कोरोना का संदिग्ध अस्पताल से भागा, प्रशासन के हाथ-पांव फूले, अब रहेगा 14 दिन की निगरानी में
- प्रशासन के हाथ पांव फूले, पकड़कर लाए, अब 14 दिन तक आइसोलेटेड वार्ड में होगी निगरानी।
- चीन के बीजिंग एयरपोर्ट पर बिताए थे करीब 15 घंटे, अब हल्के बुखार की थी शिकायत।
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विस्तार
गुरुवार को सिविल अस्पताल गुरदासपुर और जिला प्रशासन में उस समय अफरा तफरी मच गई जब कोरोना वायरस की स्क्रीनिंग करवाने के लिए आया युवक अचानक से गायब हो गया। युवक खून का सैंपल देने के बाद घर चला गया, जिसके चलते जिला तथा पुलिस प्रशासन युवक की तलाश में जुट गया। आखिरकार कुछ घंटों बाद युवक के परिजनों से संपर्क साधा गया। युवक ने माना कि वह डर गया था, जिसके चलते वह बिना बताए घर निकल गया।
बता दें कि युवक कुछ दिन पहले ही न्यूजीलैंड से वापस भारत आया था। भारत लौटते समय फ्लाइट चीन में बीजिंग एयरपोर्ट पर करीब 15 घंटे तक रुकी रही। चीन में रुकने के कारण एयरपोर्ट अथॉरिटी ने भी स्क्रीनिंग की। बाद में बुखार होने के चलते गुरुवार को वह सिविल अस्पताल गुरदासपुर पहुंचा, जहां दोबारा उसकी स्क्रीनिंग होनी थी।
युवक ने सिविल अस्पताल में जांच के लिए खून का सैंपल दिया। नियमानुसार उसे निगरानी के लिए आइसोलेटेड वार्ड में 14 दिन के लिए भी रखा जाना था। जिसके चलते वह अस्पताल से बिना किसी को बताए कहीं चला गया। युवक की गुमशुदगी ने सिविल अस्पताल प्रशासन के हाथ पांव फुला दिए। जिसके उपरांत अस्पताल प्रशासन ने तुरंत इसकी जानकारी डिप्टी कमिश्नर को दी।
डॉ. मनजिंदर बब्बर ने बताया कि युवक की स्क्रीनिंग की जा रही है। सैंपल लिए गए तथा उसे 14 दिन के लिए आइसोलेटेड वार्ड में रखा जाना था। डिप्टी कमिश्नर गुरदासपुर मोहम्मद इश्फाक ने अपील करते हुए कहा कि बिना वजह किसी प्रकार के डर का माहौल न बनाया जाए। युवक का परिवार स्क्रीनिंग के लिए सिविल अस्पताल आने को तैयार है।
जालंधर: कोरोना के खौफ से मार्केट से गायब हुए मास्क
भारत में भी कोरोना का काफी खौफ है। इससे बचने के लिए लोग मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। मास्क की बढ़ती मांग की वजह से दाम में भी इजाफा हो गया है। हालात ये है कि जो मास्क पहले खुदरा दुकानदार को 4 से 5 रुपये में मिल जाता था, उसका दाम आज बढ़कर 15 रुपये हो गया है।
पहले यह मास्क आम आदमी को 8 से 10 रुपये में मिल जाता था लेकिन मास्क की बढ़ती मांग के कारण अब 20 रुपये में मिल रहा है। यह प्रिंट रेट से 15 रुपये से भी ज्यादा है। इसका मुख्य कारण मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, पटियाला व अन्य बड़े शहरों में बढ़ रही मांग है। सूत्रों के अनुसार पटियाला की एक फर्म ने 3 लाख के मास्क का आर्डर एक कंपनी को दिया है लेकिन कंपनी ने इतनी संख्या में मास्क का निर्माण से अपने हाथ खींच लिए हैं।