{"_id":"650a0985fe1103eaf7012047","slug":"60-percent-posts-of-teachers-in-pu-are-vacant-education-is-getting-affected-chandigarh-news-c-16-sml1026-242535-2023-09-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: पीयू में शिक्षकों के 60 प्रतिशत पद खाली, शिक्षा हो रही प्रभावित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: पीयू में शिक्षकों के 60 प्रतिशत पद खाली, शिक्षा हो रही प्रभावित
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय में कई छोटे भाषा व आर्ट्स के विभाग शोधार्थियों और गेस्ट फैकल्टी के भरोसे चलाए जा रहे हैं। पीयू में वर्ष 2014 के बाद से नियमित शिक्षकों की भर्ती नहीं करवाई गई है। इस कारण करीब 60 प्रतिशत शिक्षकों के पद खाली हैं। इसका प्रभाव पीयू की रैकिंग पर भी पड़ रहा है। पुटा चुनाव में भी पिछले साल संगठन की ओर से इस मुद्दे को घोषणापत्र में रखा गया था, लेकिन इस दिशा में कोई खास काम नहीं किया गया। इस कारण शिक्षकों की कमी का सारा अतिरिक्त बोझ विभागों के शोधार्थियों पर पड़ रहा है।
पीयू में शोधार्थी अपने तय कार्यक्रम से अधिक कक्षाएं लेने को मजबूर हैं क्योंकि पीयू में नियमित शिक्षक ही बहुत कम रह गए हैं। पीयू में लगभग साढ़े 1300 नियमित पदों में 600 के करीब ही नियमित शिक्षक हैं। इनमें भी बहुत से शिक्षक लगभग 60 वर्ष और 65 वर्ष की आयु के हैं। वह जल्द ही सेवानिवृत्त हो जाएंगे, इसके बाद पद खाली रह जाएंगे।
शोधार्थी अमन ने बताया कि शिक्षकों की कमी के कारण शोधार्थियों पर काम का बोझ बढ़ने के साथ ही विद्यार्थियों की गुणवत्ता शिक्षा भी प्रभावित हो रही है। शोधार्थी छात्रों को नियमित शिक्षक की तरह अतिरिक्त समय नहीं दे पाते हैं। वहीं, शोधार्थियों का शोध काम भी इसके कारण प्रभावित होता है। पीएचडी पूरा करने में लंबा समय लग रहा है। पीयू में भाषा के नौ विभाग हैं। अंग्रेजी और हिंदी को छोड़कर अन्य सभी विभाग में एक या दो शिक्षक हैं। इस कारण पीएचडी के लिए उम्मीदवारों को कॉलेजों में गाइड तलाशने पड़ रहे हैं।
विज्ञापन
विभागों को खाली पदों की स्क्रीनिंग के लिए निर्देश दिए गए हैं। विभागों की तरफ से इसकी जानकारी प्रशासन के पास आने के बाद खाली पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करवाई जाएगी। - डाॅ. वाई पी शर्मा, रजिस्ट्रार, पीयू
इन विभागों में खाली पद
भाषा विभाग - - शिक्षकों की संख्या
- फ्रैंच विभाग - 1
- जर्मन विभाग - 2
- रशियन विभाग - 0
- उर्दू विभाग - 1
- संस्कृत विभाग - 1
- चाइनीज और तिब्बतियन विभाग - 2
- अंग्रेजी विभाग - 6
- हिंदी विभाग - 4
- पंजाबी विभाग - 2
विज्ञापन
पीयू में शोधार्थी अपने तय कार्यक्रम से अधिक कक्षाएं लेने को मजबूर हैं क्योंकि पीयू में नियमित शिक्षक ही बहुत कम रह गए हैं। पीयू में लगभग साढ़े 1300 नियमित पदों में 600 के करीब ही नियमित शिक्षक हैं। इनमें भी बहुत से शिक्षक लगभग 60 वर्ष और 65 वर्ष की आयु के हैं। वह जल्द ही सेवानिवृत्त हो जाएंगे, इसके बाद पद खाली रह जाएंगे।
विज्ञापन
शोधार्थी अमन ने बताया कि शिक्षकों की कमी के कारण शोधार्थियों पर काम का बोझ बढ़ने के साथ ही विद्यार्थियों की गुणवत्ता शिक्षा भी प्रभावित हो रही है। शोधार्थी छात्रों को नियमित शिक्षक की तरह अतिरिक्त समय नहीं दे पाते हैं। वहीं, शोधार्थियों का शोध काम भी इसके कारण प्रभावित होता है। पीएचडी पूरा करने में लंबा समय लग रहा है। पीयू में भाषा के नौ विभाग हैं। अंग्रेजी और हिंदी को छोड़कर अन्य सभी विभाग में एक या दो शिक्षक हैं। इस कारण पीएचडी के लिए उम्मीदवारों को कॉलेजों में गाइड तलाशने पड़ रहे हैं।
विज्ञापन
विभागों को खाली पदों की स्क्रीनिंग के लिए निर्देश दिए गए हैं। विभागों की तरफ से इसकी जानकारी प्रशासन के पास आने के बाद खाली पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करवाई जाएगी। - डाॅ. वाई पी शर्मा, रजिस्ट्रार, पीयू
इन विभागों में खाली पद
भाषा विभाग - - शिक्षकों की संख्या
- फ्रैंच विभाग - 1
- जर्मन विभाग - 2
- रशियन विभाग - 0
- उर्दू विभाग - 1
- संस्कृत विभाग - 1
- चाइनीज और तिब्बतियन विभाग - 2
- अंग्रेजी विभाग - 6
- हिंदी विभाग - 4
- पंजाबी विभाग - 2