सरकारी सुविधाओं पर 5 सवाल, पढ़ें जवाब
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सवाल : सरकारी अस्पतालों में मरीजों के प्रति डाक्टरों का व्यवहार कब बदलेगा?
जवाब : डाक्टरों को ट्रेनिंग ही मरीज का ख्याल रखने और इलाज की दी जाती है। जब कभी मरीज जरूरत से ज्यादा होते हैं और डाक्टरों के पास टाइम की कमी हो जाती है तो ऐसी स्थिति में एक-दो डाक्टर मरीज को समझाने के बजाय सीधे प्वाइंट टू प्वाइंट बात करते हैं। इस पर मरीज को लगता है कि वे उनसे ठीक से बात नहीं कर रहे हैं।
क्या डॉक्टर मरीजों को सस्ती दवाएं लिखेंगे
सवाल : डाक्टर कब मरीजों के लिए सस्ती दवाएं लिखेंगे?
जवाब : गवर्नमेंट डाक्टर ऐसी छोटी बातों पर ध्यान नहीं देते। डाक्टरों की प्राथमिकता जेनरिक दवाएं ही होती हैं। कुछ केसों में जब सस्ती दवाएं काम नहीं करती हैं तो दूसरी दवाएं लिखनी पड़ती हैं।
सवाल : कब तक डाक्टर मरीजों को बेवजह जांच के लिए लिखते रहेंगे?
जवाब : इस बात से मैं इनकार नहीं कर सकता हूं। जब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन इस बात को उठा रहे हैं तो कहीं न कहीं गड़बड़ जरूर है। इसमें एमसीआई, सरकार और संस्थान को समय-समय पर कदम उठाने चाहिए। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह भी है कि कई बार डाक्टर अधिक जांच इसलिए भी लिखते हैं कि कहीं कुछ छूट न जाए।
संक्रमित बीमारियों के लिए जागरूक किया जाएगा
सवाल : संक्रमित बीमारियों को रोकने के लिए लोग कब तक जागरूक होंगे?
जवाब : यह सिस्टम का फाल्ट है। पब्लिक पूरी तरह से जागरूक नहीं है। सिर्फ दिखाने के लिए कुछ दिन अभियान चलाते हैं और फिर से फुस्स हो जाता है। जब पब्लिक अवेयर नहीं होगी, तब तक संक्रमित रोग नहीं रुकेंगे।
सवाल : एक स्वस्थ भारत में आम नागरिक की क्या भूमिका है?
जवाब : स्वस्थ भारत का सपना तभी साकार हो सकता है जब आम लोग जागरूक होंगे। डिस्पेंसरी में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। आम लोगों के पास अधिकार है कि वे अपने एमपी या अधिकारी से इससे जवाब मांगे। यदि लोग ही चुप रहेंगे तो उनके इलाज की सुविधाएं कैसे बढ़ेंगी।