पठानकोट: 40 दिन के इलाज के बाद कोरोना से जीती जंग, अगले ही दिन हो गई मौत
- 40 दिन चले इलाज के बाद 17 मई को हुआ कोरोना मुक्त, कुछ घंटे बाद हुई मौत
- परिवार का आरोप- संक्रमित नहीं था जयपाल, टीबी के मरीज पर लगाया कोरोना का ठप्पा
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कोरोना मुक्त होने के एक दिन बाद ही पठानकोट का जयपाल टीबी रोग के चलते जिंदगी की जंग हार गया। मामून के 35 वर्षीय ऑटो ड्राइवर ने 40 दिन कोरोना से लड़ाई लड़ी और मंगलवार शाम को उसकी दूसरे फेज की रिपोर्ट निगेटिव आई और अगले ही दिन जयपाल ने अमृतसर के जीएनडीएच अस्पताल में आखिरी सांस ली।
सोमवार को उसके गांव मामून में प्रशासनिक देखरेख में अंतिम संस्कार किया गया। वहीं, परिवार ने जयपाल की मौत को जीएनडीएच अमृतसर और पठानकोट स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की लापरवाही बताया है। परिवार का कहना है कि जयपाल संक्रमित नहीं था। वह टीबी का मरीज था। लेकिन प्रशासन ने उसे कोरोना संक्रमित बताया और अमृतसर में इलाज के अभाव में उसकी मौत हो गई।
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बता दें, जयपाल पहले से टीबी का मरीज था और 4 महीने से किसी निजी अस्पताल में इलाज करवा रहा था। छाती में इंफेक्शन के कारण सांस लेने में दिक्कत हुई तो सिविल अस्पताल लाया गया। जहां उसका सैंपल लिया और 40 दिन पहले रिपोर्ट पॉजिटिव आई। जिसके बाद उसे पठानकोट सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया। लेकिन हालत बिगड़ने पर अमृतसर के श्री गुरु नानक देव जी अस्पताल रेफर कर दिया गया। जहां उसका इलाज चला और 15 मई को उसका पहले फेज का सैंपल लिया। जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आने पर दूसरा सैंपल लिया।
उसकी रिपोर्ट भी 17 मई को निगेटिव आई। लेकिन सुबह तड़के उसकी सांस उखड़ी और वेंटिलेटर पर डालने के 6 घंटे बाद मौत हो गई। सिविल अस्पताल एसएमओ डॉ. भूपिंदर सिंह ने बताया कि जयपाल की अंतिम दो रिपोर्ट निगेटिव आई थी। अगर उसकी सेहत में सुधार हो जाता तो सोमवार को उसे अस्पताल से छुट्टी मिल जाती। वहीं, देर शाम को जयपाल के पैतृक गांव मामून के श्मशान घाट पर प्रशासन की देखरेख में जयपाल का अंतिम संस्कार कर दिया गया। अमृतसर से एंबुलेंस सीधे श्मशानघाट पहुंची संस्कार के समय स्वास्थ्य विभाग का एक डॉक्टर भी मौजूद रहा।
भाई पर जबरदस्ती लगाया कोरोना ठप्पा: जयकरण
मृतक के भाई जयकरण ने बताया कि उसका भाई टीबी का मरीज था, ना कि कोरोना का। परिवार सहित 41 लोगों के सैंपल लिए, जो सभी निगेटिव आए। अधिकारियों की लापरवाही के कारण उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई होगी। लेकिन उसके भाई पर कोरोना संक्रमित का ठप्पा लगा दिया। अमृतसर में उसे सही इलाज नहीं मिला। इस कारण उसकी मौत हुई। अगर वह भाई को छुट्टी दे देते तो उसका कहीं अन्य जगह इलाज करवाते तो शायद उसकी जान बच जाती।