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राहगीरों से ही नहीं बच्चों की सुरक्षा से भी खिलवाड़, 80 फीसदी स्कूल बसों में कमी
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
Updated Tue, 29 Nov 2016 01:03 AM IST
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ट्रैफिक पुलिस ने काटे 11 स्कूल बसों के चलान
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क्या आप जानते हैं कि आपके बच्चे का घर से स्कूल तक का सफर बेहद जोखिम भरा है। क्योंकि नियमों को ताक पर रखकर चलने वाली स्कूल बसें आपके बच्चों के लिए कभी भी खतरनाक साबित हो सकती हैं। बसों में सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की है या बस संचालक की, ये कोई भी स्पष्ट करने को तैयार नहीं है। हादसा होने पर सभी अपना पल्ला झाड़ते नजर आते हैं। बसों का किराया हर साल बढ़ता है, लेकिन बसों में सुविधाएं नहीं। अभी तीन दिन पहले ही शनिवार एक प्राइवेट स्कूल बस ने एक मजदूर को सड़क के किनारे रौंदकर मार डाला था। उस बस में स्कूली बच्चे भी थे, गनीमत रही कि ये हादसा घग्गर पुल से कुछ मीटर के फासले पर हुआ, नहीं तो स्कूली बच्चे भी हादसे की चपेट में आ सकते थे।
सोमवार को ट्रैफिक पुलिस ने स्कूल बसों की चेकिंग की तो अधिकतर स्कूल बसों में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं थे। कई के फायर सेफ्टी सिस्टम भी खराब मिले। कुछ में फर्स्ट एड बॉक्स थे, उनमें प्राथमिक उपचार किट नहीं थे। पंचकूला सेक्टर-4 के एक प्राइवेट स्कूल के ऑटो की पासिंग डेट ही समाप्त हो चुकी थी और फर्स्ट एड किट नहीं थी। इस दौरान 11 स्कूल बसों के चालान काटे गए।
80 फीसदी स्कूल बसों में ट्रेंड अटेंडेंट नहीं
जिले के प्राइवेट स्कूल बसों में प्राथमिक उपचार के लिए ट्रेंड अटेंडेंट और कंडक्टर तक नहीं हैं। इन बसों में क्षमता से ज्यादा बच्चे बिठाए जाते हैं। वहीं करीब 70 से 80 फीसदी स्कूल बसों में अटेंडेंट के पास फर्स्ट एड सर्टिफिकेट्स नहीं है। इस साल सिर्फ दो स्कूलों के अटेंडेंट को रेडक्रॉस सोसाइटी की ओर से ट्रेंनिंग दी गई है। अन्य स्कूल ट्रेनिंग के लिए आए ही नहीं।
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सोमवार को ट्रैफिक पुलिस ने स्कूल बसों की चेकिंग की तो अधिकतर स्कूल बसों में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं थे। कई के फायर सेफ्टी सिस्टम भी खराब मिले। कुछ में फर्स्ट एड बॉक्स थे, उनमें प्राथमिक उपचार किट नहीं थे। पंचकूला सेक्टर-4 के एक प्राइवेट स्कूल के ऑटो की पासिंग डेट ही समाप्त हो चुकी थी और फर्स्ट एड किट नहीं थी। इस दौरान 11 स्कूल बसों के चालान काटे गए।
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80 फीसदी स्कूल बसों में ट्रेंड अटेंडेंट नहीं
जिले के प्राइवेट स्कूल बसों में प्राथमिक उपचार के लिए ट्रेंड अटेंडेंट और कंडक्टर तक नहीं हैं। इन बसों में क्षमता से ज्यादा बच्चे बिठाए जाते हैं। वहीं करीब 70 से 80 फीसदी स्कूल बसों में अटेंडेंट के पास फर्स्ट एड सर्टिफिकेट्स नहीं है। इस साल सिर्फ दो स्कूलों के अटेंडेंट को रेडक्रॉस सोसाइटी की ओर से ट्रेंनिंग दी गई है। अन्य स्कूल ट्रेनिंग के लिए आए ही नहीं।
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ये है नियम, तोड़ने पर होगी कार्रवाई
