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53 साल बाद भी परिवार को सैनिक का इंतजार, पांच साल पहले दुश्मन देश से आई थी हैरानी भरी खबर

Wed, 15 Aug 2018 08:44 AM IST
अखिलेश बंसल, अमर उजाला, बरनाला (पंजाब)
अखिलेश बंसल, अमर उजाला, बरनाला (पंजाब) Updated Wed, 15 Aug 2018 08:44 AM IST
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53 years later the family is waiting for the soldier in barnala
सांकेतिक तस्वीर
भारत आजादी की 72वीं वर्षगांठ मना रहा है लेकिन भारत के 54 परिवार ऐसे भी हैं जो 1965 और 1971 के युद्ध के दौरान लापता हुए भारतीय सैनिकों को एक नजर देखने की बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इनमें बरनाला के गांव कर्मगढ़ के लाल सिंह का परिवार भी है। उन्हें भारतीय फौज द्वारा सेवाकाल के दौरान कई मैडल दिए गए थे। भारत सरकार सैनिक लाल सिंह को शहीद करार दे चुकी है जबकि कुछ समय पहले पाकिस्तान जेल से रिहा होकर लौटे सतीश कुमार ने पुष्टि की थी कि पाकिस्तान स्थित शाही किला इंटेरोगेशन सेंटर लाहौर में उसकी मुलाकात लाल सिंह से हुई थी। 
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उसने पत्र में यह भी लिखा कि लाल सिंह इस वक्त पाकिस्तान के किला अटैक फ्रंटियर (अटकल) जेल में है। इसके बाद पीड़ित परिवार को लाल सिंह के जिंदा होने और लौटने की आस बंधी। इसके बावजूद भारत सरकार ने पाक सरकार से संपर्क नहीं किया। पीड़ित परिवार का दावा है कि उनका लाल सिंह जीवित है।
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15 अक्तूबर 1965 को परिवार को भारतीय सेना के कमांडेट पीके नंदगोपाल के हस्ताक्षरों वाला पत्र मिला था, जिसमें लिखा था कि सैनिक लाल सिंह दुश्मन फौज का मुकाबला करते युद्ध में शहीद हो गया है। लाल सिंह का शव नहीं मिलने पर परिवार ने दावा किया कि लाल सिंह जीवित है, उसे ढूंढा जाना चाहिए। किसी सरकार ने इस पीड़ित परिवार की नहीं सुनी। 
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2013 में बंधी परिवार को आस

53 years later the family is waiting for the soldier in barnala
अटेस्टेड हलफनामा
पांच साल पहले भारत सरकार द्वारा शहीद करार दिए गए सैनिक लाल सिंह के घर फिरोजपुर से एक पत्र पहुंचा। जिसमें फिरोजपुर से सतीश कुमार पुत्र दयाल चंद का नोटरी एडवोकेट द्वारा अटेस्टेड हलफनामा था। सतीश कुमार ने पत्र में लिखा था कि वह पाकिस्तान में 12 साल की सजा काट कर आया है। उसने बताया कि लाल सिंह इस वक्त पाकिस्तान के किला अटैक फ्रंटियर (अटकल) जेल में है। जिसके बाद पीड़ित परिवार को लाल सिंह के जिंदा होने व लौटने की आस बंधी। 

सरकार ने झाड़े हाथ
सैनिकों की भलाई के लिए गठित सैनिक विंग ने कुछ दिन पहले गृह मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखा था। जिसके जवाब में उन्हें पत्र मिला कि पाकिस्तान की जेलों में कोई भारतीय सैनिक नहीं।

सरकार द्वारा दी गई जमीन को हड़प गए लोग
सैनिक लाल सिंह की पत्नी भजन कौर ने बताया कि उसके पति लाल सिंह को शहीद का दर्जा देने के बाद सरकार ने उनके परिवार को 10 एकड़ जमीन अलाट की थी, जिसके फर्जी दस्तावेज तैयार करवा लोग हड़प गए। उसके संबंध में कई साल तक अदालत में केस भी चला, लेकिन उन्हें आज तक इंसाफ नहीं मिला। भजन कौर और उनके बेटे महा सिंह का कहना है कि सतीश कुमार के पत्र के आधार पर लाल सिंह की खोज की जाए। उनके बच्चों के लिए सेना में नौकरी का प्रबंध किया जाए। 
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