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Hindi News ›   Chandigarh ›   80 to 90 percent of milk and milk related products are adulterated in india according to World Health Organization  

जनहित याचिका: 80 से 90 प्रतिशत दूध मिलावटी, हाईकोर्ट ने हरियाणा-पंजाब और यूटी को दिए नियमित जांच के आदेश

Sat, 21 May 2022 10:50 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 21 May 2022 10:50 PM IST
सार

देश में 14 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन होता है जबकि खपत 65 करोड़ लीटर है। उत्पादन और खपत के बीच अंतर से साफ है कि मांग मिलावटी दूध और दुग्ध उत्पादों से पूरी की जा रही है।

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80 to 90 percent of milk and milk related products are adulterated in india according to World Health Organization  
milk - फोटो : iStock

विस्तार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और केंद्र के मंत्रालयों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दाखिल जनहित याचिका में बताया गया कि देश में मिल रहे दूध व दूध से जुड़े 80 से 90 प्रतिशत उत्पाद मिलावटी हैं। हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ ने इसे रोकने के लिए उठाए कदमों की जानकारी दी। इस जानकारी को रिकॉर्ड में रखते हुए हाईकोर्ट ने आगे भी इसी प्रकार जांच जारी रखने का आदेश दिया है।

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सर्विंग इन ऑर्गेनाइजेशन इन लीगल इनिशिएटिव संस्था ने एडवोकेट कीरत पाल सिंह के माध्यम से जनहित याचिका दायर कर बताया कि जमीमा वेबर की ओर से 19 सितंबर, 2018 को प्रकाशित एक आर्टिकल में बताया है कि भारत के 70 प्रतिशत से अधिक दुग्ध उत्पाद राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों पर सही नहीं उतरे हैं। 
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विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भारत के दुग्ध उत्पादों की जांच नहीं की गई तो 2025 तक 87 प्रतिशत भारतीय घातक बीमारियों जैसे कैंसर आदि के शिकार हो सकते हैं। विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 89.2 प्रतिशत दुग्ध उत्पादों में किसी न किसी तरह की मिलावट पाई है।
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हाईकोर्ट को बताया गया कि भारत दुग्ध उत्पाद के मामले में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है लेकिन यहां मिलावटी दुग्ध उत्पाद कहीं ज्यादा हैं। अगर आंकड़ों को देखें तो देश में 14 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन होता है जबकि खपत 65 करोड़ लीटर है। उत्पादन और खपत के बीच अंतर से साफ है कि मांग मिलावटी दूध और दुग्ध उत्पादों से पूरी की जा रही है। हाईकोर्ट को बताया गया कि केंद्र सरकार समय-समय पर मिलावटी दूध और दुग्ध उत्पादों की जांच के निर्देश जारी करती है बावजूद इसके इन निर्देशों का पालन सख्ती से नहीं हो रहा। 

याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि केंद्र सहित राज्य सरकारों को निर्देश जारी कर दूध और दुग्ध उत्पादों की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए और आम लोगों को जागरूक किया जाए कि वह कैसे मिलावटी दुग्ध उत्पादों की जांच कर सकते हैं। हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ ने जवाब दाखिल करते हुए बताया कि नियमित जांच जारी है। हाईकोर्ट ने जांच को भविष्य में भी ऐसे ही जारी रखने का आदेश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।

नकली दूध बनाने में घातक पदार्थों का होता है इस्तेमाल

हाईकोर्ट को बताया गया कि नकली दूध बनाने में घातक डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा, सफेद पेंट, हाईड्रोपेरॉक्साइड, वनस्पति तेल, फर्टिलाइजर जैसे घातक पदार्थों का इस्तेमाल होता है। ये सभी पदार्थ मानवीय स्वास्थ्य के लिए घातक हैं और कैंसर जैसे कई घातक रोगों का कारक है।

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