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Chandigarh News: साथी की तबीयत बिगड़ी, एक दिन रुका दल और टल गया बड़ा संकट
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चंडीगढ़। सेक्टर-19 निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट रचित गोयल के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा आस्था के साथ जिंदगी का ऐसा अनुभव बन गई, जिसे वह कभी नहीं भूल पाएंगे। करीब 20 दोस्तों के साथ भगवान शिव के धाम की यात्रा पर गए रचित के दल को रास्ते में एक ऐसी परिस्थिति का सामना करना पड़ा, जिसने पूरी यात्रा की दिशा बदल दी।
यात्रा के दौरान एक साथी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। ऊंचाई पर सांस लेने में परेशानी के कारण वह आगे बढ़ने की स्थिति में नहीं था। साथी की हालत को देखते हुए दल ने कैलाश पर्वत की चढ़ाई एक दिन के लिए टाल दी। इसी दौरान नेपाल में बड़ा हादसा होने की जानकारी मिली। रचित के मुताबिक, यदि दल तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ता तो हालात बेहद गंभीर हो सकते थे।
उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन दल के 12 सदस्य कैलाश पर्वत की ओर बढ़ रहे थे, जबकि साथी की तबीयत खराब होने के कारण कुछ सदस्य एक दिन पीछे रुक गए। सांस लेने में दिक्कत के कारण साथी चलने में भी असमर्थ था।
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रचित गोयल इसे महज संयोग नहीं, बल्कि भगवान शिव की कृपा मानते हैं। उनका कहना है कि साथी की तबीयत उसी समय बिगड़ना और यात्रा एक दिन टलना उनके लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं था। आज भी उस यात्रा को याद कर उन्हें लगता है कि भोलेनाथ ने उन्हें बड़े संकट से बचाया।
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यात्रा के दौरान एक साथी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। ऊंचाई पर सांस लेने में परेशानी के कारण वह आगे बढ़ने की स्थिति में नहीं था। साथी की हालत को देखते हुए दल ने कैलाश पर्वत की चढ़ाई एक दिन के लिए टाल दी। इसी दौरान नेपाल में बड़ा हादसा होने की जानकारी मिली। रचित के मुताबिक, यदि दल तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ता तो हालात बेहद गंभीर हो सकते थे।
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उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन दल के 12 सदस्य कैलाश पर्वत की ओर बढ़ रहे थे, जबकि साथी की तबीयत खराब होने के कारण कुछ सदस्य एक दिन पीछे रुक गए। सांस लेने में दिक्कत के कारण साथी चलने में भी असमर्थ था।
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रचित गोयल इसे महज संयोग नहीं, बल्कि भगवान शिव की कृपा मानते हैं। उनका कहना है कि साथी की तबीयत उसी समय बिगड़ना और यात्रा एक दिन टलना उनके लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं था। आज भी उस यात्रा को याद कर उन्हें लगता है कि भोलेनाथ ने उन्हें बड़े संकट से बचाया।