{"_id":"600453ef8ebc3e30b91cb765","slug":"464-crore-gst-scam-in-haryana-police-arrested-89-accused","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरियाणा में 464 करोड़ का जीएसटी घोटालाः 89 गिरफ्तार, 112 करोड़ बरामद, 72 मामले दर्ज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरियाणा में 464 करोड़ का जीएसटी घोटालाः 89 गिरफ्तार, 112 करोड़ बरामद, 72 मामले दर्ज
Sun, 17 Jan 2021 08:53 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Vikas Kumar
Updated Sun, 17 Jan 2021 08:53 PM IST
विज्ञापन
जीएसटी
- फोटो : pixabay
हरियाणा पुलिस ने बड़े पैमाने पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) घोटाले के खिलाफ एक सुव्यवस्थित अभियान के तहत कार्रवाई करते हुए जीएसटी फर्जी चालान बिल घोटाले में शामिल फर्जी फर्मों के चार प्रमुख गिरोह सहित अन्य आरोपियों का पर्दाफाश किया है। इन फर्जी फर्मों ने धोखाधड़ी के माध्यम से 464.12 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का गोलमाल कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया। इन जालसाजों की सांठगांठ न केवल हरियाणा में बल्कि पूरे देश में सक्रिय थी।
विज्ञापन
जीएसटी फर्जी चालान घोटाले में पुलिस ने अब तक 112 करोड़ रुपये से अधिक की रिकवरी कर जाली जीएसटी आइडेंटिफिकेशन नंबर (जीएसटीआईएन) का भी खुलासा किया है। इस संबंध में अब तक राज्य अपराध शाखा के पास कुल 72 पुलिस मामले दर्ज हुए हैं, जिसमें 89 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया है। कुल गिरफ्तारी में अधिकतम 40 मामले गोविंद शर्मा, गौरव, अनुपम सिंगला और राकेश अरोड़ा के खिलाफ दर्ज किए गए हैं।
विज्ञापन
पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मनोज यादव ने रविवार को बताया कि इन व्यक्तियों ने फर्जी ई-वे बिल (कंसाइनमेंट ट्रांसपोर्ट करने के लिए जीएसटी से संबंधित चालान) के माध्यम से माल की वास्तविक आपूर्ति के बिना कई फर्मों और कंपनियों को फर्जी चालान जारी किए और जीएसटीआर-3 बी फार्म के माध्यम से जीएसटी पोर्टल पर फेक इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) किए। यह भी खुलासा हुआ कि फर्जी जीएसटी चालान, ई-वे बिल और जाली बैंक लेनदेन की मदद से इन गिरोह द्वारा करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की गई है।
विज्ञापन
जांच के दौरान, यह भी सामने आया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से कुछ ऐसे भी हैं जो बार-बार आर्थिक अपराध की प्रवृति के हैं। पुलिस ने अब तक की गई कार्रवाई के तहत आबकारी और कराधान विभाग के माध्यम से दी जाने वाली 97.22 करोड़ रुपये की इनएडमिसिबल आईटीसी पर भी रोक लगाई है।