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हरियाणाः लॉकडाउन में फंसे रहे 4000 मधुमक्खी पालक, 50 फीसदी कम होगा शहद का उत्पादन
Tue, 12 May 2020 10:43 AM IST
खुशबू गोयल
यशपाल शर्मा, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 12 May 2020 10:43 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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हरियाणा में इस साल शहद उत्पादन 50 फीसदी कम होने का अनुमान है। कारण, कोरोना के चलते जारी लॉकडाउन में 4000 मधुमक्खी पालकों का प्रदेश में ही फंसा रहना है। ये मधुमक्खियों के डेढ़ लाख बॉक्स को हिमाचल के किन्नौर, शिमला व कुल्लू जिलों के सेब बगीचों, पंजाब के लीची बागानों और जंगलों में पहुंचा ही नहीं पाए। बागवानी विभाग से अप्रैल महीने में माइग्रेशन पास मिलने पर मात्र दस फीसदी बॉक्स ही पहुंचाए जा सके।
अमूमन, हर साल मार्च के तीसरे सप्ताह में ये अपने बॉक्स सेब, लीची के बगीचों और यूकेलिप्टस (सफेदा) व शीशम की बहुतायत वाले जंगलों में पहुंचा देते थे। मधुमक्खी पालकों को इस बार सरसों के सीजन में भी मौसम खराब रहने के कारण शहद उत्पादन में बड़ी मार पड़ी है। बीते सालों के मुकाबले सरसों सीजन में भी पहले की तुलना आधा ही उत्पादन हुआ है। हरियाणा में सालाना 80 हजार क्विंटल शहर उत्पादन होता है। जिसके 40 हजार क्विंटल तक ही सिमटने की संभावना है।
फलों, फूलों के परागण में आई कमी
मॉडर्न फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन के निदेशक व शहद रत्न अवार्डी विनय फौगाट ने बताया कि मार्च-अप्रैल में फलों, फूलों के परागण का उत्तम समय होता है, अब जो काफी हद तक निकल चुका है। झज्जर जिले के मलिकपुर गांव निवासी विनय के अनुसार बॉक्स का माइग्रेशन न होने के कारण फलों में सेब, लीची, आम, अनार, जामुन, अमरूद व सब्जियों में तोरी, घीया, तरबूज, खरबूज, करेला, मटर में मधुमक्खियों से जो परागण होता है उसमें कमी आई है जिससे शहद का उत्पादन कम होगा। एक मधुमक्खी एक दिन में 3 किलोमीटर के दायरे में करीब 5000 फूलों का भ्रमण करती है।
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अमूमन, हर साल मार्च के तीसरे सप्ताह में ये अपने बॉक्स सेब, लीची के बगीचों और यूकेलिप्टस (सफेदा) व शीशम की बहुतायत वाले जंगलों में पहुंचा देते थे। मधुमक्खी पालकों को इस बार सरसों के सीजन में भी मौसम खराब रहने के कारण शहद उत्पादन में बड़ी मार पड़ी है। बीते सालों के मुकाबले सरसों सीजन में भी पहले की तुलना आधा ही उत्पादन हुआ है। हरियाणा में सालाना 80 हजार क्विंटल शहर उत्पादन होता है। जिसके 40 हजार क्विंटल तक ही सिमटने की संभावना है।
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फलों, फूलों के परागण में आई कमी
मॉडर्न फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन के निदेशक व शहद रत्न अवार्डी विनय फौगाट ने बताया कि मार्च-अप्रैल में फलों, फूलों के परागण का उत्तम समय होता है, अब जो काफी हद तक निकल चुका है। झज्जर जिले के मलिकपुर गांव निवासी विनय के अनुसार बॉक्स का माइग्रेशन न होने के कारण फलों में सेब, लीची, आम, अनार, जामुन, अमरूद व सब्जियों में तोरी, घीया, तरबूज, खरबूज, करेला, मटर में मधुमक्खियों से जो परागण होता है उसमें कमी आई है जिससे शहद का उत्पादन कम होगा। एक मधुमक्खी एक दिन में 3 किलोमीटर के दायरे में करीब 5000 फूलों का भ्रमण करती है।
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मधुमक्खी इतने प्रकार के शहद करती है पैदा
हरियाणा के मधुमक्खी पालकों की एपीस मैलिफेरा मधुमक्खी से अनेक शहद के प्रकार मिलते हैं। जिनमें नीम, अजवाइन, शीशम, सफेदा, सुरजमुखी, सरसों, जामुन, तिल, मल्टी, बबूल, जांडी, बेरी, खैर, कढ़ी पत्ता, माखन-टाली, बरसीम, प्याजा व अरहर इत्यादि का शहद शामिल है।
कोरोना में भी लाभदायक शहद
शहद रत्न विनय ने बताया कि हर रोज सुबह खाली पेट ठंडे पानी में 1 चम्मच शहद, 1 नींबू के साथ मिलाकर पीने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता काफी बढ़ जाती है। लहसुन, अदरक व तुलसी के पत्तों के साथ अजवाइन के शहद का सेवन नियमित करने से कोरोना जैसी महामारी में भी काफी राहत मिलेगी। 100 ग्राम शहद में 0.5 मिलीग्राम विटामिन सी पाया जाता है। विनय ने बताया कि लोग उनके पास निशुल्क घुटने के दर्द के इलाज के लिए बी वैनम थैरेपी लेने भी आते हैं। जिसमें मधुमक्खी से कटवाया जाता है।
पालन काउंट घटने से बिक रहा नकली शहद
विनय ने केंद्र व हरियाणा सरकार से शहद का न्यूक्लियर मैग्नेटिक टेस्ट शुरू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि 10 साल पहले 100 ग्राम शहद में 50 हजार पोलन कांउट के मानक एफएसएसएआई ने तय कर रखे थे, जिनको घटाकर 5 साल पहले 25000 पोलन कांउट कर दिया गया। हाल ही में प्रति 100 ग्राम शहद में पोलन कांउट घटाकर 5 हजार कर दिए गए हैं। जिससे लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है और बाजार में नकली शहद बिक रहा है।
कोरोना में भी लाभदायक शहद
शहद रत्न विनय ने बताया कि हर रोज सुबह खाली पेट ठंडे पानी में 1 चम्मच शहद, 1 नींबू के साथ मिलाकर पीने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता काफी बढ़ जाती है। लहसुन, अदरक व तुलसी के पत्तों के साथ अजवाइन के शहद का सेवन नियमित करने से कोरोना जैसी महामारी में भी काफी राहत मिलेगी। 100 ग्राम शहद में 0.5 मिलीग्राम विटामिन सी पाया जाता है। विनय ने बताया कि लोग उनके पास निशुल्क घुटने के दर्द के इलाज के लिए बी वैनम थैरेपी लेने भी आते हैं। जिसमें मधुमक्खी से कटवाया जाता है।
पालन काउंट घटने से बिक रहा नकली शहद
विनय ने केंद्र व हरियाणा सरकार से शहद का न्यूक्लियर मैग्नेटिक टेस्ट शुरू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि 10 साल पहले 100 ग्राम शहद में 50 हजार पोलन कांउट के मानक एफएसएसएआई ने तय कर रखे थे, जिनको घटाकर 5 साल पहले 25000 पोलन कांउट कर दिया गया। हाल ही में प्रति 100 ग्राम शहद में पोलन कांउट घटाकर 5 हजार कर दिए गए हैं। जिससे लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है और बाजार में नकली शहद बिक रहा है।