आठ-आठ घंटे लंबे कट, लोगों में 'बिजली'
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पंजाब में बिजली संकट गहरा गया है। पहले पांच घंटे तक गुल रहने वाली बिजली अब आठ घंटे रुलाने लगी है। राज्य के तीन में से दो थर्मल प्लांटों में कोयले की कमी के चलते बिजली उत्पादन ठप हो गया है। आने वाले दिनों में बिजली कटौती बढ़ने की आशंका है।
दरअसल राज्य के दो थर्मल प्लांटों में केवल कुछ दिन का ही कोयला बचा है। इसके चलते पावरकॉम ने तीनों प्लांटों के 14 यूनिटों में से छह यूनिटों को फिर से बंद करा दिया है। इससे बिजली की बढ़ती मांग की तुलना में उपलब्धता कम हो गई है और लोगों को कट का सामना करना पड़ा रहा है, लेकिन पावरकॉम ने कोल सप्लाई करने वाली कंपनी पैनएम के खिलाफ कोई कदम उठाने की बजाय बाहर से महंगे दामों पर और बिजली खरीदने का समझौता किया है।
कोयले की कमी के कारण 5 यूनिट बंद
पावरकॉम मैनेजमेंट से बातचीत के बाद पैनएम कोल सप्लाई कंपनी ने पंजाब के तीनों थर्मल प्लांटों बठिंडा, लहरां मोहब्बत और रोपड़ को कोयले की सप्लाई शुरू तो कर दी है, लेकिन मांग की तुलना में यह बहुत कम है। वर्तमान में लहरां मोहब्बत में केवल 11 दिन का, जबकि बठिंडा प्लांट में 13 दिन का कोयला बचा है जबकि नियमों के मुताबिक थर्मल प्लांट में 22 से 23 दिन का कोयला होना जरूरी है। केवल रोपड़ थर्मल प्लांट में 28 दिन का कोयला है।
कोयले की कमी के कारण पावरकॉम ने लहरां मोहब्बत के चार में से तीन यूनिट और बठिंडा के चार में दो यूनिट बंद करा दिए हैं। वर्तमान में लहरां और बठिंडा प्लांटों का केवल एक-एक यूनिट चल रहा है।
रोपड़ के सभी छह यूनिट चल रहे हैं। इस तरह से कुल 14 यूनिटों में से छह फिलहाल बंद हैं। ऐसे में बिजली की उपलब्धता कम होने से उपभोक्ताओं को बिजली कट का सामना करना पड़ रहा है।
पंजाब में इस समय गांवों से लेकर शहरों तक दो से आठ घंटे के पावर कट लग रहे हैं। बिजली की मांग इस समय रोजाना 1500 लाख यूनिट से अधिक है, जबकि उपलब्धता 1350 लाख यूनिट तक ही है।
महंगे दामों में खरीदी बिजली
पावरकॉम बिजली की मांग को पूरा करने के लिए बाहर से शॉर्ट टर्म समझौते के तहत पावर खरीद रहा है। इसके तहत 485 मेगावाट बिजली और खरीद ली है, जो 10 जून से रोजाना पंजाब को मिलेगी।
यह बिजली अपने थर्मल प्लांटों में जनरेट की गई बिजली के मुकाबले काफी महंगी पड़ेगी। पावरकॉम पैनएम के खिलाफ कोई कदम नहीं उठा रहा है, जो प्लांटों को पूरा कोयला सप्लाई नहीं कर रही है।
कोट
कोयले के संकट के कारण यूनिट बंद कराए गए हैं। बिजली संकट दूर करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
केएस मान, चीफ इंजीनियर, बठिंडा थर्मल प्लांट
नंबर गेम
13 दिन तक का ही कोयला बचा है थर्मल प्लांटों में
23 दिन का कोयला स्टॉक में होना अनिवार्य
1500 लाख यूनिट है बिजली की मांग
1350 लाख यूनिट बिजली हो रही उपलब्ध
150 लाख यूनिट बिजली की कमी
485 मेगावाट और बिजली खरीदी शॉर्ट टर्म समझौते के तहत
10 जून से रोजाना उपलब्ध हो सकेगी बिजली
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मुख्य शहरों में पावर कट
अमृतसर 3-6 घंटे
जालंधर 2-3 घंटे
लुधियाना 2-3 घंटे
मोहाली 1 घंटा