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कृष्णा मार्केट के 59 बूथ शक के दायरे में

Wed, 07 May 2014 09:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 07 May 2014 09:47 AM IST
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59 Booths of Krishana Market are Doubtful

यूटी के उपायुक्त मोहम्मद शाइन के निर्देश पर मंगलवार को संपदा विभाग की चार अलग अलग टीमों ने सेक्टर-41 स्थित कृष्णा मार्केट के सर्वे किया। सर्वे के दौरान जहां मार्केट में 289 में से 19 बूथों पर ताला मिला, वहीं 59 बूथ अधिकारियों के शक के दायरे में आ गए।

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इन बूथों के अलॉटी ऑनरशिप को साबित न कर पाए। ऐसे में सर्वे करने के बाद चारों टीमों ने उपायुक्त को सौंपी अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि इन बूथों के मालिकों ने या तो इसे बेच दिया है या इसे किराए पर दे दिया है।
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अब इन बूथ के अलॉटियों को अपनी ऑनरशिप को साबित करने के लिए एक और मौका दिया जाएगा। अगर इसके बाद भी वह इसे साबित न कर पाए तो प्रशासन इन बूथों को सील कर देगा।
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संपदा विभाग की टीम सुबह 9.30 बजे मार्केट में पहुंचीं। दो टीमों का निरीक्षण तहसीलदारों ने किया और दो का नायब तहसीलदारों ने। औसतन हर टीम को 70-70 बूथों का सर्वे करने को कहा गया। एसडीएम (साउथ) कशिश मित्तल ने इस पूरे अभियान का सुपरविजन किया।

इसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई। उपायुक्त ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया था कि सभी अलॉटीज को मूल अलॉटमेंट कागजों, उचित सुबूत और अपने पहचान पत्रों के साथ मौके पर मौजूद होना होगा, जिससे वह बूथ की ऑनरशिप को साबित कर सके।

लेकिन, कई बूथों पर उनके मालिक तो मौजूद थे, लेकिन वह टीम के सवालों के सवाब न दे पाए। इस संबंध में चंडीगढ़ के उपायुक्त ने कहा कि सर्वे के बाद हमने 59 बूथों की पहचान कर ली है, जिनकी ऑनरशिप शक के दायरे में आई है। हम जल्द ही आगे की कार्रवाई करेंगे।

ऐसे आए शक के दायरे में
बूथों का सर्वे करने गई टीमों ने सबसे पहले बूथ में मौजूद दुकानदार से अलॉटमेंट के कागज मांगे। कागज के साथ साथ उन्हें अपने पहचान पत्र भी देने को कहा गया। अगर किसी दुकान में दो या तीन व्यक्ति थे तो उनसे भी पहचान पत्र देने को कहा गया। इसके बाद दुकानदारों से पूछा गया कि वह अपनी दुकान के लिए माल कहां से लाते हैं। इसका बिल भी उनसे मांगा गया। कई दुकानदार किसी भी सवाल का जवाब न दे पाए और न ही बिल दिखा पाए। ऐसे में टीम को यह शक हो गया कि उनकी दुकान कोई और ही चला रहा है। यहां दुकानदारों के चेहरों के हावभाव भी बता रहे थे कि उन्हें दुकानों में मिलने वाले सामान की कोई जानकारी नहीं है। अधिकतर बूथ मालिकों के पास पक्का बिल नहीं था।

अब बिना बताए आएंगे
सर्वे के लिए गई टीमों ने दुकानदारों से कहा कि इस बार तो वह पहले से नोटिस देकर आए हैं। लेकिन, अगली बार वह बिना बताए कभी भी चेकिंग करने आ जाएंगे। ऐसे में उन्हें कागजात दुकानों में हमेशा अपने साथ रखने होंगे।

 
पांच बूथों का आवंटन भी रद होगा
चंडीगढ़ के  पूर्व एडीसी पीएस शेरगिल की प्राथमिक जांच के बाद चंडीगढ़ के तत्कालीन उपायुक्त बृजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने लगभग डेढ़ साल पहले अपनी जांच पूरी की थी। इस समिति ने अपनी जांच में यह पाया था कि ट्राइसिटी में कामर्शियल प्रापर्टी होने के बावजूद पांच लोगों को सेक्टर-41 की कृष्णा मार्केट में बूथ अलाट किए गए थे। यह बूथ अलाटमेंट पॉलिसी का उल्लंघन था। इस जांच के आधार पर इन पांच बूथों का आवंटन रद्द होना तय तो है, लेकिन कार्रवाई अभी तक नहीं हुई है। अब इन बूथों का आवंटन भी रद किया जाएगा।

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