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यूक्रेन में फंसे लुधियानवी: 112 में 49 छात्र वतन लौटे, 63 अब भी फंसे, 13 विद्यार्थी लापता, प्रशासन तलाश में जुटा

Fri, 04 Mar 2022 09:29 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Fri, 04 Mar 2022 09:29 PM IST
सार

आंकड़े के मुताबिक लुधियाना के 112 बच्चे यूक्रेन में हैं। इनमें से 49 भारत वापस आ चुके हैं। इसके अतिरिक्त 41 अलग-अलग देशों में फंसे हैं। 13 छात्रों का अभी पता नहीं चल सका है। इनकी तलाश भी जारी है।
 

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49 students of Ludhiana returned from Ukraine
यूक्रेन संकट - फोटो : एएनआई

विस्तार

रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग के कारण पूरे विश्व की चिंता लगातार बढ़ती ही जा रही है। सभी देशों ने अपने लोगों से बोल दिया था कि वह रूस और यूक्रेन को छोड़ दे जिससे वह सही सलामत अपने परिवार वालों के पास पहुंच सके। भारत के बीस हजार के करीब बच्चे पढ़ाई करने यूक्रेन गए थे। जंग के बीच उन्हें वहां से वापस लाने की प्रक्रिया जारी है। 

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लुधियाना से 112 बच्चे यूक्रेन पढ़ने गए थे। इनमें से 63 छात्र अभी फंसे हैं, जबकि 49 छात्र भारत पहुंच चुके है और 41 बच्चे ऐसे हैं जो अलग-अलग देशों में शरण लेकर बैठे हैं। इसके साथ नौ छात्र अभी यूक्रेन में फंसे है। हैरानी की बात यह है कि महानगर के 13 ऐसे छात्र हैं जिनका अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है कि वह यूक्रेन में हैं या किसी अन्य देश में। उनकी तलाश में विदेश मंत्रालय लगा है। 
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यूक्रेन से छात्रों को वापस लाने के प्रयास युद्ध स्तर पर जारी हैं। यूक्रेन में भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने वहां पढ़ने वाले बच्चों को यूक्रेन छोड़ने का आदेश जारी किया था और कहा था कि वह किसी तरह से अन्य देशों की सीमाओं पर पहुंचे। देश के चार केंद्रीय मंत्री अलग-अलग देश भी पहुंचे हैं। वह यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को बाहर निकालने में मदद कर रहे हैं। केंद्र सरकार के आदेश पर जिला प्रशासन ने यूक्रेन में पढ़ने वालों का आंकड़ा जुटाया है। आंकड़े के मुताबिक लुधियाना के 112 बच्चे यूक्रेन में हैं। इनमें से 49 भारत वापस आ चुके हैं। इसके अतिरिक्त 41 अलग-अलग देशों में फंसे हैं। 13 छात्रों का अभी पता नहीं चल सका है। इनकी तलाश भी जारी है।
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भारत लौटी राजपुरा की नवनीत कौर 
यूक्रेन के भयावह मंजर से निकलकर हंगरी के रास्ते अपने घर पहुंचीं नवनीत को शुक्रवार भाजपा नेताओं ने सम्मानित किया और मेडिकल की शिक्षा पूरी करवाने की बात कही। उन्होंने राजपुरा के सभी विद्यार्थियों को इंसाफ दिलवाने के लिए भाजपा हाईकमान से बात करने का भी आश्वासन दिया। पुलिस क्वार्टर निवासी नवनीत कौर ने बताया कि वह लवीव की मेडिकल यूविवर्सिटी में पिछले छह वर्ष से एमबीबीएस की शिक्षा ग्रहण कर रही थी। जहां मैं रह रही थी, वहां बमबारी नहीं हो रही थी लेकिन मेरे परिवार वालों को मेरी चिंता हो रही थी। 


यूनिवर्सिटी की बस से वह 1194 किमी का रास्ता तय कर सोमवार को हंगरी पहुंची, जहां से भारतीय विमान पर बैठकर दिल्ली एयरपोर्ट पहुंची और बुधवार राजपुरा पहुंच गई। नवनीत के पिता एएसआई हरभजन सिंह ने बताया कि जब से नवनीत आई है, बस एक ही चिंता है कि तीन माह बाद उसको मेडिकल की डिग्री मिल जाती। 

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