हरियाणा हाऊसिंग बोर्ड के गठन के 45 साल बाद भी नही इंफोर्समेंट विंग
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हरियाणा हाऊसिंग बोर्ड के गठन के 45 साल बाद भी अब तक इंफोर्समेंट विंग नहीं है। नतीजतन, प्रदेश भर में बोर्ड के करीब 87 हजार मकानों में किसी तरह की कमी या इनसे संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई के लिए बोर्ड दूसरे स्थानीय निकायों पर निर्भर है।
बोर्ड में स्टाफ की कमी के कारण अब तक अलग इंफोर्समेंट विंग नहीं है, लेकिन नई परियोजनाओं के आने पर इनकी बढ़ती संख्या के मद्देनजर अलग से इंफोर्समेंट विंग की जरूरत बढ़ेगी।
1971 में हाऊसिंग बोर्ड हरियाणा का गठन किया गया। प्रदेश के अलग अलग जिलों में ईडब्ल्यूएस, एलआईजी, एमआईजी सहित दूसरे दर्जे के फ्लैटों का भी निर्माण किया गया। लेकिन अभी भी जिले स्तर पर हाउसिंग बोर्ड के मकानों को लेकर शिकायतों का अंबार है।
वर्ष 1996 में तत्कालीन मुख्य सचिव ने इस संबंध में एक आदेश जारी किए थे, जिसके तहत इंफोर्समेंट विंग की जिम्मेवारी हुडा सहित अन्य स्थानीय निकायों को सौंपी गई थी, जिनसे जमीन लेकर मकानों का निर्र्माण किया गया है।
कई और परेशानियों का होगा हल
लेकिन, पहले से कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे दूसरे महकमों के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कई मामले में अदालत में भी विचाराधीन हैं। बोर्ड के सचिव रणधीर सिंह ने इंफोर्समेंट विंग के बारे में कहा कि फिलहाल इसकी जिम्मेवारी उन विभागों या निकाय की है, जिनकी जमीन पर बोर्ड के मकान विकसित किए गए हैं।
उन्होंने माना कि बोर्ड में कर्मियों की संख्या फिलहाल कम है, लेकिन कर्मियों की संख्या में बढ़ोतरी के बाद इस दिशा में भी विचार विमर्श किया जा सकता है।
कई और परेशानियों का होगा हल
हाउसिंग बोर्ड के मकानों में रहने वालों के लिए भी यह एक बड़ी दिक्कत है कि बिजली, सीवर या अतिरिक्त निर्माण संबंधी शिकायतों पर सुनवाई के लिए उन्हें विभागों के चक्कर काटने पड़ते हैं। अगर इंफोर्समेंट विंग का गठन होता है तो बोर्ड के मकानों में रहने वालों सहित आसपास के सेक्टरों के निवासियों की भी परेशानियां काफी कम हो जाएंगी।