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मौत से जंग लड़ रहा ये गांव, चार साल में 17 की मौत, एक जैसी वजह, लोगों में भरा 'खौफ'

Sun, 17 Nov 2019 09:25 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पठानकोट (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पठानकोट (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sun, 17 Nov 2019 09:25 PM IST
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A village of Punjab's Pathankot affected to cancer
जानकारी देते स्थानीय लोग। - फोटो : अमर उजाला

एक गांव अब दहशत में जी रहा है। लोगों के अंदर मौत का खौफ भर चुका है। इसकी वजह चार साल में 17 लोगों की मौत है। इन सभी लोगों की जान एक ही वजह से गई। शासन-प्रशासन में बैठे जिम्मेदार अभी नहीं जागे हैं। जबकि गांव के लोग मदद की गुहार लगा रहे हैं। उन्हें डर है अपनी जिंदगी और अपनों को खोने का। यह कहानी है पंजाब के पठानकोट के गांव भगवानसर की। यह गांव कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बुरी तरह प्रभावित है।

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एक तरफ जहां केंद्र और प्रदेश सरकार जनता को सेहत सुविधा देने के दावे कर रही हैं तो वहीं दूसरी तरफ ये गांव कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गांव के मौजूदा सरपंच भी कैंसर के कारण जान गंवा चुके हैं। उनके अलावा लगभग 17 लोग हैं जो चार वर्षों में इस गंभीर बीमारी से मौत का ग्रास बन गए। 
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गांव के पूर्व सरपंच ओंकार नाथ, पुरुषोत्तम लाल बिट्टू, चुन्नीलाल, मुन्ना, अजय कुमार, सुरेश कुमार, प्रेमचंद, मोनिका, प्रकाश चंदर, हंस राज, अमित कुमार, ललित मेहरा ने बताया कि गांव की आबादी 1500 के करीब है और 150 घर हैं। चार वर्षों में सूबेदार चमन लाल, मास्टर चमन लाल, प्रेमचंद, केवल कृष्ण, तृप्ता देवी, मदन लाल, सुनीता देवी, सुखदेव राज, सोहन लाल, दौलत राम, हरि राम, शिवराम, सुजीत, सतपाल, बोधराज और निशा अपनी जान गंवा चुके हैं। इससे ग्रामीणों में दहशत है। 

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लोग गांव के आसपास लगे ईट भट्ठों से निकलने वाले प्रदूषण को कैंसर, पीलिया, बुखार और चमड़ी रोगों की वजह बता रहे हैं। बताया कि1 वर्ष पहले गांव के मौजूदा सरपंच स्वर्णजीत सिंह भी जान से हाथ धो चुके हैं। लोगों का आरोप है कि सेहत विभाग को इसके बारे में बताया गया है लेकिन कोई सुध लेने नहीं आया। पूर्व सरपंच ओंकारनाथ का आरोप है कि गांव के चारों ओर ईंट के भट्ठों से ही भयानक बीमारी ने गांव में जन्म लिया है। 

उन्होंने बताया कि श्री गुरु रामदास अस्पताल अमृतसर में गांव के कई लोगों की इलाज के दौरान मौत हुई है। इनमें ऐसे परिवार भी हैं जिनके एक ही परिवार के दो लोगों की मौत हो चुकी है। स्थानीय निवासी सुरेश ने बताया कि वह 10 साल से चमड़ी की बीमारी से जूझ रहे हैं और अब तक 15 लाख रुपये इलाज पर खर्च दिए हैं फिर भी इलाज नहीं हो सका। 

पुरुषोत्तम बिट्टू ने बताया कि इस संबंधी कई बार जिला प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अक्सर उन्हें राजनीतिक दबाव बनाकर टाल दिया जाता है। इस संबंध में नजदीकी पीएचसी सेंटर में बताया था और पीएचसी सेंटर के कर्मचारी सर्वे भी कर चुके हैं। डेढ़ महीना गुजर जाने के बाद भी सेहत विभाग की टीम गांव में नहीं पहुंची है। 

पीएचसी कर्मचारी हरपाल सिंह का कहना है कि लोगों की शिकायत के बाद चंद दिन पहले सेहत विभाग की टीम ने पानी के सैंपल लिए हैं। अब तक इस बीमारी के पीछे के कारणों का पता नहीं लग पाया। सेहत विभाग की ओर से टेस्ट के लिए किट आ चुकी है। अधिकारियों की टीम आने पर ही सैंपल चेक किए जा सकेंगे।

दो दिन पहले स्थानीय विधायक जोगिंद्र पाल ने इस संबंधी जानकारी दी थी। सेहत विभाग की टीमें गांवों का सर्वे करती हैं अगर ऐसी बात होती तो उसका रिकॉर्ड होता। अब तक उनके रिकॉर्ड में ऐसा कुछ नहीं है। प्रभावित गांवों के लोग प्रस्ताव पास कर शिकायत दें तो कार्रवाई होगी उससे पहले सर्वे करवाकर बीमारी की जड़ का पता लगाया जाएगा। डाटा एनालिसिस होगा, आशा वर्कर सर्वे करती हैं। उनकी रिपोर्ट मंगवाई जाएंगी। -डॉ. अदिति सलारिया, सिविल सर्जन पठानकोट

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