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‘हुक्का बंद करने पर 98 प्रतिशत ने भरी हामी’
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चंडीगढ़। हुक्का बार के संचालन को लेकर विशेषज्ञों के साथ ही देश की प्रबुद्ध जनता भी बेहद चिंतित है। उनकी राय है कि देश में हुक्का बार का संचालन पूरी तरह बंद होना चाहिए। पीजीआई के सामुदायिक चिकित्सा विभाग व स्ट्रेटेजिक इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक हेल्थ एंड रिसर्च की तरफ से किए गए सर्वे में यह बात सामने आई है।
सर्वे ट्विटर, फेसबुक के साथ ही सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों के जरिए किया गया है। एक महीने के दौरान किये गए ओपेन पोल में शामिल स्वास्थ्य विशेषज्ञ, डॉक्टर व लोगों में से 98 प्रतिशत इस पर तत्काल पूरी तरह रोक लगाने के पक्ष में है। स्ट्रेटेजिक इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक हेल्थ एंड रिसर्च के अध्यक्ष व पंजाब के पूर्व निदेशक स्वास्थ्य डॉ. आरके गुप्ता का कहना है कि हुक्का बार पर रोक नहीं लगाया गया तो जल्द ही स्थिति भयावह हो जाएगी।
अनजाने में ले रहे मौत का कश
डॉ. गुप्ता ने बताया कि 45 मिनट के हुक्का सेशन में एक व्यक्ति एक सिगरेट से 36 गुना ज्यादा टार व 70 फीसदी ज्यादा निकोटिन निगल जाता है। मौजूदा समय में फ्लेवर हुक्का का चलन तेजी से बढ़ रहा है। हुक्का बार संचालन इसके खतरनाक न होने की बात कहते हैं जबकि उसमें चारकोल का प्रयोग किया जाता है, जिसके धुएं से शरीर में कैंसर उत्पन्न करने वाले तत्व पहुंचते हैं। कई युवा हुक्के में पानी की जगह शराब और सोडा डालते हैं। शराब और धुआं एक साथ निगलना और भी ज्यादा खतरनाक है। इसके अलावा हर्बल हुक्का जैसी बातों में यकीन न करें क्योंकि अगर मान भी लें कि हुक्के में तंबाकू नहीं है तब भी चारकोल तो जलेगा ही और इसका धुआं आप निगलेंगे। इसकी ऑनलाइन बिक्री पर भी रोक लगानी होगा क्योंकि सभी सामान ऑनलाइन मिल रहे हैं।
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हुक्का पीने वाले के साथ बैठने वाले को भी खतरा
पैसिव स्मोकर्स यानी हुक्का पीने वालों के साथ बैठने वालों को भी नुकसान पहुंचता है। ब्रॉन्कियल अस्थमा के मरीजों को हुक्का पीने वालों से सबसे ज्यादा खतरा होता है। कई लोग एक ही हुक्के को मुंह लगाते हैं जबकि इससे इन्फेक्शन हो सकता है। कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने से धमनियां चोक हो जाती हैं जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। कैंसर हुक्का फ्लेवर्स में ऐसे पदार्थ होते हैं जो फेफड़े, मुंह के कैंसर कारक हैं।
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सर्वे ट्विटर, फेसबुक के साथ ही सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों के जरिए किया गया है। एक महीने के दौरान किये गए ओपेन पोल में शामिल स्वास्थ्य विशेषज्ञ, डॉक्टर व लोगों में से 98 प्रतिशत इस पर तत्काल पूरी तरह रोक लगाने के पक्ष में है। स्ट्रेटेजिक इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक हेल्थ एंड रिसर्च के अध्यक्ष व पंजाब के पूर्व निदेशक स्वास्थ्य डॉ. आरके गुप्ता का कहना है कि हुक्का बार पर रोक नहीं लगाया गया तो जल्द ही स्थिति भयावह हो जाएगी।
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अनजाने में ले रहे मौत का कश
डॉ. गुप्ता ने बताया कि 45 मिनट के हुक्का सेशन में एक व्यक्ति एक सिगरेट से 36 गुना ज्यादा टार व 70 फीसदी ज्यादा निकोटिन निगल जाता है। मौजूदा समय में फ्लेवर हुक्का का चलन तेजी से बढ़ रहा है। हुक्का बार संचालन इसके खतरनाक न होने की बात कहते हैं जबकि उसमें चारकोल का प्रयोग किया जाता है, जिसके धुएं से शरीर में कैंसर उत्पन्न करने वाले तत्व पहुंचते हैं। कई युवा हुक्के में पानी की जगह शराब और सोडा डालते हैं। शराब और धुआं एक साथ निगलना और भी ज्यादा खतरनाक है। इसके अलावा हर्बल हुक्का जैसी बातों में यकीन न करें क्योंकि अगर मान भी लें कि हुक्के में तंबाकू नहीं है तब भी चारकोल तो जलेगा ही और इसका धुआं आप निगलेंगे। इसकी ऑनलाइन बिक्री पर भी रोक लगानी होगा क्योंकि सभी सामान ऑनलाइन मिल रहे हैं।
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हुक्का पीने वाले के साथ बैठने वाले को भी खतरा
पैसिव स्मोकर्स यानी हुक्का पीने वालों के साथ बैठने वालों को भी नुकसान पहुंचता है। ब्रॉन्कियल अस्थमा के मरीजों को हुक्का पीने वालों से सबसे ज्यादा खतरा होता है। कई लोग एक ही हुक्के को मुंह लगाते हैं जबकि इससे इन्फेक्शन हो सकता है। कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने से धमनियां चोक हो जाती हैं जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। कैंसर हुक्का फ्लेवर्स में ऐसे पदार्थ होते हैं जो फेफड़े, मुंह के कैंसर कारक हैं।