80 फीसदी स्कूल बसों में ट्रेंड अटेंडेंट नहीं
ये है नियम, तोड़ने पर होगी कार्रवाई
बसों की खिड़कियों में सेफ्टी राड्स, दरवाजे से सटी सीट पर सुरक्षित जाली या मेटेलिक कवर ताकि छोटे बच्चों के साथ बस में किसी तरह का हादसा न हो या वे फिसलकर नीचे न गिर जाएं। बस में सीसीटीवी कैमरे जरूरी है। दो इमरजेंसी गेट एक साइड पर और एक पीछे। प्राथमिक उपचार बॉक्स होना चाहिए। आग बुझाओ यंत्र मौजूद होने चाहिए। स्टोरेज रैक ऊपर की बजाय बच्चे की सीट के नीचे हो।
बस के चारों इंडिकेटर चलते हैं तो बीप होना जरूरी। बस में छात्राएं हैं तो लेडी अटेंडेंट का होना अनिवार्य। बस में चढ़ने के दौरान स्टेप का साइज छह इंच होना चाहिए। प्रशिक्षित कंडक्टर अनिवार्य है। एक महीने की सीसीटीवी रिकार्डिंग का रिकार्ड जरूरी, बसों का रंग पीला हो। गोल्डन ब्राउन रंग की पट्टी पर स्कूल का नाम लिखा होना चाहिए। बस पर डीटीओ का मोबाइल नंबर लिखा होना जरूरी है।
11 बसों के किए चालान : ट्रैफिक इंस्पेक्टर
पंचकूला के ट्रैफिक इंस्पेक्टर सुरेश कुमार ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से पंचकूला ट्रैफिक पुलिस स्कूल बसों की चेकिंग कर रही है। सोमवार को 11 बसों के चालान किए गए हैं। अधिकांश बसों में फायर सेफ्टी सिस्टम एक्सपायर हो चुके हैं। कई छोटे स्कूल बसों फर्स्ट एड बॉक्स तक नहीं हैं। जिन बसों में फर्स्ट एड बॉक्स हैं, उनमें प्राथमिक उपचार के लिए किट नहीं है। वहीं कई बसों का अवश्यकता से अधिक बच्चे बिठाने पर चालान किया गया है।
इस साल सिर्फ दो स्कूल बसों को फर्स्ट एड की ट्रेनिंग दी गई है। -विजय लक्ष्मी, सेक्रेट्री, रेडक्रॉस सोसाइटी पंचकूला
बसों की खिड़कियों में सेफ्टी राड्स, दरवाजे से सटी सीट पर सुरक्षित जाली या मेटेलिक कवर ताकि छोटे बच्चों के साथ बस में किसी तरह का हादसा न हो या वे फिसलकर नीचे न गिर जाएं। बस में सीसीटीवी कैमरे जरूरी है। दो इमरजेंसी गेट एक साइड पर और एक पीछे। प्राथमिक उपचार बॉक्स होना चाहिए। आग बुझाओ यंत्र मौजूद होने चाहिए। स्टोरेज रैक ऊपर की बजाय बच्चे की सीट के नीचे हो।
बस के चारों इंडिकेटर चलते हैं तो बीप होना जरूरी। बस में छात्राएं हैं तो लेडी अटेंडेंट का होना अनिवार्य। बस में चढ़ने के दौरान स्टेप का साइज छह इंच होना चाहिए। प्रशिक्षित कंडक्टर अनिवार्य है। एक महीने की सीसीटीवी रिकार्डिंग का रिकार्ड जरूरी, बसों का रंग पीला हो। गोल्डन ब्राउन रंग की पट्टी पर स्कूल का नाम लिखा होना चाहिए। बस पर डीटीओ का मोबाइल नंबर लिखा होना जरूरी है।
11 बसों के किए चालान : ट्रैफिक इंस्पेक्टर
पंचकूला के ट्रैफिक इंस्पेक्टर सुरेश कुमार ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से पंचकूला ट्रैफिक पुलिस स्कूल बसों की चेकिंग कर रही है। सोमवार को 11 बसों के चालान किए गए हैं। अधिकांश बसों में फायर सेफ्टी सिस्टम एक्सपायर हो चुके हैं। कई छोटे स्कूल बसों फर्स्ट एड बॉक्स तक नहीं हैं। जिन बसों में फर्स्ट एड बॉक्स हैं, उनमें प्राथमिक उपचार के लिए किट नहीं है। वहीं कई बसों का अवश्यकता से अधिक बच्चे बिठाने पर चालान किया गया है।
इस साल सिर्फ दो स्कूल बसों को फर्स्ट एड की ट्रेनिंग दी गई है। -विजय लक्ष्मी, सेक्रेट्री, रेडक्रॉस सोसाइटी पंचकूला