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Chandigarh News: राहत की बात... पीजीआई में हर दिन एक मरीज का हो रहा किडनी प्रत्यारोपण
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चंडीगढ़। पीजीआई में किडनी प्रत्यारोपण की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। 2022 में 16 प्रतिशत रही किडनी प्रत्यारोपण की दर 2023 में 40 प्रतिशत पर आ गई है। इस सकारात्मक बदलाव पर पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल का कहना है कि यह संतुष्टिदायक है, क्योंकि किडनी प्रत्यारोपण की बढ़ती संख्या से साबित हो रहा है कि हम ज्यादा से ज्यादा लोगों का जीवन बचाने में सफल हो रहे हैं। फरवरी और मार्च के 59 दिनों में 59 किडनी प्रत्यारोपण किए गए हैं। इससे साबित होता है कि पीजीआई में प्रतिदिन एक किडनी प्रत्यारोपण हो रहा है। यह आंकड़ा देश के किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र के अस्पताल में हुए किडनी प्रत्यारोपण से कहीं ज्यादा है। प्रो. विवेक लाल ने कहा, ‘हमारा उद्देश्य मरीजों की प्रतीक्षा अवधि को कम करना और ज्यादा से ज्यादा अंगदान कराना है। संस्थान के प्रयास के परिणामस्वरूप ही मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच प्रतीक्षा अवधि कम होकर एक साल के बीच आ गई है।’ उन्होंने बताया कि प्रतीक्षा अवधि ज्यादा होने के कारण किडनी के मर्ज से ग्रस्त मरीजों का जीवन बचाना मुश्किल होता है। इसके साथ ही मरीज वायरल संक्रमण या टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इस कारण भी उनका किडनी प्रत्यारोपण नहीं हो पाता।
इनसेट-
दो हजार मरीजों को किडनी का इंतजार
पीजीआई में किडनी संबंधी मर्ज के ग्रस्त लगभग दो हजार मरीज किडनी प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में शामिल हैं। पीजीआई रोटो के नोडल अधिकारी प्रो. विपिन कौशल का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में अब अंगदान को लेकर लोगों की अवधारणा बदल रही है। इसकी पुष्टि अंगदान के आंकड़ों से भी हो रही है। अभियान को सफल बनाने के लिए शिक्षण संस्थानों, धर्म गुरुओं और सामाजिक संस्थाओं को एकजुट होकर काम करना होगा।
इनसेट- इस रफ्तार से बढ़ रहा किडनी प्रत्यारोपण
जनवरी-मार्च 2022 - 42
अप्रैल-जून 2022- 46
जुलाई - सितंबर 2022- 61
अक्तूबर-दिसंबर 2022 - 55
जनवरी-मार्च 2023 - 78
कोट-
इस सफलता का मुख्य श्रेय प्रशासन और सहायक विभागों के तकनीकी कर्मचारियों को जाता है जो बाधाओं की पहचान कर उसे तत्काल दूर करने में सहायक है। तीन दशक के कार्यकाल के दौरान मैंने किडनी प्रत्यारोपण में इतनी तेजी पहले कभी नहीं देखी। विभाग ने इस वर्ष मार्च में 20 प्रतिशत जीवित किडनी प्रत्यारोपण कराया है जो अपनेआप में महत्वपूर्ण है।
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-प्रो. एचएस कोहली, प्रमुख नेफ्रोलॉजी विभाग, पीजीआई
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इनसेट-
दो हजार मरीजों को किडनी का इंतजार
पीजीआई में किडनी संबंधी मर्ज के ग्रस्त लगभग दो हजार मरीज किडनी प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में शामिल हैं। पीजीआई रोटो के नोडल अधिकारी प्रो. विपिन कौशल का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में अब अंगदान को लेकर लोगों की अवधारणा बदल रही है। इसकी पुष्टि अंगदान के आंकड़ों से भी हो रही है। अभियान को सफल बनाने के लिए शिक्षण संस्थानों, धर्म गुरुओं और सामाजिक संस्थाओं को एकजुट होकर काम करना होगा।
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इनसेट- इस रफ्तार से बढ़ रहा किडनी प्रत्यारोपण
जनवरी-मार्च 2022 - 42
अप्रैल-जून 2022- 46
जुलाई - सितंबर 2022- 61
अक्तूबर-दिसंबर 2022 - 55
जनवरी-मार्च 2023 - 78
कोट-
इस सफलता का मुख्य श्रेय प्रशासन और सहायक विभागों के तकनीकी कर्मचारियों को जाता है जो बाधाओं की पहचान कर उसे तत्काल दूर करने में सहायक है। तीन दशक के कार्यकाल के दौरान मैंने किडनी प्रत्यारोपण में इतनी तेजी पहले कभी नहीं देखी। विभाग ने इस वर्ष मार्च में 20 प्रतिशत जीवित किडनी प्रत्यारोपण कराया है जो अपनेआप में महत्वपूर्ण है।
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-प्रो. एचएस कोहली, प्रमुख नेफ्रोलॉजी विभाग, पीजीआई