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चंडीगढ़: गुर्दे खराब, इलाज में बिक गए गहने, घर बेचने की नौबत...आयुष्मान कार्ड बना दो साहब

Sun, 12 Sep 2021 06:20 PM IST
ajay kumar रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 12 Sep 2021 06:20 PM IST
सार

दड़वा निवासी शोभा देवी का कहना है कि परिवार में सदस्य ज्यादा हैं। अगर किसी की भी तबीयत खराब होती है तो इलाज के लिए चिंता में पड़ जाते हैं। बताया कि उनके पास राशन कार्ड भी है लेकिन आयुष्मान कार्ड नहीं है। जब भी शिविर लगता है तो वह जाती हैं लेकिन आज तक कार्ड नहीं बना।

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A family struggling for treatment in Chandigarh
दड़वा में रहने वाले 43 वर्षीय परमजीत सिंह अपने परिवार के साथ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दड़वा में रहने वाले 43 वर्षीय परमजीत सिंह के दोनों पैर खराब हैं। नौकरी थी, वह भी छूट गई। कुछ महीने पहले तबीयत बिगड़ी तो पता चला दोनों गुर्दे भी खराब हैं। पत्नी दिव्यांग हैं। परमजीत डायलिसिस पर ही जिंदा हैं। इलाज के खर्च में पत्नी के सारे गहने बिक गए हैं। अब घर बेचने की नौबत है। परमजीत का कहना है कि जब उनके पास गरीबी कार्ड है तो उन्हें आयुष्मान का लाभ क्यों नहीं दिया जा रहा।

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परमजीत ने बताया कि अगर उनका आयुष्मान कार्ड बन जाए तो उनका डायलिसिस मुफ्त हो जाएगा। वह इलाज के खर्च की चिंता से मुक्त हो जाएंगे। उन्होंने सभी प्रशासनिक अधिकारियों से आयुष्मान कार्ड बनवाने की गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। परमजीत ने बताया कि पोलियो के कारण वह शुरू से ही चल नहीं सकते। 
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वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रशासक जेएफआर जैकब ने उन्हें एक नौकरी दिलाई। अक्तूबर 2018 में वह भी चली गई। परिवार का पालन-पोषण कैसे करेंगे, इसी चिंता में तबीयत खराब होती चली गई। जीएमएसएच-16 में इलाज चला लेकिन वह गुर्दे में संक्रमण की बात बताते रहे। इसी तरह कई महीने बीत गए। जो दवाइयां खाईं, उनसे राहत नहीं मिली। 
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तकलीफ बढ़ती गई तो एक निजी अस्पताल में जांच कराई। यहां पता चला कि दोनों गुर्दे खराब हो चुके हैं। तब से वह डायलिसिस पर जिंदा हैं। इलाज का खर्च परिवार सहन नहीं कर पा रहा है। यही नहीं, 17 वर्षीय बेटे में भी प्रोटीन लीकेज की शिकायत है। बेटी दो साल की है। परमजीत की सिर्फ एक ही मांग है कि जिन्हें सरकार ने ही गरीब घोषित किया है, कम से कम उन्हें तो आयुष्मान का लाभ मिलना चाहिए। अगर आयुष्मान कार्ड बन जाएगा तो उनकी उम्र बढ़ जाएगी। 

अचानक बेहोश हो जाती है बेटी

दड़वा में रहने वाली रेखा की 14 साल की बेटी को अचानक झटके आते हैं और वह बेहोश हो जाती है। पीजीआई से इलाज करा रहे हैं। खर्चा ज्यादा होने के कारण आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। रेखा ने बताया कि उनके पास गरीबी रेखा से नीचे होने का कार्ड भी है लेकिन आयुष्मान कार्ड नहीं है। इसके होने से बहुत बड़ी समस्या दूर हो जाएगी। 

केंद्र की 69282 लोगों की सूची में से नहीं मिले 45604 लोग
केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ के 69282 आयुष्मान लाभार्थियों की सूची बनाई और प्रशासन को भेजी। प्रशासन ने जब इन तक पहुंचने की कोशिश की तो 45604 परिवार मिले ही नहीं। पूर्व गृह व स्वास्थ्य सचिव अरुण गुप्ता ने बताया था कि इनमें से कई के सिर्फ सीरियल नंबर लिखे थे, उसके आगे नाम, पता आदि कुछ लिखा ही नहीं था। वहीं, कुछ ऐसे थे जिनका पता सही नहीं लिखा था, जिसकी वजह से उनकी पहचान ही नहीं हो पाई। बाकी बचे 23678 लाभार्थियों में से विभाग ने करीब 19 हजार लाभार्थियों को ही कार्ड जारी कर पाया है।

कुछ दिन पहले कैबिनेट सचिव के साथ हुई बैठक में मैंने ये मुद्दा उठाया है। चंडीगढ़ के साथ देश के कई राज्यों ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के पात्र लोगों को आयुष्मान का लाभ दिए जाने की मांग की है। केंद्र सरकार के स्तर पर इस पर फैसला लिया जाना है। - यशपाल गर्ग, स्वास्थ्य सचिव

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