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Chandigarh News: 9 साल की मेधावी बच्ची की मौत, हाईकोर्ट ने मुआवजा तीन गुना बढ़ाया
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-हिसार के मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने तय किया था 1.7 लाख मुआवजा
- हाईकोर्ट ने बच्ची की आय को 30 हजार रुपये वार्षिक मानते हुए जारी किया आदेश
-बच्ची की मां ने दाखिल की थी अपील, हाईकोर्ट ने मुआवजा बढ़ा कर किया 5.34 लाख
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। मोटर वाहन हादसे में जान गंवाने वाली 9 साल की छात्रा को मेधावी मानते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उसकी मौत के लिए मुआवजे की राशि 1.7 लाख से बढ़ाकर 5.34 लाख (करीब तीन गुना) कर दी है।
याचिका दाखिल करते हुए हिसार निवासी शांति देवी ने हाईकोर्ट को बताया कि उसकी बेटी रेखा की 2009 में राजस्थान रोडवेज की बस के नीचे आने के कारण मौत हो गई थी। उसने अपनी बेटी की मौत के लिए मुआवजे की मांग को लेकर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल हिसार में याचिका दाखिल की थी और मुआवजे के तौर पर 10 लाख रुपये की मांग की थी। ट्रिब्यूनल ने मुआवजे के तौर पर 1.5 लाख रुपये और अंतिम संस्कार के लिए 20 हजार रुपये मंजूर किए थे। इस फैसले से असंतुष्ट याची ने आदेश को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए चुनौती दी थी। याची की दलील थी कि उसकी बेटी मेधावी थी और तीसरी कक्षा की छात्रा थी। याची को मुआवजा जारी करते हुए इस पहलू का ध्यान नहीं रखा गया। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि मेधावी छात्रा की मौत के लिए ट्रिब्यूनल द्वारा तय मुआवजा काफी नहीं है। बच्ची की आय को 30 हजार रुपये वार्षिक मानते हुए हाईकोर्ट ने अब 15 का गुणांक लगाकर मुआवजा 4,50,000 रुपये तय किया है। बाकी के अंतिम क्रिया सहित अन्य नुकसान के लिए 84700 रुपये तय किया है। ऐसे में अब मृतक बच्ची की मां को मुआवजे के तौर पर 5.34 लाख रुपये का भुगतान करना होगा।
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- हाईकोर्ट ने बच्ची की आय को 30 हजार रुपये वार्षिक मानते हुए जारी किया आदेश
-बच्ची की मां ने दाखिल की थी अपील, हाईकोर्ट ने मुआवजा बढ़ा कर किया 5.34 लाख
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। मोटर वाहन हादसे में जान गंवाने वाली 9 साल की छात्रा को मेधावी मानते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उसकी मौत के लिए मुआवजे की राशि 1.7 लाख से बढ़ाकर 5.34 लाख (करीब तीन गुना) कर दी है।
याचिका दाखिल करते हुए हिसार निवासी शांति देवी ने हाईकोर्ट को बताया कि उसकी बेटी रेखा की 2009 में राजस्थान रोडवेज की बस के नीचे आने के कारण मौत हो गई थी। उसने अपनी बेटी की मौत के लिए मुआवजे की मांग को लेकर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल हिसार में याचिका दाखिल की थी और मुआवजे के तौर पर 10 लाख रुपये की मांग की थी। ट्रिब्यूनल ने मुआवजे के तौर पर 1.5 लाख रुपये और अंतिम संस्कार के लिए 20 हजार रुपये मंजूर किए थे। इस फैसले से असंतुष्ट याची ने आदेश को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए चुनौती दी थी। याची की दलील थी कि उसकी बेटी मेधावी थी और तीसरी कक्षा की छात्रा थी। याची को मुआवजा जारी करते हुए इस पहलू का ध्यान नहीं रखा गया। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि मेधावी छात्रा की मौत के लिए ट्रिब्यूनल द्वारा तय मुआवजा काफी नहीं है। बच्ची की आय को 30 हजार रुपये वार्षिक मानते हुए हाईकोर्ट ने अब 15 का गुणांक लगाकर मुआवजा 4,50,000 रुपये तय किया है। बाकी के अंतिम क्रिया सहित अन्य नुकसान के लिए 84700 रुपये तय किया है। ऐसे में अब मृतक बच्ची की मां को मुआवजे के तौर पर 5.34 लाख रुपये का भुगतान करना होगा।
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