पाक शरणार्थी बोले- वहां बेटियां नहीं सुरक्षित, जबरन होता धर्म परिवर्तन, मांगी भारत की नागरिकता
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डेढ़ दशक पहले पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लौया जिले से टूरिस्ट वीजा पर भारत आए पाकिस्तान के 70 सदस्यों ने देश की नागरिकता की मांग की है। मदीना और कहानौर से परिवार रोहतक पहुंचे व जिला विकास भवन में सांसद अरविंद शर्मा से मुलाकात की।
सांसद ने परिवार के सदस्यों को भरोसा दिया कि जल्द उनको देश की नागरिकता मिल जाएगी, क्योंकि पीएम मोदी व गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) बना है। पाकिस्तान से आए परिवारों ने सरकार व सांसद का इसके लिए धन्यवाद किया।
22 वर्षीय प्रकाश चंद ने बताया कि वे मूलरूप से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लैया जिले के रहने वाले हैं। उसके पिता मदनलाल, चाचा वजीरचंद व ताऊ सूबा राम के पास 20 किले जमीन थी। 2003 में वह वहीं दूसरी कक्षा में पढ़ता था। वहां पर हिंदुओं से दूसरे दर्जे का व्यवहार किया जाता था। कक्षा के अंदर सबसे पीछे बैठने को कहा जाता। इतना ही नहीं, परिवार की बेटियां सुरक्षित नहीं रहती थीं।
जबरन उनसे शादी करके धर्म परिवर्तन कर दिया जाता था। तंग आकर वे घर व जमीन छोड़कर 2004 में तीन माह के टूरिस्ट वीजा पर भारत आ गए। इसके बाद दिल्ली से रोहतक आए और कहानौर गांव में आकर बस गए। नागरिकता न होने के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
रोजी-रोटी कमाने के लिए मजदूरी करने लगे। स्थानीय पुलिस कई बार आकर बयान दर्ज करके ले जाती। हालांकि वीजा खत्म होने के बाद ज्यादातर समय पुलिस व स्थानीय नागरिकों का सहयोग ही मिला। नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) बनने से अब वे भी भारत के नागरिक बन जाएंगे।
दो साल की जद्दोजहद के बाद चार पाकिस्तानी बने भारतीय
मदीना गांव में रह रहे हंसराज ने बताया कि वह परिवार सहित 2005 में टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था। पाकिस्तान में उसकी तीन किले जमीन थी, जिसे वह छोड़कर परिवार सहित आ गया। क्योंकि वहां पर उनकी जान सुरक्षित नहीं थी। भारत आने के बाद वह रोहतक के मदीना गांव में आ गया, जहां खेतों में मजदूरी करने लगे।
उस समय परिवार में चार सदस्य थे, जिनमें लश्कर दास, हंसदास, सुगरा व मां मारो देवी। 2017 में चारों ने भारत की नागरिकता के लिए आवेदन किया। उस समय शर्त थी कि पाकिस्तान से परिवार 11 साल पहले भारत आया हो। अब 4 दिसंबर 2019 को जिला प्रशासन ने चारों को नागरिकता दी है। अब परिवार में 12 सदस्य हैं। बचे आठ सदस्यों को नए कानून के तहत नागरिकता दिलवाएंगे, क्योंकि सीएए (नागरिकता संशोधन एक्ट) के बनने से अब नागरिका लेना आसान हो गया है।
पाकिस्तान से आए परिवारों के 70 सदस्य चिह्नित किए गए हैं, जिन्होंने अपने पुराने कागजात दिखाए हैं। अन्य परिवारों को भी तलाश किया जा रहा है। कुछ लोग बहकावे में आकर नए कानून सीएए व एनआरसी का विरोध कर रहे हैं। ऐसे लोग पाकिस्तान से आए परिवारों का दर्द समझें और पूछें कैसे पाकिस्तान में पीड़ित परिवारों पर अत्याचार होता था। एक्ट का विरोध कर रही विपक्षी पार्टियों के नेता खुले मंच पर आकर बहस करें। - अरविंद शर्मा, सांसद रोहतक