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बिन्दू के खेल ने बढ़ाया हजारों लोगों पर टैक्स का बोझ

Fri, 15 Nov 2013 02:12 PM IST
सर्वेश कुमार
सर्वेश कुमार Updated Fri, 15 Nov 2013 02:12 PM IST
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A point increase the burden of property tax on people
डेसिमल के बाद अंकों के खेल ने एक कनाल के रिहायशी मकानों में रहने वालों के टैक्स का गणित बिगाड़ दिया है।
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दरअसल, नगर निगम की ओर से 500 वर्ग गज तक के प्लाट के लिए लोगों से तीन रुपये प्रति गज के हिसाब से टैक्स चार्ज किया जा रहा है, जबकि इससे अधिक के लिए प्रति वर्ग गज 4.50 रुपये यानी करीब डेढ़ गुना अधिक टैक्स...।

एक कनाल के प्लाटों की रजिस्ट्री 420 वर्ग मीटर के तौर पर की गई थी, जिसे बाद में 500 वर्ग गज मान लिया गया। प्रापर्टी टैक्स जमा कराते हुए जब दशमलव के बाद चार अंकों से गुना किया जाए तो 420 वर्ग मीटर 502 वर्ग गज बन जाता है।
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वहीं, दशमलव के दो अंकों से गुना करने पर यह प्लाट की साइज 499 वर्ग गज से कुछ अधिक है। एक-एक कनाल के प्लाटों में मकान बनाने वाले हजारों सेक्टरवासियों के सामने यही समस्या आ रही है कि आखिरकार किस रेट से प्रापर्टी टैक्स चुकाएं।
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करदाता खुद ही करते हैं टैक्स का आकलन
सेक्टर-दो निवासी कर्नल एसएस कालिया ने कहा कि जमीन की रजिस्ट्री, दोबारा रजिस्ट्री के दौरान भी प्लाट की साइज को या तो एक कनाल माना गया या 500 वर्ग गज, लेकिन दशमलव के बाद के चार अंकों से गुना करने पर यह आंकड़ा 502 वर्ग गज को पार कर जाता है।

इससे मालिकों को दो वर्ग गज जमीन के लिए डेढ़ गुना अधिक प्रॉपर्टी टैक्स चुकाना पड़ रहा है। नगर निगम की ओर से लोगों से सेल्फ असेसमेंट फार्म भरवाए जा रहे हैं।

इसके लिए करदाता खुद ही टैक्स का आकलन कर रहे हैं, लेकिन दशकों पहले के दस्तावेज और मौजूदा कंप्यूटरीकृत प्रणाली में दशमलव के बाद के अंकों को माने जाने का असर हजारों प्रापर्टी मालिकों पर सीधे तौर पर पड़ रहा है।


एक मानक तय हो
सेक्टर-दो में रहने वाले नरेश पंवार का कहना है कि इस मामले को लेकर निगम में जल्द रिप्रेजेंटेशन देंगे। इसके लिए एक मानक तय होना चाहिए, ताकि एक कनाल की कोठियों में रहने वालों को दिक्कतें पेश नहीं आए।

उधर, निगम अधिकारियों का कहना है कि दो वर्ग गज के बदलाव से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा।

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