रोपड़ जेल से कैदी का वीडियो वायरल, आरोप- नशा बेचने का दबाव बनाता है प्रशासन
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रोपड़ जिला जेल से एक कैदी ने वीडियो बनाकर वायरल किया है। इसमें कैदी ने आरोप लगाया है कि जेल प्रशासन उस पर नशा बेचने के लिए दबाव बना रहा है। ऐसा न करने पर एक लाख रुपये की मांग की जा रही है। वहीं जेल प्रशासन का कहना है कि पिछले दिनों में जेल में की गई सख्ती के बाद कैदी ने बौखलाहट में आकर ये वीडियो वायरल किया है। वीडियो में लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं।
ये आरोप लगाए गए हैं
वीडियो में खुद को मनोज कुमार उर्फ मामू बताने वाला कैदी कहता है कि उसे जेल सुपरिंटेंडेंट बहुत तंग कर रहा है। उसे कहा जा रहा है कि एक लाख रुपया दे नहीं तो उसका सामान (नशे) जेल में बेच। सुपरिंटेंडेंट ने एक मुंशी सिकंदर रखा हुआ है जो उसकी सारी बातचीत करता है। सहायक सुपरिंटेंडेंट चमन और सिकंदर सभी को परेशान करते हैं। उसका सारा सामान उन्होंने बाहर गिरा दिया है।
जिला जेल के सुपरिंटेंडेंट हरचरन सिंह गिल का कहना है कि तीन दिन पहले सर्च अभियान में आरोपी मनोज कुमार मामू से मोबाइल मिला था। आरोपी ने उनके पहुंचने से पहले ही जला दिया था। जेल में सुपरिंटेंडेंट के ज्वाइन किए 15 दिन हुए हैं। एडीजीपी पीके सिन्हा के आदेश पर सख्ती की गई है। कैदी की ओर से झूठा वीडियो बनाकर वायरल करने की जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी गई है। कैदी को मुक्तसर जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। कैदी पर 18 मामले दर्ज हैं।
लुधियाना जेल में मिले मोबाइल
जेल प्रशासन ने तीन जनवरी को चेकिंग के दौरान चार हवालातियों के कब्जे से विभिन्न कंपनियों के चार मोबाइल बरामद किए हैं। जेल प्रशासन ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। थाना डिवीजन सात की पुलिस ने हवालाती संदीप सिंह, हरपाल सिंह, गुरविंदर सिंह और राजेश कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
जानकारी के अनुसार जेल में कुछ समय रुकने के बाद अचानक से चेकिंग अभियान चलाया जाता है। इसी रूटीन के तहत जेल प्रशासन ने चेकिंग के दौरान तीन जनवरी को आरोपियों के सामान की चेकिंग की तो उनके कब्जे से मोबाइल बरामद किए गए। जेल प्रशासनिक अधिकारियों ने आरोपियों से पूछताछ की ताकि पता चल सके कि मोबाइल कहां से आए लेकिन आरोपियों ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया। इसके बाद जेल प्रशासन की तरफ से इसकी जानकारी पुलिस को दी गई। अब थाना डिवीजन सात की पुलिस आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर लेने की तैयारी में जुटी है ताकि पता लगाया जा सके कि आरोपियों के पास मोबाइल कहां से आए।