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में आगे बढ़े। उन्हें 1983 में डॉक्टर ऑफ लिटरेचर की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया और उन्हें 2009 में डॉक्टर ऑफ लॉ की मानद उपाधि मिली। उन्होंने 11 अप्रैल 2018 को उद्घाटन प्रो. एसवी रंधनेकर मेमोरियल ओरेशन दिया। अपनी 2018 की यात्रा के दौरान डॉ. सिंह ने कहा कि पीयू में उनका कार्यकाल उनके जीवन का सबसे सुखद समय था और इस संस्थान ने उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास पर गहरा प्रभाव डाला।
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10 मिनट के लिए अप्वाइंटमेंट मिली, बातें 25 मिनट तक चलती रहीं : अरुण ग्रोवर
पंजाब यूनिवर्सिटी के पूर्व वीसी अरुण ग्रोवर ने कहा कि उन्हें पूरे जीवन काल में तीन बार पूर्व प्रधानमंत्री से मिलने का मौका मिला। वीसी बनने के बाद उन्होंने मिलने के लिए अपॉइंटमेंट मांगा था तो 10 मिनट का स्लॉट मिला था, लेकिन जब वह मिले तो पूर्व प्रधानमंत्री से उनकी मुलाकात 25 मिनट तक चली। पूरे समय दोनों में कई विचारों का आदान-प्रदान हुआ। डॉ. सिंह ने यूनिवर्सिटी की बेहतरीन के लिए कई सुझाव दिए। अरुण ग्रोवर ने कहा कि प्रधानमंत्री एक अर्थशास्त्री थे, वह पंजाब यूनिवर्सिटी की हेरिटेज और वित्तीय स्थिति के बारे में बहुत अच्छे से जानते थे। उन्होंने वित्तीय संकट से बाहर निकलने में काफी मदद भी की। ग्रोवर ने बताया कि मनमोहन सिंह ने अपने फंड से यूनिवर्सिटी को कई किताबें दीं, लेकिन अभी भी वह एक बॉक्स में बंद हैं। यूनिवर्सिटी जल्द ही उन्हें लाइब्रेरी में स्थापित करने की तैयारी कर रही है।
प्रसिद्ध शिक्षक दीवान आनंद कुमार की तरह ही डॉक्टर सिंह की जीवन यात्रा और उनके उपलब्धियों के बारे में बताया
पंजाब यूनिवर्सिटी ने मनमोहन सिंह की याद में एक अर्थशास्त्र विभाग में एक समर्पित वॉल बनाने का फैसला लिया है। ऐसा ही एक वॉल वर्तमान में पीयू के एडमिन ब्लॉक में प्रवेश करते ही प्रसिद्ध शिक्षक दीवान आनंद कुमार की बनाई गई है। इसी तर्ज पर अर्थशास्त्र विभाग में मनमोहन सिंह की वॉल बनाई जाएगी। इस पर डॉक्टर सिंह की पूरे जीवन यात्रा और उनके उपलब्धियों के बारे में बताया जाएगा। इसके अलावा वीसी ऑफिस में बन रही वॉल ऑफ फेम में भी पूर्व प्रधानमंत्री की तस्वीर होगी।
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पीयू की वीसी रेणु विग ने कहा कि सभी अपने सम्मानित पूर्व छात्र और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन से बेहद दुखी हैं। एक शिक्षाविद, अर्थशास्त्री और नेता के रूप में उनकी विरासत पंजाब यूनिवर्सिटी और देश के इतिहास में हमेशा के लिए अंकित रहेगी। उन्होंने कहा कि पीयू के साथ उनके संबंधों की कई मुख्य विशेषताएं हैं। उन्होंने 1948 में मैट्रिक किया, फिर 1952 में प्रथम श्रेणी के साथ अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने 1954 में अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की।
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एमए अर्थशास्त्र में प्रथम स्थान पर आने पर उत्तम चंद कपूर पदक हासिल किया, फिर उन्होंने 1957 से 1959 तक अर्थशास्त्र में सीनियर लेक्चरर के रूप में काम किया। 1959 से 1963 के बीच अर्थशास्त्र में रीडर का पद संभाला, फिर वे 63 से 65 के बीच अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में आगे बढ़े। उन्हें 1983 में डॉक्टर ऑफ लिटरेचर की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया और उन्हें 2009 में डॉक्टर ऑफ लॉ की मानद उपाधि मिली। उन्होंने 11 अप्रैल 2018 को उद्घाटन प्रो. एसवी रंधनेकर मेमोरियल ओरेशन दिया। अपनी 2018 की यात्रा के दौरान डॉ. सिंह ने कहा कि पीयू में उनका कार्यकाल उनके जीवन का सबसे सुखद समय था और इस संस्थान ने उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास पर गहरा प्रभाव डाला।
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10 मिनट के लिए अप्वाइंटमेंट मिली, बातें 25 मिनट तक चलती रहीं : अरुण ग्रोवर
पंजाब यूनिवर्सिटी के पूर्व वीसी अरुण ग्रोवर ने कहा कि उन्हें पूरे जीवन काल में तीन बार पूर्व प्रधानमंत्री से मिलने का मौका मिला। वीसी बनने के बाद उन्होंने मिलने के लिए अपॉइंटमेंट मांगा था तो 10 मिनट का स्लॉट मिला था, लेकिन जब वह मिले तो पूर्व प्रधानमंत्री से उनकी मुलाकात 25 मिनट तक चली। पूरे समय दोनों में कई विचारों का आदान-प्रदान हुआ। डॉ. सिंह ने यूनिवर्सिटी की बेहतरीन के लिए कई सुझाव दिए। अरुण ग्रोवर ने कहा कि प्रधानमंत्री एक अर्थशास्त्री थे, वह पंजाब यूनिवर्सिटी की हेरिटेज और वित्तीय स्थिति के बारे में बहुत अच्छे से जानते थे। उन्होंने वित्तीय संकट से बाहर निकलने में काफी मदद भी की। ग्रोवर ने बताया कि मनमोहन सिंह ने अपने फंड से यूनिवर्सिटी को कई किताबें दीं, लेकिन अभी भी वह एक बॉक्स में बंद हैं। यूनिवर्सिटी जल्द ही उन्हें लाइब्रेरी में स्थापित करने की तैयारी कर रही है।
प्रसिद्ध शिक्षक दीवान आनंद कुमार की तरह ही डॉक्टर सिंह की जीवन यात्रा और उनके उपलब्धियों के बारे में बताया
पंजाब यूनिवर्सिटी ने मनमोहन सिंह की याद में एक अर्थशास्त्र विभाग में एक समर्पित वॉल बनाने का फैसला लिया है। ऐसा ही एक वॉल वर्तमान में पीयू के एडमिन ब्लॉक में प्रवेश करते ही प्रसिद्ध शिक्षक दीवान आनंद कुमार की बनाई गई है। इसी तर्ज पर अर्थशास्त्र विभाग में मनमोहन सिंह की वॉल बनाई जाएगी। इस पर डॉक्टर सिंह की पूरे जीवन यात्रा और उनके उपलब्धियों के बारे में बताया जाएगा। इसके अलावा वीसी ऑफिस में बन रही वॉल ऑफ फेम में भी पूर्व प्रधानमंत्री की तस्वीर होगी।