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Chandigarh News: आवारा कुत्तों के लिए बड़ा शेल्टर बनाने के लिए को तेजी से जगह की तलाश
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चंडीगढ़।
आवारा कुत्तों के लिए बड़े शेल्टर होता की स्थापना को लेकर नगर निगम ने जगह तलाशने की प्रक्रिया तेज कर दी है। हालांकि अभी स्कूल, कॉलेज, रेलवे स्टेशन और अस्पतालों के आसपास से कुत्तों को उठाने का अभियान शुरू नहीं हो पाया है। निगम अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश पर लिखित दिशा-निर्देश अभी तक निगम को प्राप्त नहीं हुए हैं, जिसकी वजह से कार्रवाई में तेजी नहीं आ सकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी शहरों में संवेदनशील स्थलों जैसे स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और रेलवे स्टेशनके आसपास से आवारा कुत्तों को हटाकर सुरक्षित शेल्टर में रखने का आदेश दिया था। इसके बाद निगम स्तर पर उपयुक्त स्थान की खोज की जा रही है। हालांकि अधिकारी इस विषय पर खुलकर बात करने से बच रहे हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि रायपुर कला में गौशाला के पास बड़ी जमीन को संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। मास्टर प्लान के अनुसार वहां का बड़ा हिस्सा ग्रीनलैंड व अन्य मदों में पहले से चिन्हित है। ऐसे में शेल्टर होम बनाने के लिए निगम को विशेष अनुमति लेनी पड़ सकती है।
हरियाणा और पंजाब में भी जगह की तलाश
हरियाणा और पंजाब में भी जमीन तलाशने पर विचार किया जा रहा है, लेकिन वहां जमीन लेने के लिए दोनों राज्यों से अनुमति की जटिल प्रक्रिया भी बाधा बन सकती है। सूत्रों के अनुसार चंडीगढ़ में करीब 10,000 से अधिक आवारा कुत्ते हैं। इनमें से लगभग 2,000 से 3,000 कुत्ते स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों के आसपास पाए जाते हैं। इतनी संख्या को देखते हुए निगम को बड़ा सेंटर बनाना अनिवार्य हो जाएगा। वर्तमान में रायपुर कला में 310 और सेक्टर-38 में 100 कुत्तों को रखने की क्षमता ही उपलब्ध है। यह भी कुत्ते जिन्हें नसबंदी के लिए लाया जाता है। फिलहाल शहर में एक भी पूर्ण शेल्टर होम नहीं है। मेयर हरप्रीत कौर बबला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा और अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा होगी। रायपुर कला में गौशाला के पास की जगह सबसे उपयुक्त मानी जा रही है, लेकिन अंतिम फैसला सदन की स्वीकृति के बाद ही लिया जाएगा। आने वाले दिनों में इस संबंध में नीति तैयार की जाएगी।
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आवारा कुत्तों के लिए बड़े शेल्टर होता की स्थापना को लेकर नगर निगम ने जगह तलाशने की प्रक्रिया तेज कर दी है। हालांकि अभी स्कूल, कॉलेज, रेलवे स्टेशन और अस्पतालों के आसपास से कुत्तों को उठाने का अभियान शुरू नहीं हो पाया है। निगम अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश पर लिखित दिशा-निर्देश अभी तक निगम को प्राप्त नहीं हुए हैं, जिसकी वजह से कार्रवाई में तेजी नहीं आ सकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी शहरों में संवेदनशील स्थलों जैसे स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और रेलवे स्टेशनके आसपास से आवारा कुत्तों को हटाकर सुरक्षित शेल्टर में रखने का आदेश दिया था। इसके बाद निगम स्तर पर उपयुक्त स्थान की खोज की जा रही है। हालांकि अधिकारी इस विषय पर खुलकर बात करने से बच रहे हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि रायपुर कला में गौशाला के पास बड़ी जमीन को संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। मास्टर प्लान के अनुसार वहां का बड़ा हिस्सा ग्रीनलैंड व अन्य मदों में पहले से चिन्हित है। ऐसे में शेल्टर होम बनाने के लिए निगम को विशेष अनुमति लेनी पड़ सकती है।
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हरियाणा और पंजाब में भी जगह की तलाश
हरियाणा और पंजाब में भी जमीन तलाशने पर विचार किया जा रहा है, लेकिन वहां जमीन लेने के लिए दोनों राज्यों से अनुमति की जटिल प्रक्रिया भी बाधा बन सकती है। सूत्रों के अनुसार चंडीगढ़ में करीब 10,000 से अधिक आवारा कुत्ते हैं। इनमें से लगभग 2,000 से 3,000 कुत्ते स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों के आसपास पाए जाते हैं। इतनी संख्या को देखते हुए निगम को बड़ा सेंटर बनाना अनिवार्य हो जाएगा। वर्तमान में रायपुर कला में 310 और सेक्टर-38 में 100 कुत्तों को रखने की क्षमता ही उपलब्ध है। यह भी कुत्ते जिन्हें नसबंदी के लिए लाया जाता है। फिलहाल शहर में एक भी पूर्ण शेल्टर होम नहीं है। मेयर हरप्रीत कौर बबला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा और अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा होगी। रायपुर कला में गौशाला के पास की जगह सबसे उपयुक्त मानी जा रही है, लेकिन अंतिम फैसला सदन की स्वीकृति के बाद ही लिया जाएगा। आने वाले दिनों में इस संबंध में नीति तैयार की जाएगी।
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